मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए क्विंट ने गिरधर ज्ञानी को डॉक्टर बताया। टास्क फ़ोर्स का संयोजक तक बता डाला। जबकि वे ना मेडिकल प्रैक्टिस करते हैं और ना कोई महामारी विशेषज्ञ हैं। यहॉं तक कि ऐसा कोई टास्क फोर्स भी नहीं है जिसका वामपंथी वेबसाइट ने दावा किया।
इस ख़बर के सामने आने के बाद जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने इसे नकार दिया। अमेरिका के मेरीलैंड में स्थित यूनिवर्सिटी ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि उसने ऐसा कोई रिसर्च प्रकाशित नहीं किया है। यूनिवर्सिटी ने लिखा कि इस कथित 'रिसर्च' में उसके लोगो और नाम का भी ग़लत इस्तेमाल किया गया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने रात में मीटिंग कर मजदूर हित में यह बड़ा फैसला लिया है। बस का इंतजाम नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ समेत कई अन्य जिलों में किया गया, जहाँ से मजदूर अपने घरों को जा सकेंगे। मुख्यमंत्री के इस बड़े फैसले से उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग अपने-अपने घर तक पहुँच सकेंगे।
CNBC-TV18 से बातचीत में विप्रो ने कहा, “यह ऐलान मार्च 2019 में हुआ था। आज ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।” करीब एक साल पहले मार्च 2019 में जब अजीम विप्रो के चेयरमैन थे, तो उन्होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के लिए 52750 करोड़ रुपए दान किया था।
जैसे ही रामायण का पहला एपिसोड शुरू हुआ, लोगों ने गूगल पर रामानंद सागर की रामायण सर्च करना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से यह गूगल में टॉप सर्च में आ गया। दरअसल लोग यह जानने को काफी उत्सुक थे कि इसका प्रसारण कब शुरू होगा और वो इसे ऑनलाइन कैसे देख पाएँगे।
रहमानिया मस्जिद से एक किलोमीटर के दायरे में कर्फ्यू। क्योंकि 12 मार्च को ओमान से आया कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति 24 मार्च तक इसी मस्जिद में नमाज पढ़ने आता रहा जबकि उसे खाँसी बुखार के लक्षण थे। यह खुद 200 से ज्यादा लोगों से मिला है। और इसके परिवार के 32 लोग हजारों लोगों से!
दी लल्लनटॉप अपनी ऑडियंस का ख़ास ध्यान रखते हुए उनके मतलब का फैक्ट चेक करते हुए यह भी साबित करते हुए देखा गया है कि सरसों के तेल से कोरोना वायरस से बचाव नहीं हो पाता है। यह वो ऑडियंस है जो दैनिक सस्ते इन्टरनेट की पूरी डेढ़ जीबी या तो टिकटॉक, या फिर दी लल्लनटॉप के चरणों में ही समर्पित करती है।
भारत में कोरोना संक्रमितों के आँकड़ों का विश्लेषण करने पर एक चौंकाने वाले बात सामने आती है। 300+ संक्रमण के मामले उन लोगों के हैं जिनका प्रत्यक्ष रूप से विदेश यात्रा का इतिहास रहा है। इनमें से भी 142 पॉजिटिव मामले उन लोगों के हैं, जो मध्य-पूर्व के इस्लामी मुल्कों से लौटे हैं।
राहत पैकेज की तुलना से पहले यह ध्यान रखना जरूरी है कि अन्य देशों ने व्यापक स्तर पर नुकसान देख ऐसी घोषणा की है। वहीं भारत ने स्थिति हाथ से निकलने से पहले एक कल्याणकारी पैकेज की घोषणा की है। आगे मुमकिन है कि सरकार अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसी पैकेज की घोषणा करे।