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दिल्ली CM अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से मिली बेल, लेकिन तिहाड़ से नहीं होगी रिहाई: अदालत ने मामला बड़ी बेंच को किया ट्रांसफर, CBI केस की सुनवाई होना भी शेष

दिल्ली शराब घोटाला मामले में जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आज सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने सीएम को लेकर यह फैसला सुनाते हुए उनका मामला बड़ी बेंच के पास रेफर कर दिया। अब इस केस में आगे की सुनवाई 3 बजे होगी, तब तक केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिली हुई है।

बता दें कि ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अरविंद केजरीवाल कई बार बेल पाने के लिए गुहार लगा चुके हैं। इससे पहले उन्हें चुनाव प्रचार के लिए बेल मिली थी और अब जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने सुनवाई करते हुए उन्हें अंतरिम जमानत दी है। वहीं केस जिस बड़ी बेंच को ट्रांसफर हुआ है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बेल दे रहे हैं लेकिन इस मामले में कुछ सवाल हैं जिसे एक बड़ी बेंच द्वारा देखे जाने ज़रूरत है। इस दौरान जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि अरविंद केजरीवाल 90 से अधिक दिनों से जेल में बंद हैं। अब चुनावों के दौरान उन्हें जिन शर्तों पर रिहा किया गया था उन्हीं शर्तों पर उन्हें फिर रिहा किया जाएगा।

वहीं केजरीवाल के वकील शादान फरासत ने कहा कि केजरीवाल पहले ही लंबे समय से जेल में गुजार चुके हैं और इसलिए ईडी मामले में उन्हें तत्काल रिहा करने और ज़मानत देने का आदेश दिया। केजरीवाल के दूसरे वकील ऋषिकेश कुमार ने कहा कि ‘सेक्शन 19 के तहत गिरफ़्तारी की आवश्यकता पर विचार करने के लिए कोर्ट ने एक बड़ी बेंच के पास मामला भेज दिया है

उल्लेखनीय है कि दिल्ली शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। अब उन्हें भले ही सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है लेकिन अभी वह जेल से बाहर नहीं आ पाएँगे। उन्हें ईडी के बाद सीबीआई ने अरेस्ट किया था। उस मामले में भी दिल्ली सीएम ने हाई कोर्ट में चुनौती थी। अब मामले की सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

राजा-महाराजा बता कर जिसे कोसते हैं तेजस्वी यादव, उसी का मेहमान बन कर पहुँचा लालू परिवार: अनंत-राधिका की शादी के लिए राबड़ी देवी भी सज-धज कर पहुँचीं

जहाँ एक तरफ I.N.D.I. गठबंधन लगातार एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी को गाली देने में लगा रहता है, वहीं दूसरी तरफ इसके नेता उनके मेहमान भी बन रहे हैं। मुंबई में हो रही मुकेश अंबानी के बेटे अनंत और ‘एनकॉर हेल्थकेयर’ के CEO वीरेन मर्चेंट की बेटी राधिका की शादी पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसमें जस्टिस बीबर से लेकर किम कार्दशियन जैसे इंटरनेशनल सेलेब्स भी पहुँच रहे हैं। संगीत के कार्यक्रम में T20 वर्ल्ड कप विजेताओं का भी सम्मान किया गया।

अब राजद सुप्रीमो लालू यादव इस शादी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मुंबई पहुँचे हैं। बिहार की राजधानी पटना के एयरपोर्ट से रवाना होते हुए इनके वीडियो भी सामने आए हैं। वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के अलावा राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और राजश्री यादव भी दिखाई दे रहे हैं। राबड़ी देवी भी बिहार की CM रह चुकी हैं, वहीं मीसा भारती पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनी गई हैं। इससे पहले वो राज्यसभा सांसद थीं।

ध्यान दिला दें कि ये वही तेजश्री यादव हैं जो शीर्ष भारतीय उद्योगपतियों मुकेश अंबानी और गौतम अडानी को कोसने का एक मौका भी नहीं छोड़ते। मई 2024 में ही उन्होंने कहा था कि अंबानी-अडानी 2 राजा हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके लिए काम करते हैं। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान बख्तियारपुर में उन्होंने ये भाषण दिया था। राहुल गाँधी ने तो अपने भाषणों में 100 से अधिक बार अंबानी का नाम लिया था। भारत के उद्योगपतियों को नीचा दिखाना I.N.D.I. गठबंधन की फितरत है।

मुकेश अंबानी ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज’ के चेयरमैन हैं। अनंत अंबानी उनके छोटे बेटे हैं। लालू परिवार विशेष विमान से इस शादी में पहुँच रहा है, मीडिया द्वारा पूछे जाने पर पूर्व डिप्टी CM तेजस्वी यादव ने कहा कि निमंत्रण मिला है, इसीलिए वो जा रहे हैं। शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को अनंत-राधिका की शादी है। बीते वर्ष दोनों की सगाई हुई थी। मुंबई के BKC (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) स्थित ‘जियो वर्ल्ड सेंटर’ में बारात के ठहरने की व्यवस्था की गई है।

JNU में स्थापित होगा ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’, जैन और बौद्ध धर्म के अध्ययन के लिए भी होंगे सेंटर: नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान पद्धति पर जोर

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म के अध्ययन के लिए सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है। ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’, ‘सेंटर फॉर जैन स्टडीज’ और ‘सेंटर फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज’ की स्थापना के संबंध में यूनिवर्सिटी ने अधिसूचना जारी की है। 29 मई, 2024 को ही एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई थी। ‘स्कूल ऑफ संस्कृत एन्ड इंडिक स्टडीज’ के तहत इन सेंटरों की स्थापना का निर्णय लिया गया है।

दरअसल, JNU ने एक समिति का गठन किया था, जिसे इस पर काम करने के लिए कहा गया था। इस समिति को दायित्व दिया गया था कि वो ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020’ और भारतीय ज्ञान पद्धति को विश्वविद्यालय में लागू कराने के तरीके तलाशे। अब शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को ये अधिसूचना जारी कर दी गई है। 3 दिन पहले ही ये फैसला ले लिया गया था। ये वही JNU है जहाँ कभी वामपंथी छात्रों ने देश विरोधी नारेबाजी की थी, फरवरी 2016 की ये घटना मीडिया में सुर्खियाँ बनी थीं।

इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) भी ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना कर चुका है। इसके तहत मास्टर्स डिग्री का कोर्स उपलब्ध कराया गया और जल्द ही स्नातक डिग्री लाने की भी योजना है। DU में पहले से ही बौद्ध धर्म के अध्ययन को लेकर केंद्र है, वहीं इसे अब ‘सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज इन बुद्धिज़्म’ की स्थापने के लिए केंद्र सरकार से 35 करोड़ रुपए का फंड भी प्राप्त हुआ है। भारतीय धर्म, पंथों, इतिहास एवं संस्कृति के अध्ययन को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाने ये कदम उठाया जा रहा है।

हाल ही में JNU के छात्र संगठन ने बताया है कि यहाँ ‘वॉटर कलेक्शन सेंटर्स’ की भी स्थापना की जा सकती है। इसके अलावा चेक डैम्स की भी स्थापना की जाएगी। कैम्पस में पानी की कमी को लेकर छात्रों की लंबे समय से शिकायत रही है। दिव्यांग छात्रों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और समस्याओं को लेकर एक ऑडिट भी किया जाएगा। एक संविदा पर बहाल कर्मचारी की आत्महत्या के बाद कर्मचारियों की सुरक्षा के संबंध में भी कदम उठाए जा सकते हैं। कुलपति शांतिश्री D पंडित से मिल कर छात्रों ने कई समस्याओं को रखा है।

15 साल के लड़के ने अपने इंस्टाग्राम फ्रेंड को उतारा मौत के घाट, दोनों एक ही लड़की से करते थे बात: ₹150 में चाकू खरीद कर गर्दन में घोंप दिया

गुरुग्राम के थाना सेक्टर-40 में बुधवार (10 जुलाई 2024) को एक नाबालिग लड़के ने एक लड़की के चक्कर में दूसरे नाबालिग लड़के की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। आरोपित को पकड़ने के बाद पुलिस को पता चला कि ये घटना कोई अचानक अंजाम नहीं दी गई बल्कि इसके लिए पहले से योजना बनाई गई थी, फिर चाकू खरीदा गया था तब इस हत्या को अंजाम दिया गया था।

गुरुग्राम पुलिस के अनुसार, सेक्टर 40 थाना में रात के साढ़ 10 बजे के आसपास खबर आई कि युवक ने दूसरे युवक को चाकू मार दिया है। पुलिस मौके पर पहुँची तो लड़का घायल था। पुलिस ने फौरन उसे एंबुलेंस की सहायता से अस्पताल भेजा लेकिन वहाँ उसकी मृत्यु हो गई थी।

सूचना देने वाले व्यक्ति ने बताया कि उसने तो लड़के को घायल उस समय देखा जब वो अपने मकान से बाहर निकला। उसने देखा तो युवक के गले पर कट के काफी निशान थे और साथ ही पेट में भी चाकू घोंपा गया था। पुलिस ने जानकारी के आधार पर छानबीन करके आरोपित को 16 घंटे के अंदर रेवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में पता चला कि ये दोनों लोग झाड़सा में रहते थे और एक दूसरे कए इंस्टाग्राम पर दोस्त थे।

मृतक की एक गर्लफ्रेंड भी थी जो कुछ समय से आरोपित लड़के से बातचीत करने लगी थी। आरोपित को पता था कि वो लड़की उसके दोस्त से भी बात करती है। इसी गुस्से में उसने अपने दोस्त को जान से मारने की साजिश रची। हत्या की योजना को अंजाम देने के लिए आरोपित ने 150 रुपए में एक चाकू खरीदा। फिर बुधवार की रात को योजनानुसार युवक को बीयर पीने के बहाने बुलाया और चाकू से वार करके उसकी हत्या कर दी। बाद में हथियार को उठाकर 500 मीटर दूर फेंक दिया था। अब पुलिस ने इस मामले को बीएनएस की धारा 103 (1) के तहत दर्ज किया है। साथ ही मृतक के परिजनों को भी सूचना दे दी है।

महाराष्ट्र में अर्बन नक्सलियों के खिलाफ विधेयक विधानसभा में पेश, वामपंथी आतंकवाद को ‘बुद्धिजीवी’ बन कर प्रश्रय देने वालों की अब खैर नहीं

महाराष्ट्र सरकार अर्बन नक्सलियों के खिलाफ कानून बनाने जा रही है, जिसका मसौदा विधानसभा में भी पेश गया है। ‘महाराष्ट्र स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी बिल, 2024’ के लागू होने के बाद से नक्सलियों के इकोसिस्टम में शामिल ऐसे लोगों पर कार्रवाई होगी जो ‘बुद्धिजीवी’ कहलाने की आड़ में बचते फिरते हैं। इसमें बताया गया है कि मुखौटा संगठनों के जरिए शहरी क्षेत्रों में नक्सली अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। ये सशस्त्र नक्सलियों को शरण देते हैं, उन्हें संसाधन मुहैया कराते हैं।

नक्सलियों के पास से जब्त किए गए साहित्यों से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में उनके कई गुप्त ठिकाने हैं। जो लोग अपना घर इन नक्सलियों को रहने के लिए देते हैं, वो सोशल मीडिया और आमजनों के बीच नक्सली विचारधारा को आगे बढ़ा रहे हैं, यानी सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की आग जला रहे हैं और ये देश के खिलाफ है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा ऐसे 48 संगठनों को पहले ही प्रतिबंधित कर चुके हैं। अक्टूबर में इसी साल महाराष्ट्र में चुनाव भी होने हैं।

इस बिल में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे किसी भी संगठन की बैठकों या सभाओं में प्रतिबंधित संगठन का कोई सदस्य किसी भी माध्यम से भाग लेता है या मदद करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल की सज़ा के साथ-साथ 3 लाख रुपए तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। राज्य सरकार ऐसे संगठनों को चिह्नित करने के लिए एक सलाहकार समिति का गठन करेगी। इसके कानून बनने के बाद पुलिस शक के आधार पर किसी भी परिसर में घुस कर नक्सली विचारधारा वाले साहित्य को जब्त कर सकती है।

साथ ही अर्बन नक्सलियों की संपत्ति को जब्त करने का भी प्रावधान है। ऐसे संगठनों को प्रतिबंधित किए जाने का आदेश उसके अधिकारियों को दिया जाएगा वरना दफ्तर के बाहर चस्पाया जाएगा, दफ्तर न होने की स्थिति में अख़बारों में ये नोटिस छपेगा। सरकार द्वारा गठित एडवाइजरी बोर्ड में एक हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज भी होंगे। किसी प्रतिबंधित संगठन या उसके सदस्य की वित्तीय मदद करने पर भी जेल होगी। कोई संगठन नाम बदल कर भी नहीं बच सकता, क्योंकि जब तक वो ऐसी गतिविधियों में शामिल रहेगा वो प्रतिबंधित रहेगा।

‘रजत शर्मा वाला वीडियो एडिटेड नहीं’: हाईकोर्ट में ‘X’ के बयान पर प्रोपेगेंडा चला रही कॉन्ग्रेस, छिपा रही ट्वीट डिलीट करने वाला आदेश

वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा पर ऑन-एयर गाली देने का आरोप लगाने वाली कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक, पवन खेड़ा, जयराम रमेश के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने पूछा कि जून में दिए गए आदेश पर अब तक अमल क्यों नहीं किया गया? फर्जी दावों वाले ट्वीट्स क्यों नहीं हटाए गए? इसके जवाब में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने हाई कोर्ट में दलील दी कि रजत शर्मा का जो वीडियो हमारे प्लेटफॉर्म पर डाला गया है, वो ‘एडिटेड नहीं लगता’। हालाँकि हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि सारे वीडियो और इससे जुड़े यूआरएल 13 जुलाई की शाम तक हट जाने चाहिए।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम सिर्फ ‘एक्स’ की ओर से कही गई बातों को आधार बनाकर मीडिया ट्रायल करने लगा। कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम इस पूरे मामले को डायवर्ट करते हुए सिर्फ ये फैलाने में जुट गया कि रजत शर्मा ने रागिनी नायक को ऑन एयर गाली दी थी। ऐसे में खुद रजत शर्मा आगे आए, और उन्होंने पूरे कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम को बेनकाब कर दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, 13 जुलाई तक हटाओ सारे ट्वीट्स

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले की कॉपी रजत शर्मा ने खुद एक्स पर शेयर किया है। रजत शर्मा ने लिखा, “झूठ की इंतहा हो गई है। सच मैं बताता हूँ: आज ही कोर्ट ने अपने ऑर्डर में रागिनी नायक, जयराम रमेश और पवन खेड़ा को निर्देश दिया है कि वो 14 जून 2024 के ऑर्डर के मुताबिक़ अपने ट्वीट डिलीट करें। आज ही अदालत ने ट्विटर को आदेश दिया है कि अगर कॉन्ग्रेस लीडर ऐसा नहीं करते तो ट्विटर इन ट्वीट्स को ब्लॉक करे। आज कोर्ट ने ये भी कहा कि कॉन्ग्रेस के ये लीडर इस डिबेट से संबंधित कोई पोस्ट ना करें जब तक अदालत अंतरिम आदेश पर फैसला नहीं कर लेती। अदालत का आज का ऑर्डर सामने है, कोई भी देख सकता है। अब आप ही बताइये इनका क्या करें?”

क्या प्रोपेगेंडा फैला रहा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम?

दरअसल, गुरुवार (11 जुलाई 2024) को दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा था। ये केस रजत शर्मा द्वारा किए गए 100 करोड़ की मानहानि के मामले में भी है, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा कि ट्वीट्स अब तक क्यों नहीं हटाए गए, जैसा कि पिछली सुनवाई (16 जून 2024) के दौरान आदेश दिया गया था। कोर्ट ने कहा था कि कॉन्ग्रेसी नेता रजत शर्मा को लेकर किए जा रहे दावों वाले वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाएँ। कोर्ट ने ये भी कहा था कि अगर ये वीडियो खुद नहीं हटाए जाते हैं, तो सोशल मीडिया कंपनी एक्स (पूर्व में ट्विटर) खुद इन्हें ब्लॉक करे, लेकिन वीडियो न हटने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल पूछा, तो एक्स ने अपनी तरफ से बात रखी।

एक्स ने दावा किया कि रजत शर्मा से जुड़ा वीडियो ‘एडिटेड नहीं हो सकता!’, क्योंकि मूल वीडियो अब भी इंडिया टीवी के यू-ट्यूब चैनल पर मौजूद है। दोनों की मिलावट से पता चलता है कि रजत शर्मा ने ‘कुछ तो’ कहा है। एक्स की इसी दलील को आधार बनाकर तमाम मीडिया हाउसों ने एकतरफा खबरें परोसनी शुरू कर दी। अदालती कार्यवाही को कवर करने वाली वेबसाइटों ने भी ‘अधूरी रिपोर्ट्स’ डाली, क्योंकि उनमें दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से दिए गए आदेश को जगह ही नहीं दी गई, जिसकी हेडलाइन्स कुछ इस तरह की रही-

ट्विटर ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा: रजत शर्मा द्वारा लाइव टीवी पर रागिनी नायक को गाली देने का वीडियो फर्जी या संपादित नही है – बार एंड बेंच की खबर

Video Posted By Ragini Nayak Alleging Abuse By Journalist Rajat Sharma Not Edited Or Fake: Twitter To Delhi High Court : लाइव लॉ की खबर

यही नहीं, लाइव हिंदुस्तान जैसे मुख्यधारा की मीडिया ने भी इसी तरह की खबरें छापी, जिसका शीर्षक दिया- ( रागिनी नायक को गाली देने वाला वीडियो ना फर्जी ना संपादित, दिल्ली HC में ट्विटर ने दी जानकारी )

इन तीनों ही रिपोर्ट्स को पढ़ेंगे, तो ये कहीं नहीं मिलेगा कि कोर्ट ने वीडियो और ट्वीट्स के यूआरएल को 13 जुलाई 2024 तक हटाने का आदेश दिया है। ये सारी रिपोर्ट्स सिर्फ एक्स के बयान के आधार पर छाप दी गई।

बस फिर क्या था, कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम मानो शिकार की तलाश में बैठा हो। तुरंत ही सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक्स के बयान को आधार बनाकर छापी गई रिपोर्ट्स शेयर की जाने लगी और रजत शर्मा को निशाना बनाया जाने लगा।

खुद रागिनी नायक ने लिखा, “‘X’ formerly ‘Twitter’ ने दिल्ली High Court को बताया कि मेरे द्वारा पोस्टेड वीडियो न तो ‘Fake’ है, न ही ‘Edited’ है !!!”

रागिनी नायक ने न तो दिल्ली हाई कोर्ट की बात का कोई जिक्र किया और न ही 13 जुलाई 2024 तक वीडियो और पोस्ट को हटाने के आदेश को लेकर। वहीं, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और कम्युनिकेशन सेल के इन्चार्ज जयराम रमेश ने भी लाइव लॉ के ट्वीट को रीट्वीव कर इसी झूठ को आगे बढ़ाया। चूँकि उनका एजेंडा तो बढ़ ही रहा है, ऐसे में कौन 2 लाइन लिखकर सच्चाई को सामने रखने की जहमत उठाए।

देखते ही देखते एक्स पर कॉन्ग्रेसी और लेफ्ट इकोसिस्टम इस अधूरी रिपोर्ट को पूरी बताकर पेश करने लगा और रजत शर्मा पर निशाना साधने लगा। गुरप्रीत गैरी वालिया नाम के कथित ‘पत्रकार’ ने एक्स पर लिखा, “रजत शर्मा और इंडिया TV वालों अब क्या बोलोगे ? इस ट्वीट को जिसने रीट्वीट ना किया उसको ब्लॉक कर दूँगा।”

काव्या इंडिया नाम की एक्स यूजर ने लिखा, “रजत शर्मा पत्रकारिता को अब तक के सबसे निचले स्तर पर ले जा रहा है। ट्विटर ने कोर्ट मे कहा इसकी गाली वाली वीडियो फेक नही। अभी तक इसकी पत्रकारिता THE लाली के लिए जानी जाती थी, अब इसकी पत्रकारिता गाली की वजह से जानी जा रही है। शर्मनाक!”

इस पूरे मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने 12 जुलाई तक नेताओं को खुद से वीडियो हटाने होंगे, वर्ना एक्स को 13 जुलाई 2024 तक का समय इन्हें हटाने के लिए दिया गया है। ये पूरा मामला ही वीडियो को हटाने के लिए दिए आदेश पर अमल न करने का है, जिसे लेकर मीडिया में किसी भी तरफ से एक शब्द नहीं लिखा गया। हर तरफ, एकतरफा तौर पर सिर्फ एक्स के बयान को प्राथमिकता के साथ छापा गया, जिसका इस्तेमाल कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ने अपने प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में किया। बहरहाल, अगर 13 जुलाई की शाम तक ये सारे ट्वीट्स और वीडियो नहीं हटाए गए, तब दिल्ली हाई कोर्ट अवमानना की कार्रवाई करता है, या कोई अन्य कदम उठाता है, अब इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।

तेलंगाना के सरकारी स्कूल के हॉस्टल में परोसा गया छिपकली वाला नाश्ता, 35 बच्चे उल्टी-दस्त के बाद बीमार पड़े: अधिकारियों पर कार्रवाई

तेलंगाना के एक सरकारी स्कूल के हॉस्टल में उपमा का नाश्ता करने के बाद 35 छात्र बीमार पड़ गए। पूछताछ हुई तो पता चला कि उन्होंने नाश्ते में छिपकली पड़ी देखी थी। घटना मंगलवार (9 जून 2024) की है। छात्रों ने बताया कि उन्हें खाने के बाद उल्टी और दस्त के लक्षण दिखाई दिए। इसी के चलते वह बीमार पड़ गए।

बच्चों के बीमार पड़ने के बाद के बाद स्कूल के अधिकारियों ने तुरंत उन्हें चिकित्सा सहायता प्रदान की। वहीं खाने को भी जाँच के लिए भेजा गया। शुरुआती जाँच में सामने आया है कि खाना बनाने के दौरान छिपकली गलती से गिरी होगी, लेकिन इस गलती से चूँकि इतने बच्चे बीमार पड़ गए इसलिए भारत सरकार के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।

शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि तेलंगाना राज्य सरकार ने सूचित किया है कि यह घटना तेलंगाना सरकार के मॉडल स्कूल के छात्रावास में हुई है। राज्य सरकार अपनी स्वयं की योजना के तहत मॉडल स्कूलों को नाश्ता उपलब्ध कराती है और यह पीएम पोषण योजना के अंतर्गत नहीं आती है। राज्य सरकार ने यह भी सूचित किया है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की है।

शिक्षा मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि पीएम पोषण योजना स्कूलों में गर्म पका हुआ मध्याह्न भोजन प्रदान करती है और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सुरक्षा मानदंडों को सुनिश्चित करने और छात्रों के लिए ठीक से पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के लिए उचित कदम उठाने की सलाह दी गई है।

बता दें कि ये हैदराबाद में हुई कोई पहली घटना नहीं है। हैदराबाद के सुल्तानपुरा स्थित जवाहरलाल नेहरू टेक्निकल यूनिवर्सिटी में भी इस तरह का मामला सामने आया था। हॉस्टल के मेस में परोसी गई चटनी के साथ कथिततौर पर चूहा तैयता मिला था। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मामले में तमाम सवाल खड़े हुए थे। अब इस मामले में भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं इसीलिए स्कूल मैनेजमेंट ने घटना की गहन जाँच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का वादा किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन को कमला हैरिस में दिख रहे डोनाल्ड ट्रम्प, यूक्रेन के राष्ट्रपति में दिख रहे पुतिन: वीडियो आने के बाद हो रही बेइज्जती

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन के किस्म-किस्म के वीडियो सामने आते रहते हैं, जिसमें वो खोए-खोए से नज़र आते हैं। कभी वो बाकी लोगों को नज़रअंदाज़ कर विपरीत दिशा में मुड़ जाते हैं तो कभी किसी ओर अचानक ही चल निकलते हैं। इसी साल नवंबर में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और सामने रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प होंगे जो पहले भी राष्ट्रपति रह चुके हैं, ऐसे में जो बायडेन का स्वास्थ्य डेमोक्रेट्स के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है।

अब तो कुछ ऐसा हुआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन देश की उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को ही पहचानने में नाकामयाब रहे। वो भी तब जब कमला हैरिस ने उनके साथ मिल कर ही ही चुनाव लड़ा था, और यूक्रेन को तो अमेरिका रूस से युद्ध के बीच करोड़ों डॉलर की मदद कर रहा है। असल में नया ड्रामा NATO नेताओं के समिट के दौरान हुए न्यूज़ कॉन्फ्रेंस में हुआ। पहले ही सवाल के जवाब में जो बायडेन ने कमला हैरिस को ‘उप-राष्ट्रपति ट्रम्प’ बता दिया।

असल में Reuters के पत्रकार ने जो बायडेन से पूछा था कि अगर वो इस चुनाव से हट जाते हैं तो क्या कमला हैरिस के पास डोनाल्ड ट्रम्प को हराने की क्षमता है? हालाँकि, बायडेन कई बार इनकार कर चुके हैं कि वो चुनाव से हट रहे हैं। सवाल के जवाब में बायडेन ने कहा, “देखिए, मैं उप-राष्ट्रपति ट्रम्प को उप-राष्ट्रपति बनने के लिए नहीं चुनता, अगर मुझे ऐसा लगता कि वो राष्ट्रपति बनने के योग्य नहीं हैं।” बता दें कि जो बायडेन 81 वर्ष के हैं और अमेरिका के सबसे उम्रदराज़ राष्ट्रपति बन गए हैं।

वाशिंगटन में NATO नेताओं की बैठक के बाद USA के राष्ट्रपति जो बायडेन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को दृढ़संकल्पित और साहसी बताते हुए उन्हें ‘राष्ट्रपति पुतिन’ कह कर संबोधित किया। जबकि, व्लादमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति हैं, जिसके साथ यूक्रेन का युद्ध चल रहा है। गलती का एहसास होते ही जो बायडेन ने कहा कि हम प्रेसिडेंट पुतिन को हराने वाले हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने भी जो बायडेन के ऐसे वीडियोज को लेकर उनका मजाक बनाया है।

पूजा खेड़कर कैसे बनी IAS, मोदी सरकार की समिति करेगी जाँच: मीडिया पर भड़की माँ, चुनाव लड़ चुके पिता के पास है 110 एकड़ जमीन

फर्जीवाड़े के आधार पर IAS बनने के आरोपों में घिरी पूजा खेडकर पर केंद्र सरकार ने एक्शन लिया है। पूजा खेडकर के IAS में चयन को लेकर जाँच होने जा रही है। इसको लेकर मोदी सरकार ने एक सदस्यीय कमेटी गठित की है। यह दो सप्ताह के भीतर अपनी जाँच रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगी।

केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा जारी की गई एक प्रेस रिलीज में बताया गया है, “केंद्र सरकार ने सिविल सेवा परीक्षा-2022 और इससे पहले की परीक्षाओं की उम्मीदवार सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर की उम्मीदवारी के दावों और अन्य जानकारियों की जाँच के लिए भारत सरकार के एडिशनल सेक्रेटरी स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति 2 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी।”

केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई इस समिति की रिपोर्ट के बाद पूजा खेडकर के OBC प्रमाण पत्र और मानसिक अक्षमता को लेकर किए गए दावों की सच्चाई बाहर आ सकेगी। उन्होंने अपने चयन के लिए खुद को नॉन क्रीमी लेयर OBC नॉन क्रीमी लेयर और मानसिक रूप से अक्षम बताया था।

पूजा खेडकर ने साल 2023 में IAS परीक्षा को पास किया था उसमें उनकी 841 रैंक आई थी। अपने आपको उन्होंने इस सिलेक्शन प्रोसेस में मानसिक रूप से बीमार होने का दावा भी किया था। हालाँकि बाद में जब मेडिकल चेक अप की बारी आई तो वो अपनी ही बीमारी का सत्यापन करवाने के लिए 6 बार नहीं गईं।

ऐसे में ये अब भी एक सवाल बना हुआ है कि अगर पूजा ने चेक अप कराने से मना किया तो फिर कैसे उनका सिलेक्शन हुआ। ये भी कहा जा रहा है कि 2021 में पूजा को OBC PwBD 1 में खेल प्राधिकरण में सहायक निदेशक के रूप में चुना गया था, लेकिन 2023 में, उन्होंने रहस्यमय तरीके से अपनी श्रेणी 4 एम PwBD 1 को PwBD 5 में बदल दिया और IAS के रूप में चयनित हो गईं।

वहीं उनके OBC आरक्षण के दावे पर भी प्रश्न उठे हैं। उन्होंने नॉन क्रीमी लेयर OBC के तौर पर आरक्षण लिया है। इस आरक्षण का लाभ लेने वालों की आय ₹8 लाख से कम होनी चाहिए। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उनके माता पिता के पास करोड़ों की सम्पत्ति है। उनके पिता दिलीप खेडकर ने हाल ही में अहमदनगर से चुनाव लड़ा था जबकि उनकी माता वर्तमान में सरपंच हैं। उनके माता-पिता के पास ₹20 करोड़ की तो केवल कृषि भूमि ही है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पूजा के पास खुद ₹17 करोड़ की सम्पत्ति है।

ऐसे में उनके OBC आरक्षण के दावे पर प्रश्न उठे हैं। पूजा खेडकर का यह मामला उनके द्वारा पुणे में अपने प्रशिक्षण के दौरान लग्जरी गाड़ी और केबिन की माँग किए जाने के बाद खुला है। पुणे कलेक्टर ने उनकी गलत माँगों के चलते उनकी शिकायत मुख्य सचिव को भेजी। अपने शिकायत पत्र में उन्होंने बताया था कि कैसे पूजा खेडकर वीआईपी ट्रीटमेंट पाने के लिए अधिकारियों को धमका रही हैं और परेशान कर रही हैं। उन्होंने अधिकारी अजय मोरे के चैंबर तक में कब्जा कर लिया था। वहीं अपनी निजी कार में वीआईपी नंबर लगाकर उसे चला रही थीं।

पूजा खेडकर के विषय में प्रश्न उठाने वालों पर उनकी माँ भी हमलावर हो गई हैं। पूजा खेडकर के पुणे स्थित घर के बाहर कवरेज करने पहुँचे मीडिया कर्मियों से पूजा की माँ ने अभद्रता की। पूजा की माँ ने मीडियाकर्मियों को जेल में डालने तक की धमकी दी। आरोपों के सामने आने के बाद पूजा खेडकर का पुणे से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया था जहाँ उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन कर ली है।

‘अग्निवीरों’ के लिए खुशखबरी: बिना फिजिकल टेस्ट RPF, BSF और CISF में 10% आरक्षण, आयु सीमा में भी छूट

भारतीय सेना में 4 वर्ष की अग्निवीर के तौर पर सेवा देने के बाद केन्द्रीय सुरक्षाबलों में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को 10% आरक्षण दिया जाएगा। इस आरक्षण को तीन केन्द्रीय सुरक्षाबलों ने लागू भी कर दिया है। इस आरक्षण का ऐलान केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 2022 में किया था।

रेलवे पुलिस बल (RPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने अग्निवीरों को 10% आरक्षण देने के निर्णय को लागू कर दिया है। यह भी बताया गया है कि पूर्व अग्निवीरों को इन भर्तियों में 10% सीटों पर आरक्षण के अलावा शारीरिक मापदंडों में भी छूट मिलेगी।

इस मामले को लेकर RPF के डायरेक्टर जनरल मनोज यादव ने बताया, “भविष्य में RPF में जो भी भर्ती होगी, उसमें 10% आरक्षण का प्रावधान पूर्व अग्निवीरों को दिया जाएगा। ना सिर्फ उन्हें 10% आरक्षण बल्कि उन्हें आयु सीमा में भी छूट दी जाएगी।”

उन्होंने बताया कि 2026-27 में जो अग्निवीर सेना से सेवा पूरी करके आएँगे उन्हें 5 वर्ष की छूट मिलेगी और इसके बाद के बैच को 3 वर्ष की छूट मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि RPF भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को कोई भी शारीरिक मापदंड का टेस्ट नहीं देना होगा।

वहीं इस मामले पर CISF की डायरेक्टर जनरल नीना गुप्ता ने कहा, “CISF ने पूर्व अग्निवीरों की CISF में भर्ती हेतु सभी तैयारियाँ कर ली हैं। इसके अंतर्गत CISF में कॉन्स्टेबल के 10% पद अग्निवीरों के लिए भर्ती किए गए हैं। इसके अलावा उन्हें शारीरिक परीक्षण और आयु सीमा में छूट प्रदान की गई है। इससे CISF के ऑपरेशन में भी बेहतरी आएगी।”

BSF के डायरेक्टर जनरल नितिन अग्रवाल ने बताया, “इन अग्निवीरों ने 4 साल मेहनत मशक्कत की होगी, ऐसे में यह BSF के लिए एकदम अनुरूप होंगे। हमें तैयार सेना मिलेंगे, ऐसे में इन्हें हम जल्दी सेना में तैनात कर सकेंगे। जैसे ही अग्निवीर आते हैं, हम इनकी भर्ती करेंगे। जितनी हमारी भर्तियाँ होंगी, उसमें 10% पद आरक्षित होंगी और आयु की छूट होगी।”

गौरतलब है कि अग्निवीरों को सेना में 4 वर्ष के लिए भर्ती किया जा रहा है। सेना में भर्ती होंगे वाले अग्निवीरों में से 25% को 4 साल के बाद भी सेवा देने के लिए रखा जाएगा जबकि बाकियों को अन्य फायदों के साथ सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा। सरकार ने इन अग्निवीरों के कल्याण के लिए ही केन्द्रीय सुरक्षाबलों में आरक्षण का यह फार्मूला 2022 में लागू किया था। अब इस पर अमल किया जा रहा है।