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नूहँ में ब्रज जलाभिषेक यात्रा के बीच बिट्टू बजरंगी को हत्या की धमकी: हिन्दू संगठनों ने पंचायत कर सौंपा ज्ञापन, मुस्लिमों बोले – बाहरियों की एंट्री बैन हो

हरियाणा का मेवात क्षेत्र पिछले साल हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की वजह से चर्चा में रहा था। नूहँ से लेकर गुरुग्राम तक हिंदुओं पर हमले हुए थे, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी, तो 300 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो गए थे। इस साल 22 जुलाई 2024 यानी सावन के पहले सोमवार को फिर से वो ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा निकाली जाएगी, जो परंपरागत रूप से काफी पहले से निकलती रही है। लेकिन इस बार पिछले साल की तरह कोई हिंसा न हो, इसे लेकर हिंदू संगठन सतर्क हैं, साथ ही प्रशासन भी यात्रा से जुड़ी तैयारियों में जुट गया है। वहीं, इस बीच गौरक्षक बिट्टू बजरंगी को फोन पर धमकी मिली है, कि वो इस साल नूहँ न जाएँ वर्ना उनकी हत्या कर दी जाएगी।

हिंदू संगठनों की पंचायत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नूहँ में ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा निकालने को लेकर हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों ने पंचायत की है, जिसमें आसपास के गाँवों से भी भारी संख्या में लोग पहुँचे। ये पंचायत गुरुवार (11 जुलाई 2024) को किरा गाँव में स्थित वीर भगत सिंह गौशाला में हुई। पंचायत में आस पास के गाँवों के अलावा नूहँ, पुन्हाना, पिनगवाँ, तावडू, पलवल, हथीन, सोहना, गुरुग्राम से भी लोग पहुँचे। इस पंचायत में कहा गया कि यात्रा शांतिपूर्ण रहे, इसकी जिम्मेदारी हिंदुओं के साथ ही मुस्लिमों की भी है। इसके लिए सरकार और जिला प्रशासन को भी सुरक्षा की जिम्मेदारी सही से उठानी चाहिए, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। इस पंचायत में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

मुस्लिम बोले, बाहरी लोगों के आने पर लगे रोक

एक तरफ हिंदू पक्ष के लोगों ने पंचायत कर शांतिपूर्ण जलाभिषेक की बात कही, तो दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि प्रशासन इस धार्मिक यात्रा में बाहर के लोगों को आने से रोके। मेवात विकास सभा से जुड़े लोगों ने कहा कि पिछले साल की हिंसा से काफी नुकसान हुआ। इस बार ऐसी किसी भी घटना को प्रशासन न होने दे। इसलिए वो बाहर से आने वाले लोगों को रोके, ताकि माहौल न बिगड़े।

बिट्टू बजरंगी को जान से मारने की धमकी

फरीदाबाद के संजय इन्क्लेव में रह रहे गौरक्षक बिट्टू बजरंगी को जान से मारने की धमकी मिली है। बिट्टू बजरंगी ने मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी के मामले में सारन थाना में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस के अनुसार बिट्टू बजरंगी ने शिकायत में बताया है कि 6 जुलाई 2024 को वह अपने घर पर था। इस दौरान उसके मोबाइल फोन पर अनजान नंबर से एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने बिट्टू को नूहँ आने से मना किया। साथ ही कहा कि इस बार नूहँ आने पर उसे जान से मार दिया जाएगा। पुलिस अज्ञात के खिलाफ मामला दर्जकर जाँच शुरू कर दी है

बता दें कि ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा हर साल सावन के पहले सोमवार को निकलती है। ये नूहँ के नल्हड़ मंडिर से शुरू होकर फिजोरपुर झिरका के झिर मंजिर से होते हुए सिंगाव गाँव के शिव मंदिर पर समाप्त होती है, जहाँ श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। बीते साल 2023 में नूहँ में इस जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिमों ने हमला बोल दिया था, जिसमें काफी हंगामा हुआ है। इस हमले की आग नूहँ से लेकर गुरुग्राम तक फैल गई थी। इंटरनेट बंद करना पड़ा था, तो 300 से ज्यादा गिरफ्तारियाँ की गई थी। इस हिंसा में 6 लोगों की मौत भी हुई थी।

अब से हर साल 25 जून होगा ‘संविधान हत्या दिवस’: मोदी सरकार ने जारी की अधिसूचना, अमित शाह बोले – तानाशाही मानसिकता से घोंटा गया था लोकतंत्र का गला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस’ घोषित किया है। यही वो दिन था जब 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने देश में आपातकाल घोषित करते हुए विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। साथ ही मीडिया पर भी अंकुश लगा दिया गया था, सरकार तय करती थी क्या छपेगा और क्या नहीं। आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी के बेटे संजय सिंह ने हजारों लोगों की जबरन नसबंदी करवाई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ताज़ा फैसले का ऐलान करते हुए याद किया कि कैसे इंदिरा गाँधी ने बेशर्मी से तानाशाही मानसिकता का परिचय देते हुए हमारे लोकतंत्र की आत्मा का गला घोंट दिया था। उन्होंने याद किया कि कैसे लाखों लोग जेल में ठूँस दिए गए थे, मीडिया की आवाज़ को दबा दिया गया था। अमित शाह ने ऐलान किया कि हर साल इसकी स्मृति में भारत सरकार ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि इस दिन देश उन महान लोगों के योगदानों का स्मरण करेगा, जिन्होंने आपातकाल का दर्द को सहन किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ये निर्णय लिए जाने के पीछे उद्देश्य है उन लाखों लोगों की भावनाओं का सम्मान करना, जिन्होंने दमनकारी सरकार के हाथों अकल्पनीय उत्पीड़न का सामना करने के बावजूद लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए संघर्ष किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इससे प्रत्येक भारतीय में व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं लोकतंत्र की रक्षा की अखंड ज्योति को प्रज्वलित रखने में मदद मिलेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझाया कि ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने से कॉन्ग्रेस जैसी तानाशाही ताकतों को उस भयावहता को फिर से दोहराने से रोका जा सकेगा। इसके लिए जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है कि भारत के लोगों को भविष्य में सत्ता के घोर दुरुपयोग को रोकने के लिए इसके जरिए प्रतिबद्ध किया गया है। नोटिफिकेशन में लिखा है कि भारत के लोगों का संविधान और लोकतंत्र पर दृढ विश्वास है। इससे कॉन्ग्रेस को करारा झटका लगा है जो लगातार संविधान-संविधान की रट लगा रही थी और भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार फैला रही थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, “25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाना हमें याद दिलाएगा कि जब भारत के संविधान को कुचला गया था, तब क्या हुआ था। यह उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने का भी दिन है, जिन्होंने आपातकाल की ज्यादतियों के कारण कष्ट झेले थे, जो भारतीय इतिहास का एक काला दौर था।” बता दें कि पीएम मोदी खुद आपातकाल विरोधी आंदोलन में सक्रिय थे, उस दौरान उन्होंने पुलिस से बचने के लिए एक सिख की वेशभूषा भी धरी थी।

‘सरकारी खजाने को ₹4000 करोड़ का नुकसान, सिद्दरमैया की पत्नी को पॉश इलाके में दे दी सरकार जमीन’: विरोध कर रहे BJP नेता हिरासत में, कॉन्ग्रेसी CM ने अलापा जाति का राग

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी पार्वती से जुड़े जमीन घोटाले के एक मामले में भाजपा ने विरोध प्रदर्शन किया है, जिसके बाद पार्टी के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने भी पार्वती के खिलाफ शिकायत दायर किया है। इसे ‘मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी’ स्कैम कहा जा रहा है। आरोप है कि मुआवजे की योजना का गलत फायदा उठा कर कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री की पत्नी ने मैसूर के पॉश इलाके में जमीन अपने नाम करा ली। उनकी 3.16 एकड़ जमीन के बदले 50:50 फॉर्मूला के तहत इसकी आधी जमीन अन्यत्र मुहैया कराई गई।

ये योजना उनलोगों के लिए लाई गई थी, जिनकी जमीन का अधिग्रहण विकास परियोजनाओं के कारण सरकार को करना पड़ता है। अब आरोप है कि इसके तहत कुछ खास लोगों को फायदा पहुँचाया गया है। आरोप है कि CM की पत्नी को दक्षिण मैसूर के प्राइम रियल एस्टेट में 38,283 स्क्वायर फ़ीट जमीन दी गई। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे अवैध तरीके से इसे लिया गया। पुलिस ने इस मामले में कोई FIR नहीं दर्ज की है, कहा है कि MUDA इस मामले की जाँच कर रहा है।

प्रदेश भाजपा का कहना है कि इससे राज्य सरकार के खजाने को 4000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। वहीं सीएम सिद्दारमैया का कहना है कि जिस जमीन के बदले उनकी पत्नी को जमीन दी गई वो उनके साले ने अपनी बहन को गिफ्ट की थी। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा का कहना है कि इस जमीन को 2004 में खरीदा गया था और 2010 में गिफ्ट किया गया था। इसके लिए दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई। अब इस मामले से बचने के लिए सिद्दारमैया ने नया पैंतरा आजमाया है।

वो कह रहे हैं कि पिछड़ी जाति से होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीति कर रहे हैं, साथ ही कहा कि हमें जवाब देने भी आता है। कर्नाटक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष BY विजयेंद्र विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे, उन्हें भी हिरासत में लिया गया। मैसूर में MUDA के दफ्तर के बाहर भाजपा ने बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई थी। उन्हें बस में बिठा कर वापस ले जाया गया। आरोप है कि पार्वती को जो जमीन दी गई, उसके दाम ली गई जमीन से कई गुना अधिक हैं।

पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी पर चलेगा हत्या के प्रयास का मामला: TDP विधायक की शिकायत पर आंध्र प्रदेश पुलिस ने दर्ज की FIR, 2 पुलिस अधिकारी भी लपेटे में

YSR कॉन्ग्रेस पार्टी के मुखिया और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई है। उन पर हत्या के प्रयास के मामले में यह FIR दर्ज हुई है। उन पर यह FIR सत्ताधारी TDP के एक विधायक ने दर्ज करवाई है। उनके साथ कुछ पुलिस अफसरों के नाम भी इस FIR में दर्ज किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, TDP विधायक रघु राम कृष्णम राजू ने गुंटूर में यह FIR दर्ज करवाई है। राजू पहले नरसापुरम लोकसभा सीट से YSRCP से सांसद थे। उनका आरोप है कि राज्य CID ने उन्हें गिरफ्तार कर उनके साथ बदसलूकी की थी। उनका आरोप है कि यह सब कुछ तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के कहने पर हुआ।

राजू ने इस मामले में राज्य के पुलिस खुफिया विभाग के पूर्व मुखिया PSR अंजनायेलु और CID के ASP जी पर्भवती को भी आरोपित बनाया है। MLA राजू का आरोप है कि उन्हें 2021 में गिरफ्तार किया गया था और बिना कोई ट्रांजिट वारंट के CID द्वारा गुंटूर ले जाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ उनके साथ पुलिस अफसरों ने मारपीट की।

उन्हें चमड़े की बेल्ट और लाठियों से पीटा गया और उन्हें दवाइयाँ भी नहीं लेने दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनका मोबाइल ले लिया और उसे जबरदस्ती खुलवाया। इसके अलावा उन्हें जान से मारने की धमकी भी पुलिस अधिकारियों ने दी।

अब इस शिकायत के आधार पुलिस अधिकारियों के साथ ही पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी को आरोपित बनाते हुए पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इस FIR में हत्या के प्रयास, षड्यंत्र रचने, मारपीट समेत कई धाराएँ लगाई गई हैं।

गौरतलब है कि राम कृष्ण राजू 2018 में भाजपा छोड़ कर YSRCP में शामिल हुए थे। 2019 लोकसभा चुनाव में राजू को YSRCP ने नरसापुरम लोकसभा सीट से टिकट दिया था। वह यह सीट TDP उम्मीदवार को हरा कर जीत भी गए थे। हालाँकि, सांसद बनने के बाद उनके रिश्ते YSRCP और जगन मोहन रेड्डी से बिगड़ गए।

उनके कुछ बयान भी सामने आए थे जहाँ उन्होंने YSRCP मुखिया की आलोचना की थी। इसके बाद उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज कर उन्हें मई, 2021 में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, जहाँ से उन्हें जमानत मिली थी।

उधर बेल को जीत दिखा रही थी AAP, इधर 25 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए अरविंद केजरीवाल, सुप्रीम कोर्ट बोला – CM बने रहना है या नहीं इस पर लें निर्णय

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 25 जुलाई 2024 तक बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीएम केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद यह आदेश आया है। दरअसल, केजरीवाल को सीबीआई ने 26 जून को गिरफ्तार किया था। अब तक वे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की न्यायिक हिरासत में थे।

दरअसल, सीबीआई ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ी अनियमितताओं में अरविंद केजरीवाल को मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक बताया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में CBI ने कहा था कि केजरीवाल के करीबी सहयोगी और AAP के पूर्व मीडिया प्रभारी विजय नायर विभिन्न शराब निर्माताओं और व्यापारियों के संपर्क में थे और आबकारी नीति में उनके अनुकूल प्रावधानों के लिए रिश्वत की माँग की थी।

सीबीआई ने अपने पिछले आरोपपत्र में कहा था कि आम आदमी पार्टी को मिले 100 करोड़ रुपए की रिश्वत में से 44.45 करोड़ रुपए की राशि जून 2021 से जनवरी 2022 के दौरान ‘हवाला चैनलों’ के माध्यम से गोवा स्थानांतरित की गई थी। इन पैसों का उपयोग वहाँ के विधानसभा चुनाव अभियान में पार्टी का प्रचार-प्रसार करने के लिए किया गया था।

राउज एवेन्यू का निर्णय आने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 जुलाई 2024) को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा कि चूँकि मामला जीवन के अधिकार से जुड़ा है और गिरफ्तारी का मुद्दा बड़ी बेंच को भेजा गया है, इसलिए केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए।

इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अरविंद केजरीवाल को तय करना है कि उन्हें मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए या नहीं। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा, “हम इस तथ्य से अवगत हैं कि अरविंद केजरीवाल एक निर्वाचित नेता हैं, लेकिन वे पिछले 90 दिनों से अधिक समय से कारावास में हैं।”

उल्लेखनीय है कि दिल्ली शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। अब उन्हें भले ही सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है लेकिन अभी वह जेल से बाहर नहीं आ पाएँगे। उन्हें ईडी के बाद सीबीआई ने अरेस्ट किया था। उस मामले में भी दिल्ली सीएम ने हाई कोर्ट में चुनौती थी। अब मामले की सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

महाराष्ट्र में MLC चुनाव में फिर ज़िंदा हुआ ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’: जेल से पहुँचे विधायक की वोटिंग का विरोध, रिजल्ट से पता चलेगा MVA-महायुति में कौन कितने पानी में

महाराष्ट्र में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान जारी है। शुक्रवार (12 जुलाई) की सुबह 9 बजे से विधान भवन कॉम्प्लेक्स में वोटिंग हो रही है, जिसमें दोपहर 2 बजे तक 270 विधायक वोट डाल चुके हैं। ये वोटिंग शाम 4 बजे तक चलेगी, जिसकी गिनती शाम 5 बजे की जाएगी।

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में जीत के लिए एक कैंडिडेट को 23 विधायकों के वोट चाहिए। इनमें बीजेपी के 103, शिवसेना (शिंदे गुट) के 38, एनसीपी (अजित गुट) के 42, कॉन्ग्रेस के 37, शिवसेना (यूबीटी) के 15 और एनसीपी (शरद पवार) के 10 विधायक हैं। विधान परिषद के 11 सदस्य 27 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। इनकी जगह भरने के लिए 11 सीटों पर 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। महाराष्ट्र की 288 सीटों वाली विधानसभा में अभी 274 विधायक हैं, जो इनके लिए वोट कर रहे हैं। अब सिर्फ 4 विधायक वोटिंग के लिए बचे हैं।

महाराष्ट्र में सत्ता संभाल रही महायुति ने चुनाव में 9 कैंडिडेट उतारे हैं। इसमें बीजेपी ने सबसे ज्यादा 5 कैंडिडेट खड़े किए हैं। वहीं, अजित पवार की एनसीपीऔर शिवसेना शिंदे गुट ने दो-दो कैंडिडेट उतारे हैं। विपक्ष में बैठी महाविकास अघाड़ी के 3 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें कॉन्ग्रेस और शिवसेना- यूबीटी ने 1-1 कैंडिडेट खड़ा किया है, जबकि शरद पवार की एनसीपी-एसपी शेतकरी कामगार पक्ष के उम्मीदवार जयंत पाटिल का समर्थन कर रही है। जयंत पाटिल अभी एमएलसी हैं।

बीजेपी विधायक की वोटिंग का विरोध

शिंदे गुट के नेता महेश गायकवाड़ पर पुलिस स्टेशन में फायरिंग करने वाले बीजेपी विधायक गणपत गायकवाड़ भी मतदान करने विधान भवन पहुँचे। उन्हें मतदान के लिए कोर्ट से परमिशन मिली थी। कॉन्ग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) उनकी वोटिंग का विरोध कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस ने विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखकर गायकवाड़ को मतदान के लिए रोकने की माँग की है।

शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि साल 2022 में विधान परिषद ​​​​​​ के चुनाव में ​एनसीपी के विधायक नवाब मलिक और अनिल देशमुख को मतदान की अनुमति नहीं दी गई थी। ऐसे में महेश को भी वोटिंग की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। हालाँकि वो अनुमति लेकर विधान भवन पहुँचे हैं। महेश गायकवाड़ कल्याण (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र के विधायक है। उन्हें फरवरी में पुलिस स्टेशन के अंदर एक शिवसेना नेता पर गोली चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

बता दें कि एमएलसी चुनाव को देखते हुए रिजॉर्ट पॉलिटिक्स एक बार फिर से चर्चा में लौट आई। तमाम दलों ने अपने विधायकों में एकजुटता बनाए रखने के लिए रिजॉर्ट्स में रखा और फिर सभी विधायक वोटिंग के लिए पहुँचे। याद दिला दें कि ऐसी ही रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के बीच शिवसेना टूट गई थी और उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी, जिसके बाद एकनाथ शिंदे की अगुवाई में नई सरकार बनी।

बनारस के घाट, काशी की चाट… अनंत-राधिका के विवाह स्थल की झलकियाँ: विदेशी भी रंगे होंगे भारत के रंग में, नीता अंबानी ने साझा किया वीडियो

अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी से पहले चल रहे कार्यक्रम कई महीनों से चर्चा में हैं। इन कार्यक्रमों में अब तक भारतीय सभ्यता, हिंदू संस्कार, देश की आध्यात्मिक इतिहास का खूब ध्यान दिया गया है। आज भी कुछ यही देखने को मिलेगा। दरअसल, नीता अंबानी ने शादी से कुछ घंटे पहले एक वीडियो साझा करके विवाह स्थल की कुछ झलकियाँ दिखाई हैं जिनसे पता चल रहा है कि कैसे वो विवाह स्थल में काशी को खास महत्व दिया गया है।

इन झलकियों को साझा करते हुए वो कहती हैं, “जय काशी विश्वनाथ, काशी के साथ मेरी भक्ति का एक गहरा और विशेष नाता रहा है। मेरे और मेरे परिवार के लिए ये हमेशा जरूरी रहा कि हमेशा से किसी भी जरूरी और शुभ काम से पहले देवी और देवताओं का आशीर्वाद लें।”

उन्होंने कहा, “कुछ हफ्ते पहले मैं अपने बच्चों अनंत और राधिका की शादी से पहले काशी गई थी। मैं हमेशा काशी से हमेशा अभिभूत रही हूँ, ये सबसे पुराना जीवित शहर है… रोशनी का शहर… भारतीय सभ्यता का उद्गम स्थल।”

नीता अंबानी ने कहा, “अनंत अंबानी और राधिका की शादी के दौरान हमने भारतीय सभ्यता और कला को दिखाने का प्रयास किया है। इसके लिए 1000 कारीगरों, शिल्पकारों, बुनकरों, कलाकारों को साथ लाया गया। मैं खुश हूँ कि मैं शादी में काशी की खूबसूरती और पावनता को दिखा सकूँगी।” उन्होंने कहा, “गंगा किनारे बजने वाली शहनाई की वो धुन, जो हर शादी को खास बना देती है। मैंने काशी में महसूस किया कि महादेव यहाँ वास करते हैं। गणपति संग नंदी जहाँ मंत्रों की गूँज है। पावन है यह नगरी, काशी नगरी।”

बता दें कि राधिका और अनंत की शादी से पहले नीता अंबानी की यह वीडियो इसलिए आई है क्योंकि जियो वर्ल्ड सेंटर में एक बनारस का कॉर्नर भी सजाया गया है। इसमें काशी की झलक देखने को मिलेगी। जैसे कार्यक्रम में बनारस के घाटों जैसे घाट बनाए गए हैं ताकि मेहमान इन घाटों पर काशी को महसूस कर सकें। नीता अंबानी की वीडियो में दिखाए गए दृश्य विवाह स्थल के ही हैं। इसके अलावा पता चला है कि इस शादी को लेकर पूरे जियो वर्ल्ड सेंटर को भारतीय थीम पर सजाया गया है। देश से लेकर विदेशी तक सबको यहाँ भारतीय सभ्यता के अनुरूप ढला देखा जाएगा।

‘9वीं बार नहीं बचेगी तेरी जान’: रिश्तेदारी में भागने के बावजूद इस युवक को बार-बार काट रहा साँप, डॉक्टरों की कमिटी करेगी जाँच

ताज़ा अपडेट: जाँच में सामने आया है कि विकास दुबे को साँप ने बस एक बार ही काटा था। उसके बाद 6 बार इसे बस स्नेक-फोबिया हुआ, यानी उसे लगा कि साँप ने काटा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसकी जाँच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपते हुए प्राइवेट हॉस्पिटल के इलाज पर संदेह जताया है। साँप से बहुत ज़्यादा डर जाने के बाद स्नेक-फोबिया हो जाता है। निजी अस्पतालों ने उसे बताया भी नहीं कि उसे साँप ने नहीं डसा है, ये सिर्फ फोबिया है।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक युवक को एक साँप ने 40 दिन में 7 बार काट और हर बार डॉक्टरों की मदद से उसकी जान बच गई। 24 साल युवक विकास दुबे का दावा है कि उसने सपने में साँप को देखा देखा और साँप ने उससे कहा कि वह उसे 9 बार काटेगा, और उस दौरान उसे कोई नहीं बचा पाएगा। अब मामले में जिले के कलेक्टर ने सदस्यों की कमिटी बनाकर जाँच का आदेश दिया है।

फतेहपुर प्रशासन ने कलेक्टर के आदेश को बाकायदा एक कमेटी बनाई है। इस कमिटी में तीन डॉक्टरों को शामिल किया गया है। साँप द्वारा बार-बार काटने, उसका इलाज करने जैसे कई बिंदु की जाँच करेगी। उसके बाद रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जाएगी। सीएमओ डॉक्टर राजीव नयन गिरी ने कहा है कि यह कमिटी विकास का इलाज करने वाले निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर से भी पूछताछ करेगी।

युवक का हर बार इलाज करने वाले डॉक्टर जवाहरलाल का कहना है, “यह हैरान करने वाला संयोग है। हर बार उसे एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन और इमरजेंसी दवाएँ देकर इलाज करते हैं और वह ठीक होकर घर चला जाता है।” डॉक्टर का कहना है कि विकास के शरीर पर हर बार साफ तौर पर साँप के काटने के निशान मिलते हैं।

इस बार गुरुवार को साँप ने उसे एक बार फिर काट लिया। सातवीं बार जब साँप ने युवक को काटा तो उसकी हालत नाजुक हो गई। उसे शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ वह आईसीयू में भर्ती है। इलाज कर रहे डॉक्टर जवाहरलाल के अनुसार, अभी हालत चिंताजनक बनी हुई है और लगभग 12 से 24 घंटे बाद कुछ बता पाना मुमकिन होगा।

दरअसल, मामला मलवा थाना क्षेत्र के सौरा गाँव का है। यहाँ के रहने वाले विकास दुबे का दावा है कि एक साँप उनके पीछे हाथ धोकर पड़ा है। साँप से बचने के लिए विकास पहले अपनी मौसी के यहाँ भागकर गया, फिर चाचा के यहाँ गया। हालाँकि, साँप ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और बार-बार उसे डँसा। इस घटना से इलाके के लोग भी हैरान हैं।

विकास ने बताया कि 2 जून की रात 9 बजे बिस्तर से उतरने के दौरान साँप ने उन्हें पहली बार काटा था। इसके बाद परिजन पास के ही एक प्राइवेट नर्सिंग होम में ले गए। इलाज के 8 दिन बाद यानी 10 जून की रात को साँप ने दूसरी बार काटा। वो फिर ठीक होकर घर वापस आ गया। इसके बाद विकास भागकर मौसी के यहाँ चला गया, लेकिन 28 जून को वहाँ भी साँप ने पाँचवी बार काट लिया।

विकास का कहना है कि पिछले 40 दिनों में यह साँप उन्हें 7 बार काट चुका है। साँप काटने से पहले हर बार उन्हें आभास हो जाता है। साँप काटने के बाद वह इलाज कराने के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं और इलाज कराते हैं। विकास का दावा है कि तीसरी बार काटने के बाद रात में साँप ने सपना दिया था।

विकास का दावा है कि सपने में साँप ने कहा, “मैं तुझे नौ बार काटूँगा, लेकिन आठवीं बार तक बच जाएगा। नौंवी बार कोई भी शक्ति, तांत्रिक और डॉक्टर नहीं बचा पाएगा और तुझे साथ ले जाऊँगा।” इस मामले को लेकर विकास के परिजनों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। अब प्रशासन ने इस पर कदम उठाया है।

‘बहू ने एक बार भी नहीं कहा ‘कीर्ति चक्र’ छूकर भी देख लीजिए’: बलिदानी कैप्टन के पिता बोले – पैसों को लेकर नहीं है कोई मतभेद, रोती हुईं माँ ने कहा – अब जीना नहीं चाहती

सियाचिन में बलिदान हुए कैप्टन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत भारत सरकार ने ‘कीर्ति चक्र’ से नवाजा, जिसे उनकी पत्नी स्मृति सिंह और माँ मंजू देवी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्राप्त किया। अब परिवार में सास-बहू में थी ठन गई है, माता-पिता ने मीडिया के सामने आकर बहू स्मृति पर कई आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ‘कीर्ति चक्र’ स्मृति लेकर चली गईं, उन्हें कुछ नहीं मिला। बलिदानी कैप्टन की माँ ने ‘बहुऍं भाग जाती हैं’ कह कर बताया कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं।

अब ‘News 18’ से बात करते हुए वीरगति को प्राप्त कैप्टन अंशुमान सिंह की माँ ने कहा कि ‘कीर्ति चक्र’ लेकर बहू अपने मायके गुरदासपुर चली गई हैं। दिवंगत अंशुमान सिंह के पिता खुद सेना से रिटायर हैं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने जीवन के अंतिम पड़ाव पर बलिदान को गले लगाया, अंतिम यात्रा में लोग उनका नाम लिख कर पुष्पवर्षा कर रहे थे – इसे वो आज भी अपने दिलों में सँजो कर रखे हुए हैं, CM योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने समय उन्हें अपनापन महसूस हुआ।

उन्होंने राज्य व केंद्र सरकारों द्वारा किए गए सहयोग को लेकर कृतज्ञता जताई, लेकिन साथ ही कहा कि यूपी सरकार ने जो 50 लाख रुपए दिए थे उसमें से 35 लाख रुपए बहू और 15 लाख रुपए उन्हें मिले थे। उन्होंने आगे बताया कि राज्य सरकार ने सड़क के नामकरण का आश्वासन दिया था, जिसके लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सर्कुलर जारी कर दिया है। उन्होंने ये भी बताया कि परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाए की प्रक्रिया भी मुख्यमंत्री ने आगे बढ़ा दी है।

बीमा के पैसों को लेकर उन्होंने बताया कि वो भी 50:50 डिस्ट्रीब्यूट हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि पैसे को लेकर उनका कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने ‘दर्द’ की बात करते हुए कहा, “जिस दिन राष्ट्रपति भवन में मेरी पत्नी जा रही थीं, वहाँ जो पेपर दिया गया उसे उन्होंने हाथ से पकड़ा। मेरी बहू ने कहा होगा, जिसके बाद CO साहब ने कहा कि ये अच्छा नहीं लगा। हमने कहा कि आपकी इच्छा है तो हम रक्षा अलंकरण समारोह में नहीं जाएँगे। मैंने अपनी पत्नी से सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से सम्मान लेने के दौरान हाथ लगाने के लिए कहा और उन्होंने ऐसा ही किया, फिर झिझक के साथ हाथ हटा लिया।”

बलिदानी कैप्टन के पिता ने कहा कि वहाँ से लौटने के बाद लखनऊ में अंशुमान सिंह की मूर्ति के पास ‘कीर्ति चक्र’ लगाए जाने का निवेदन दिया, जिस पर उन्होंने विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि ‘भारत मंडपम’ में डिनर के दौरान बहू के पास ‘कीर्ति चक्र’ था, लेकिन उन्होंने एक बार भी नहीं का कि पापा आप इसे एक बार हाथ में ले लीजिए। उन्होंने कहा कि वो खुद एक फौजी हैं, वो इसे महसूस करते। उन्होंने कहा कि पैसे को लेकर कुछ नहीं है।

उन्होंने ये माँग भी की कि पत्नी के साथ-साथ माता-पिता को भी एक रेप्लिका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें फ़ख्र है कि उनका बेटा कायर नहीं वीर था। वहीं अंशुमान सिंह की माँ ने कहा कि उनका बेटा वहाँ होते साँस ले रहे होते कम से कम तो उन्हें बहुत अच्छा लगता। उन्होंने कहा कि आज भी वो दिन-रात 19 जुलाई, 2023 का दर्द लेकर बैठी हुई हैं। उन्होंने बताया कि ‘कीर्ति चक्र’ के रिहर्सल के दौरान उनकी बहू ने मुद्दा बनाया, वो उनके लिए बहू नहीं बेटे की तरह ही है। उन्होंने कहा कि उनके 2 और बच्चे हैं, वो चाहेंगी कि वो फौज में जाएँ, उन्हें अब भी डर नहीं लगता है।

उन्होंने कहा, “माँ के लिए हर बच्चा बराबर होता है, ये बच्चे पर निर्भर करता है कि वो इसका दिल जीतता है। हर माँ अच्छी होती है, लेकिन वो बेटा ऐसा था जिसे सम्मान मिला।” पिता ने बताया कि ये उनकी जानकारी में नहीं था कि उनके बेटे और स्मृति 8 साल के रिश्ते में थे। उन्होंने ये भी बताया कि उन्होंने शादी का समर्थन किया था। उन्होंने बताया कि अपनी बहू को वो अंशुमान कह कर ही बुलाती थीं, वो उनकी बेटी ही हैं अभी भी।

इससे पाहे अंशुमान सिंह के पिता ने NOK (नेक्स्ट ऑफ किन) वाले सेना के नियम में बदलाव की माँग की थी। राहुल गाँधी ने भी परिवार से मुलाकात की थी। भारतीय सेना में ट्रेंड है कि विवाह के बाद जवान द्वारा सामान्यतः अपनी पत्नी को शत-प्रतिशत नॉमिनी बना दिया जाता है। कुछ जवान ऐसे भी आते हैं जो 70:30 का फॉर्मूला रखते हैं, यानी 70% नॉमिनी पत्नी होती हैं और 30% माता-पिता। नियम के तहत तो 50:50 फॉर्मूले की व्यवस्था भी है, लेकिन कुछ ही जवान इसे चुनते हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक को अपने साथ ले गई ED: जनजातीय समाज के फंड में घोटाले का मामला, महर्षि वाल्मीकि निगम के कर्मचारी की आत्महत्या से खुला मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक बी नागेन्द्र को हिरासत में लिया है। उन्हें उनके घर पर दो दिन तक चली छापेमारी के बाद हिरासत में लिया गया है। नागेन्द्र को कर्नाटक के वाल्मीकि निगम में करोड़ों के अवैध ट्रांसफर घोटाला मामले में हिरासत में लिया गया है।

ED इससे पहले 10 जुलाई, 2024 को उनके घर पहुँची थी और छापेमारी कर रही थी। दो दिन चली इस छापेमारी के बाद कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार के पूर्व मंत्री नागेन्द्र को ED अपने साथ ले गई। ED ने कर्नाटक में इस दौरान और जगह छापेमारी भी की। ED ने एक और कॉन्ग्रेस विधायक बसानागौड़ा दद्दल के घर पर भी तलाशी ली।

बी नागेन्द्र ने जून माह में सिद्दारमैया सरकार से मंत्रिपद से इस्तीफ़ा दे दिया था। वह सिद्दारमैया सरकार में अनुसूचित जनजातीय कल्याण मंत्री थे। उन्होंने यह इस्तीफ़ा कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति कल्याण विकास निगम (KMVSTDC) में करोड़ों की गड़बड़ी में नाम सामने आने के बाद दिया था।

बी नागेन्द्र जी जिस महर्षि वाल्मीकि फंड घोटाले में हिरासत में लिए गए हैं, उसकी जाँच CBI, ED और राज्य सरकार की SIT कर रही है। यह पूरा मामला लगभग ₹88 करोड़ सरकारी धन के दुरुपयोग और उसके अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाने से जुड़ा हुआ है।

क्या है वाल्मीकि फंड घोटाला?

कर्नाटक सरकार KMVSTDC प्रदेश की जनजातीय जनता के कल्याण के लिए चलाती है। इसके अंतर्गत जनजातीय जनसंख्या के लिए रोजगार समेत विशेष योजनाएँ लाई जाती हैं। कर्नाटक सरकार इसके लिए अलग से बजट देती है। इसी महर्षि वाल्मीकि फंड में घोटाले की बात सामने आई है।

यह पूरा मामला एक आत्महत्या से चालू हुआ था। मई, 2024 में इसी निगम से जुड़े एक 48 वर्षीय कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के बाद एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके उच्चाधिकारियों ने उस पर इस बात के लिए दबाव बनाया था कि वह निगम के खातों से पैसा ट्रांसफर करे।

उसने आरोप लगाया था कि यह काम निगम का पैसा हड़पने के लिए किया गया था। उसका आरोप था कि यह काम एक मंत्री के मौखिक आदेशों के आधार पर किया गया था। उसने अपने विभाग के अलावा यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारियों पर भी आरोप लगाए थे। इसके बाद पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया था।

आत्महत्या करने वाले कर्मचारी चंद्रशेखर ने सुसाइड नोट में बताया था कि उसे उच्चाधिकारियों ने इस बात के लिए निर्देशित किया था कि वह निगम के एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए पत्र लिखे। यह पैसा यूनियन बैंक के वसंत नगर ब्रांच से एमजी रोड ब्रांच में डाला जाना था।

इसी के तहत वाल्मीकि निगम के खातों से निकाला गया पैसा इसके बाद अन्य खातों में भेज दिया गया। इस पूरे खेल में ₹187 करोड़ का लेनदेन हुआ। इसमें से लगभग ₹88 करोड़ अवैध खातों में भेजा गया। जब यह मामला खुला तो चंद्रशेखर डर गया और उसने आत्महत्या कर ली।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद कई बैंक कर्मचारियों समेत KMVSTDC के कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। भाजपा ने इस मामले में बी नागेन्द्र का इस्तीफा मांगा था। इसके बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। इस मामले की जाँच CBI को हस्तांतरित करने की माँग भी हुई थी। अब इस घोटाले में बी नागेन्द्र की भूमिका की जाँच हो रही है।