पिछले पाँच सालों में रवीश की पूरी पत्रकारिता, सेलेक्टिव रही है। यह कह कर उन्माद फैलाने की कला सिर्फ रवीश को आती है कि जिसमें बार-बार एक समुदाय को कहा जाता है कि 'डर का माहौल है', हिन्दू तुम्हें लिंच कर रहे हैं, संभल कर रहो। भारत की स्थिति सोमालिया या नॉर्थ कोरिया से भी बदतर बताने में ये आदमी लायडिटेक्टर मशीन को भी धोखा दे देगा।
तुम्हारे यूॅं चर्चे में आने से कन्हैया, राना अय्यूब, आरफा खानम शेनवारी सब रश्क कर रहे हैं। राना अय्यूब तो वाशिंगटन पोस्ट तक लिख आई। आरफा भी वायर लेकर तैयार हैं। पर 'आ बैल मुझे मार' वाला तुम्हारा ट्रिक इनके काम अब तक नहीं आया।
शेहला ने भारतीय सेना पर रात में कश्मीर के लोगों के घरों में घुसने, गैर-कानूनी रूप से लड़कों को उठाने, घरों में छानबीन करने, चावलों में तेल मिलाने, शोपियाँ में कश्मीरी लड़कों को बंधक बनाकर दहशत फैलाने जैसे कई आरोप लगाए थे।
"अरविंद केजरीवाल जी, आपके प्रवक्ताओं ने आपकी इच्छा के अनुसार पूरे अहंकार के साथ मुझसे कहा था कि पार्टी ट्विटर पर भी मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लेगी। इसलिए कृपया "आम आदमी पार्टी", जो अब "ख़ास आदमी पार्टी" बन चुकी है, की प्राथमिक सदस्यता से मेरा इस्तीफा स्वीकार करें।"
दिल्ली की AAP सरकार के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है। इस मामले पर अपनी राय देते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके सामने जो सबूत पेश किए हैं, उसके मुताबिक कन्हैया और अन्य लोगों पर देशद्रोह का मामला नहीं बनता है।
अगर एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के लिए श्रीलंका की सरकार और लिट्टे समान हैं, इस्लामी देशों में महिलाओं को दोयम दर्जे के अधिकारों का मिलना सही लगता है, नेटिव अमेरिकन महिलाओं का रेप स्वैच्छिक सेक्स लगता है, भारत में जिहादी आतंकियों का पलड़ा भारी है, तो समस्या बहुत बड़ी है।
अर्बन नक्सलियों का साथ देने से लेकर तालिबान से संबंध होने तक के आरोप लग चुके होने के बावजूद Amnesty International सुधर नहीं रहा। अब वह कश्मीर के मुद्दे को भुनाने के चक्कर में कुछ नहीं बल्कि जिहाद का संरक्षण ही कर रहा है।
चिदंबरम तिहाड़ नहीं जाना चाहते इसके लिए उनके वकील कपिल सिब्बल पहले भी एड़ी-चोटी का जोर लगा चुके हैं। लेकिन अब अदालत ने उन्हें 19 सितम्बर तक के लिए जुडिशल कस्टडी में भेजकर उनके तिहाड़ जाने का रास्ता साफ कर दिया है। उन्हें 19 सितम्बर तक तिहाड़ में ही रहना होगा।
'वे (हिंदू) वहाँ पूजा करते थे, लेकिन मस्जिद पर मालिकाना हक वक्फ और मुस्लिम का ही था।' - मुस्लिम पक्ष के वकील धवन ने जैसे ही यह बात कोर्ट में रखी, उन पर SC के जज ने सवाल दागा - क्या हिंदू-मुस्लिम एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं? इसे लेकर इस्लामिक कानून क्या है?