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प्रिय अमर्त्य सेन जी, मजहबी नारा पढ़कर हत्या करने वालों पर आपके नोबल विचारों का सबको इंतजार है

आपकी औकात नहीं है किसी भी पब्लिक स्टेज पर यह बोलने की कि मजहबी नारे का प्रयोग आतंकी हमलों के लिए किया जाता है। पीटने के लिए उपयोग किए गए नारे में और काले झंडे पर लिख कर, अपने आत्मघाती हमले या टेरर अटैक के पहले लिखे पोस्ट या वीडियो में बोले जाने वाले नारे में ‘पीटने’ और ‘कई लोगों की जान ले लेने’ जितना का अंतर है।

अनुमानों, फैंसी कल्पना पर आधारित राणा अय्यूब की ‘गुजरात फाइल्स’ को SC ने बताया बकवास

पीठ ने कहा कि “राणा अय्यूब की पुस्तक कोई उपयोगिता नहीं है। यह पुस्तक अनुमानों, अटकलों और कल्पना पर आधारित है। जाहिर तौर पर इसका कोई महत्त्व नहीं है। अदालत ने कहा कि राणा अय्यूब ने अपनी पुस्तक में जो तर्क दिए हैं, वो उनके विचार हैं और किसी व्यक्ति के विचार या राय सबूतों के दायरे में नहीं आते।

जब स्वघोषित लिबरलों के फ़र्ज़ी नैरेटिव ने हत्याएँ करवाई, मंदिर तुड़वाए, दंगे भड़काए

अगर शिकार मुस्लिम या दलित है, तो अपराधी के नाम में पहचान ढूँढी जाती है। मजहब विशेष वालों ने एक-दूसरे को मारा, तो ये मुन्नी बेगम की ग़ज़लें गाने लगते हैं। दलित ने दलित को मारा, तो ये भारतीय नारी किस-किस से, कितनी बार, और कब-कब सेक्स करे, इस चर्चा में लीन हो जाते हैं।

न्यूजलॉन्ड्री की बेशर्मी: दूसरे मजहब को पाक-साफ बताने के लिए हिन्दू युवक के अगवा होने की खबर पर उठाए सवाल

इसमें कोई दो मत नहीं है कि लड़का गायब था। केशव सक्सेना को सांप्रदायिक हिंसा के तीन दिन बाद तक भी उसके माँ-बाप ने नहीं देखा था। यह लड़का आखिरकार तीन तारीख की शाम को अपने घर पहुँचा, यानी तनाव के चौथे दिन। यदि हौज काजी में हालात सामान्य होने का न्यूजलॉन्ड्री का दावा सही भी है (जैसा है नहीं), तो भी क्या लड़के के गायब होने की खबर को अन्य मीडिया संस्थानों की तरह ऑपइंडिया को भी दबा देनी चाहिए थी?

हिंसक मजहबी भीड़ ने सूरत में किया पुलिस पर पथराव, दंगा और तोडफोड़ के बाद धारा 144 लागू

उग्र मुस्लिमों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कम से कम 8 आँसू गैस के गोले दागने पड़े, क्योंकि समुदाय विशेष ने प्रदर्शन के दौरान पथराव और आगजनी करना शुरू कर दिया। जिससे 4 से 5 पुलिस कर्मी घायल हो गए और बस सहित कई वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया गया।

स्वच्छ भारत, समृद्ध भारत: बजट में मोदी सरकार ने पेश किया दशक का एजेंडा

औद्योगिक गलियारों के बनने से उद्योग की संभावना वाले क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक निवेश आने से इन्फ्रास्ट्रक्चर का बेहतर विकास होगा, समर्पित माल भाड़ा गलियारों से हमारे रेल नेटवर्क पर बोझ घटेगा, जिससे आम आदमी को लाभ होगा। भारतमाला कार्यक्रम से राष्ट्रीय सड़क गलियारों और राजमार्गों के विकास में मदद मिलेगी, जबकि सागरमाला से बंदरगाहों को जोड़ने और उनके आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी।

‘इस बजट से गरीब को बल मिलेगा, युवा को बेहतर कल और मध्यम वर्ग को मिलेगी प्रगति’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक आज लोगों के जीवन में नई आकांक्षाएँ और अपेक्षाएँ हैं और यह बजट देश को विश्वास दे रहा है कि इन्हें पूरा किया जा रहा है।

मोदी 2.0 का पहला बजट: गाँव, गरीब और किसान पर फोकस

मोदी सरकार की दो प्रमुख योजनाओं उज्जवला और सौभाग्य योजना के कारण ग्रामीण परिवारों के जीवन में नाटकीय बदलाव आया है और उनका जीवन आसान हुआ है। बीते पाँच साल में सात करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन मिले हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत सरकार का लक्ष्य 2022 तक सभी को घर मुहैया कराना है। शौचालय, बिजली और एलपीजी कनेक्शन के साथ उपलब्ध कराए जा रहे ऐसे 1.54 करोड़ घर गॉंवों में बनाए गए हैं। इस योजना के दूसरे चरण में 2022 तक 1.95 करोड़ और घर बनाए जाएँगे।

बजट 2019: Zero Budget Farming से बदलेगी देश के किसानों की तस्वीर, दोगुनी होगी आय

जीरो फार्मिंग खेती पूर्ण रूप से प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर होती है। इस खेती में किसान सिर्फ़ प्राकृतिक खेती के लिए उनके द्वारा बनाई गई खाघ और अन्य चीजों का प्रयोग करते हैं, जिससे उन्हें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों को इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती।

Live Budget 2019: उच्च शिक्षा संस्थानों को उत्कृष्ट बनाने के लिए 400 करोड़ खर्च करेगी मोदी सरकार

स्टैंड-अप इंडिया के तहत महिलाओं, SC -ST उद्यमियों को लाभ दिया जाएगा। स्टार्ट-अप के लिए टीवी चैनल पर प्रोग्राम शुरू किए जाएँगे। वित्त मंत्री ने कहा कि महिलाओं के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं। उन्होंने घोषणा की कि जनधन खाताधारक महिलाओं को 5,000 रुपए ओवरड्राफ़्ट की सुविधा दी जाएगी।

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