रिज़वी ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि कोई भी मुस्लिम महिला सिंदूर लगाती है, चूड़ियाँ पहनती है, मंगलसूत्र पहनती है या बिंदी लगाती है तो यह शरियत के तौर पर हराम नहीं है।
मासूम बच्ची की माँ का कहना है कि वो (आरोपित) बच्ची को टॉफी का लालच देकर बहला-फुसला कर मंदिर ले गया था। इसके अलावा उन्होंने बताया कि बच्ची को अपने साथ ले जाने के दौरान मोहम्मद नन्हे ने उसके साथ खेलने वाले सभी बच्चों को वहाँ से भगा दिया था।
आपकी औकात नहीं है किसी भी पब्लिक स्टेज पर यह बोलने की कि मजहबी नारे का प्रयोग आतंकी हमलों के लिए किया जाता है। पीटने के लिए उपयोग किए गए नारे में और काले झंडे पर लिख कर, अपने आत्मघाती हमले या टेरर अटैक के पहले लिखे पोस्ट या वीडियो में बोले जाने वाले नारे में ‘पीटने’ और ‘कई लोगों की जान ले लेने’ जितना का अंतर है।
पीठ ने कहा कि “राणा अय्यूब की पुस्तक कोई उपयोगिता नहीं है। यह पुस्तक अनुमानों, अटकलों और कल्पना पर आधारित है। जाहिर तौर पर इसका कोई महत्त्व नहीं है। अदालत ने कहा कि राणा अय्यूब ने अपनी पुस्तक में जो तर्क दिए हैं, वो उनके विचार हैं और किसी व्यक्ति के विचार या राय सबूतों के दायरे में नहीं आते।
अगर शिकार मुस्लिम या दलित है, तो अपराधी के नाम में पहचान ढूँढी जाती है। मजहब विशेष वालों ने एक-दूसरे को मारा, तो ये मुन्नी बेगम की ग़ज़लें गाने लगते हैं। दलित ने दलित को मारा, तो ये भारतीय नारी किस-किस से, कितनी बार, और कब-कब सेक्स करे, इस चर्चा में लीन हो जाते हैं।
इसमें कोई दो मत नहीं है कि लड़का गायब था। केशव सक्सेना को सांप्रदायिक हिंसा के तीन दिन बाद तक भी उसके माँ-बाप ने नहीं देखा था। यह लड़का आखिरकार तीन तारीख की शाम को अपने घर पहुँचा, यानी तनाव के चौथे दिन। यदि हौज काजी में हालात सामान्य होने का न्यूजलॉन्ड्री का दावा सही भी है (जैसा है नहीं), तो भी क्या लड़के के गायब होने की खबर को अन्य मीडिया संस्थानों की तरह ऑपइंडिया को भी दबा देनी चाहिए थी?
उग्र मुस्लिमों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कम से कम 8 आँसू गैस के गोले दागने पड़े, क्योंकि समुदाय विशेष ने प्रदर्शन के दौरान पथराव और आगजनी करना शुरू कर दिया। जिससे 4 से 5 पुलिस कर्मी घायल हो गए और बस सहित कई वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया गया।
औद्योगिक गलियारों के बनने से उद्योग की संभावना वाले क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक निवेश आने से इन्फ्रास्ट्रक्चर का बेहतर विकास होगा, समर्पित माल भाड़ा गलियारों से हमारे रेल नेटवर्क पर बोझ घटेगा, जिससे आम आदमी को लाभ होगा। भारतमाला कार्यक्रम से राष्ट्रीय सड़क गलियारों और राजमार्गों के विकास में मदद मिलेगी, जबकि सागरमाला से बंदरगाहों को जोड़ने और उनके आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक आज लोगों के जीवन में नई आकांक्षाएँ और अपेक्षाएँ हैं और यह बजट देश को विश्वास दे रहा है कि इन्हें पूरा किया जा रहा है।
मोदी सरकार की दो प्रमुख योजनाओं उज्जवला और सौभाग्य योजना के कारण ग्रामीण परिवारों के जीवन में नाटकीय बदलाव आया है और उनका जीवन आसान हुआ है। बीते पाँच साल में सात करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन मिले हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत सरकार का लक्ष्य 2022 तक सभी को घर मुहैया कराना है। शौचालय, बिजली और एलपीजी कनेक्शन के साथ उपलब्ध कराए जा रहे ऐसे 1.54 करोड़ घर गॉंवों में बनाए गए हैं। इस योजना के दूसरे चरण में 2022 तक 1.95 करोड़ और घर बनाए जाएँगे।