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यूक्रेन में आए दिन मर रहे लोग, रूस में खड़ा हो गया तेल का संकट और खूब बरस रहीं मिसाइलें-बम: मिडिल ईस्ट संकट के बीच यूरोप में 5 साल से जारी इस युद्ध में अब क्या चल रहा?

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तेज हो गया है। पिछले 5 साल से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर युद्ध का भयानक असर पड़ा है। तेल बेचने वाले रूस में अब तेल संकट आ गया है। वही नाटो और ट्रंप जेलेंस्की की नए सिरे से मदद करने पर सहमत हो गए हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध को 1600 दिनों से अधिक हो चुके हैं और हाल के दिनों में रूस ने मिसाइलों और ड्रोन से हमले तेज कर दिए हैं। शनिवार (11 जुलाई 2026) को रूस ने यूक्रेन के कई शहरों को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत और 80 से अधिक लोग घायल हुए।

यूक्रेन का कहना है कि रूस लगातार रिहायशी इलाकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे पर हमले कर रहा है, जबकि रूस का दावा है कि उसने सैन्य ठिकानों और रक्षा क्षेत्रों को टारगेट किया है। नाटो देशों से मदद माँग रहे यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यह कह कर सबको चौंका दिया है कि रूस ने चीन की चेतावनी की वजह से अब तक परमाणु बम का इस्तेमाल नहीं किया है। इससे पहले उन्होंने रूस को समझाने की चीन से अपील की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सीजफायर के लिए जेलेंस्की और पुतिन से अलग-अलग बातचीत की, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

24 फरवरी 2022 में पहली बार रूस ने यूक्रेन के नाटो गुट में शामिल होने की जिद के बाद हमला किया था। इन 5 से ज्यादा बीते सालों में लाखों लोगों के मौत का अनुमान है, जबकि 10 लाख से अधिक रूसी सैनिक और 2.5 से 3 लाख से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों के मारे जाने या घायल होने का अनुमान जताया गया है।

युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक 60 लाख से अधिक यूक्रेनी नागरिकों को अपना देश छोड़कर पोलैंड, जर्मनी, रोमानिया और दूसरे यूरोपीय देशों में शरण लेनी पड़ी है। यूक्रेन के भीतर ही करीब 35 लाख से अधिक लोग अपने घरों को छोड़कर देश के सुरक्षित हिस्सों (जैसे पश्चिमी यूक्रेन) में रहने को मजबूर हैं।ऊर्जा संकट से विस्थापन: रूसी हमलों में यूक्रेन की लगभग दो-तिहाई बिजली उत्पादन क्षमता नष्ट हो जाने के कारण, कड़ाके की ठंड और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लाखों लोग पलायन करने को मजबूर हुए हैं।

चीन ने रूस को चेताया- जेलेंस्की

अब तक चीन को रूस को समझाने की सलाह देने वाले यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है कि चीन ने राष्ट्रपति पुतिन को चेतावनी दी है कि वे यूक्रेन में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करें।

जेलेंस्की ने गुरुवार (9 जुलाई 2026) को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आपने रूसी मीडिया की ऐसी बातें सुनी होंगी, जिसमें कहा गया है कि यूक्रेन के हमलों का जवाब देने के लिए रूस ने चीन से पूछा कि क्या हम परमाणु हमला करें, तो चीन ने अल्टीमेटम देने के अंदाज में जवाब दिया कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। जेलेंस्की ने कहा कि ये पहला मौका है जब चीन ने रूस को सख्त हिदायत दी।

इससे पहले जेलेंस्की कहते रहे हैं कि चीन वास्तव में शांति चाहता है तो उसे रूस पर अपने असर का इस्तेमाल करना चाहिए। चीन रूस के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों के कारण दबाव डाल सकता है, लेकिन अब तक उसने ऐसा नहीं किया है। यूक्रेन लगातार यह भी कहता रहा है कि रूस को तकनीकी और औद्योगिक आपूर्ति मिलने से उसकी युद्ध क्षमता बनी हुई है।

जेलेंस्की के मुताबिक, यूक्रेन की सेना ने 9 जुलाई 2026 को अजोव सागर में रूस के एक दर्जन और टैंकरों पर हमला किया। उसने रूसी सेना को ईंधन की सप्लाई रोकने और रूसी क्रीमिया को अलग-थलग करने की कोशिशें तेज कर दी है।

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 5 जुलाई से 9 जुलाई तक यूक्रेन ने अजोव सागर और काला सागर में रूस के कम से कम 36 जहाजों पर हमला किया और उनमें आग लगा दी।

इनमें रूस के तथाकथित गुप्त बेडे के 32 टैंकर और दो ड्राई कार्गो जहाज शामिल थे। वे सभी क्रीमिया तक ईंधन पहुँचाने की कोशिश कर रहे थे।

रूस ने यूक्रेन पर तेज किए हमले

जुलाई 2026 में ही यूक्रेन के एक रिहायशी इलाके में रूसी हमले में छोटे से शहर विशनेवे के हथियारों के गोदाम में धमाका हुआ। इसके बाद एक के बाद एक कई धमाके हुए। सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो गए। इसको लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति ने हथियारों के जखीरा रखने की इजाजत देने को लेकर जिम्मेदार अधिकारी पर एक्शन लेने की बात कही। दरअसल एक के बाद एक धमाके उन हथियारो की वजह से हुए थे।

जेलेंस्की ने दावा किया कि शनिवार (11 जुलाई 2026) को यूक्रेन में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों में एक बच्चे समेत 8 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। उत्तरी शहर सुमी के भीड़-भाड़ वाले इलाके में दो ग्लाइड बम गिरे, जिससे 5 लोगों की मौत हो गई और 30 लोग घायल हो गए। सुमी क्षेत्र रूस से सटा इलाका है, जिसे रूस बफर जोन बनाना चाहता है। इस इलाके में एक व्यक्ति की मौत विस्फोटक उपकरण पर पैर पड़ने से हो गई। दक्षिण-पूर्वी शहर जापोरिज्जिया में भी ग्लाइड बमों से 10 लोग घायल हो गए। दिन में इससे पहले दक्षिणी बंदरगाह शहर ओडेसा पर मिसाइल हमले में 2 लोगों की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया।

जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने शनिवार देर रात 120 से ज्यादा ड्रोन और 12 मिसाइलें दागीं, जिनमें से आधी बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। उन्होंने कहा, “एयर रेड अलर्ट जारी होने से पहले ही नागरिक बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया गया।” उन्होंने इमारतों के मलबे और धुएँ के बीच काम कर रही इमरजेंसी टीमों के वीडियो पोस्ट किए।

जेलेंस्की ने कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम ‘ज्यादातर टारगेट को गिराने में कामयाब रहे’, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों को नहीं रोक पाए। उन्होंने अपने सहयोगी देशों से ज्यादा सैन्य सहायता देने की माँग की ताकि रूसी हमले का सामने कर सकें। हालाँकि ये युद्ध पिछले 5 सालों में चल रहा है। लेकिन रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर हमले तेज कर दिए हैं। जुलाई 2026 में अब तक राजधानी कीव और उसके आस-पास के इलाकों में हुए हमलों में 60 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

शनिवार को कीव पर हुआ हमला एक हफ़्ते से भी कम समय में दूसरी बार था जब एयर अलर्ट जारी होने से पहले ही मिसाइलें गिरीं। यूक्रेन के रक्षा मंत्री के सलाहकार सर्गी स्टर्नेंको ने कहा कि यह हमला तब हुआ जब सायरन से रूस की S-400 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों के आने का संकेत भी नहीं मिल पाया था।

यूक्रेन के हमले से रूस में ईधन संकट का दावा

यूक्रेन ने दावा किया है कि उसके लगातार और लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन हमलों की वजह से पूरे रूस में ईंधन की भारी कमी हो गई है। इसके चलते कई इलाकों में कीमतें बढ़ने और पेट्रोल स्टेशनों पर लंबी लाइनें लगने की बात कही जा रही है। रूस में पेट्रोल और डीजल का भारी संकट पैदा हो गया है। यूक्रेन के मुताबिक, उसने रणनीति बदलते हुए रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों को निशाना बनाना शुरू किया। उसके हमलों से कई प्रमुख रूसी तेल रिफाइनरियाँ क्षतिग्रस्त हो गई और रूस का ईंधन उत्पादन क्षमता करीब 20% तक गिर गया है।

रॉयटर्स ने दावा किया है कि रूस ने अस्थायी रूप से डॉन-अजोव चैनल से आवाजाही रोक दी है। यह चैनल डॉन नदी को अजोव सागर से जोड़ने वाला एक जलमार्ग है।

यह कदम अजोव सागर में 10 टैंकरों सहित रूस के 13 जहाजों पर यूक्रेन के हमले के बाद उठाया गया। जानकारों का मानना है कि दुनिया में अनाज के सबसे बड़े निर्यातक रूस से होने वाले गेहूँ के एक्सपोर्ट का एक-चौथाई हिस्सा अजोव सागर से होकर जाता है। इसमें दावा किया गया है कि शिपिंग कंपनियों को रूस ने इसकी जानकारी दे दी है और शुक्रवार 10 जुलाई 2026 की शाम 6.10 बजे से किसी भी जहाज को यहाँ से गुजरने की अनुमति नहीं दी गई।

रूसी अधिकारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद इन हमलों के कारण उत्पन्न हुई ईंधन की कमी को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। इस किल्लत से निपटने के लिए रूस को मजबूरन भारत जैसे मित्र देशों से गैसोलीन (पेट्रोल) का आयात करना पड़ रहा है। यहाँ तक कि ईंधन की गुणवत्ता के मानकों Euro-5 को घटाकर Euro-3 कर दिया गया है। साइबेरिया जैसे बड़े औद्योगिक हब में लोगों से वर्क फ्रॉम होम करने और गाड़ियों का इस्तेमाल कम करने की अपील की गई है। राजधानी मॉस्को सहित कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

यूक्रेन को NATO का सदस्य देश बनाने की माँग दोहराई

हाल में रूसी हमलों के बाद नाटो की 7-8 जुलाई 2026 को तुर्किए की राजधानी अंकारा में हुई बैठक में यूक्रेन को करीब €70 अरब यानी करीब 7.6 लाख करोड़ रुपए की सैन्य सहायता देने का वादा किया। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने नाटो देशों से कहा कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि तत्काल एयर डिफेंस सिस्टम और हथियारों की जरूरत है।

जेलेंस्की ने अमेरिका से पेट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलों की तत्काल आपूर्ति करने को कहा। साथ ही ये भी कहा कि अगर मिसाइलें नहीं दे पा रहे, तो यूक्रेन को इनके निर्माण के लिए लाइसेंस दी जाए।

जेलेंस्की ने ये भी माँग की है कि NATO यूक्रेन को अपना सदस्यता बनाए और स्पष्ट रोडमैप दे। इससे पूरे यूरोप की सुरक्षा मजबूत होगी।

सैन्य अभियान को हासिल किए बिना पीछे नहीं हटेगा रूस- पुतिन

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर दोहराया है कि रूस अपने टारगेट पूरा किए बगैर यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई को नहीं रोकेगा। रूस का कहना है कि उसके हमले यूक्रेन के सैन्य और रक्षा क्षेत्रों पर किए जा रहे हैं। वही रूस ने यह भी आरोप लगाया है कि यूक्रेन लगातार रूस के अंदर ड्रोन हमले कर रहा है, इसलिए जवाबी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही रूस ने अपनी शर्तों पर कुछ मौकों पर बातचीत की इच्छा जताई है।

युद्ध शुरू होने के बाद रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने और युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य पश्चिमी देशों ने रूस पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए। रूस के प्रमुख बैंकों को वैश्विक वित्तीय मैसेजिंग सिस्टम SWIFT से बाहर कर दिया गया। रूस के केंद्रीय बैंक की विदेशों में जमा करीब 300 अरब डॉलर की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया साथ ही रूसी कच्चे तेल और गैस के आयात पर प्रतिबंध या ‘प्राइस कैप’ लगाई गई।

रूस को अत्याधुनिक तकनीक, सैन्य उपकरण, और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा कर अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की कोशिश की गई। इसके बावजूद रूस टस से मस नहीं हुआ और यूक्रेन को टारगेट करता रहा।

ट्रंप ने युद्ध रोकने का वादा किया था

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध को जल्द समाप्त कराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों पक्षों से बातचीत कर युद्ध रोकने का रास्ता निकाला जा सकता है। अमेरिका ने रूस और यूक्रेन दोनों से कई दौर की बातचीत की। इस दौरान ट्रंप और जेलेंस्की के संबंध तनावपूर्ण भी हुए और धीरे धीरे अब बेहतर हुए हैं।

यही वजह है कि नाटो के तुर्किए में हुई बैठक में यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए अमेरिका तैयार है। यूक्रेन को पेट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन के लिए लाइसेंस देने की दिशा में पहल की गई। ट्रंप प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उसका उद्देश्य युद्ध को बातचीत के जरिए समाप्त करना है, लेकिन जमीन पर लड़ाई अभी भी जारी है।

दरअसल रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें अभी भी जारी हैं। लेकिन सीजफायर और शांति समझौते को लेकर कोई खास सफलता नहीं मिली है। रूस अभी भी अपने सैन्य टारगेट से पीछे हटने को तैयार नहीं है। वह कभी नहीं चाहेगा कि यूक्रेन को नाटो का सदस्य देश बनाया जाए। युद्ध की बड़ी वजह भी यही था। वहीं जेलेंस्की नाटो की सदस्यता की माँग कई बार कर चुके हैं। दूसरी बात यह है कि यूक्रेन अपने कब्जे वाले क्षेत्रों को छोड़े बिना समझौता नहीं करना चाहता। इसलिए दोनों देशों के बीच सीजफायर को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। यही वजह है कि रूस और यूक्रेन एक दूसरे पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए जा रहे हैं और ये युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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