प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवेंद्र फड़णवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर शुभकामनाएँ दी हैं। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर भरोसा जताया है।
सौरभ द्विवेदी के गाइड वहीं हैं जो इस मामले में अभी फोकस में है साहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर उमाकांत चतुर्वेदी। सौरभ जी से ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती ने उनसे फिरोज काण्ड पर विस्तृत चर्चा की। पेश है उसी इंटरव्यू के मुख्य अंश जो इस पूरे मामले में आपकी ऑंखें खोलने के लिए ज़रूरी है।
इस विरोध प्रदर्शन के विराम की कहानी पीएमओ के दखल के बाद लिखी गई। आज ही इस मामले की गूँज प्रधानमंत्री तक पहुँची थी। और प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस सम्बन्ध में रिपोर्ट तलब की है। पीएमओ ने इस पूरे बवाल को लेकर BHU प्रशासन से रिपोर्ट भी माँगी।
अगर मामला सिर्फ विचारधारा के आधार पर किसी के समर्थन और किसी के विरोध का है, और जेएनयू एवं FTII जैसे संस्थानों के वाम मजहब के छात्र “शिक्षा का भगवाकरण” कहकर किसी नियुक्ति का विरोध कर सकते हैं, तो वही अधिकार आखिर BHU के छात्रों को क्यों नहीं मिलना चाहिए? समस्या की जड़ में यही दोमुँहापन है।
पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के ख़राब शासन का अंत करने के लिए शिवसेना का समर्थन करना ज़रूरी था। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने शिवसेना को समर्थन देने का निर्णय लिया है।
छात्रों ने कल प्रशासन को अपना माँग पत्र सौंपते हुए कई सवालों का विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब माँगा है। जिसे लेकर देर रात SVDV के संकाय प्रमुख, अन्य विभागाध्यक्षों और VC के बीच मीटिंग चली लेकिन किसी भी नतीजे पर नहीं पहुँचा गया।
"हिन्दू धर्मशास्त्र कौन पढ़ाएगा? उस धर्म का व्यक्ति जो बुतपरस्ती कहकर मूर्ति और मन्दिर के प्रति उपहासात्मक दृष्टि रखता हो और वो ये सिखाएगा कि पूजन का विधान क्या होगा? क्या जिस धर्म के हर गणना का आधार चन्द्रमा हो वो सूर्य सिद्धान्त पढ़ाएगा?"
तानाजी का ट्रेलर जैसे ही रिलीज हुआ... क्विंट ने इस पर एक लेख लिख मारा। माफ कीजिए, लेख नहीं - जहर लिखा है, जहर! 'लिबरल' नेहरू से लेकर 'मसकुलर' मोदी तक को ठूँस दिया है इसमें। अकबर इनके लिए 'द ग्रेट' हो जाता है लेकिन शिवाजी पर इनकी सुलग जाती है!
प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं को ये तक नहीं पता था कि जिस प्रदर्शन में वो शामिल हुए हैं- उसका उद्देश्य क्या है। ऐसे में जब टीवी 9 भारतवर्ष के संवाददाता विपिन चौबे ने हकीकत का खुलासा किया तो वहाँ मोदी मीडिया मुर्दाबाद के नारे लगने लगे और कार्यकर्ता उन पर हावी हो गए।
प्रियंका गाँधी की ओर से पार्टी के 350 पूर्व सांसद, MLA, MLC, 2019 के लोकसभा उम्मीदवार और 2017 के विधानसभा उम्मीदवारों को बुलावा भेजा गया था। लेकिन इंदिरा गाँधी की छवि वाली प्रियंका के बुलावे के बावजूद आए कितने? सिर्फ 40! मतलब 350 में से सिर्फ 40... बहुत नाइंसाफी हो गया ये तो!