मोहन जी ने दावा किया था, "मैंने सुना था कि पुरुषों में नपुंसकता लाने वाली दवा पंचामृतम में मिलाई गई थी। इस खबर को छिपाया गया और उस पंचामृतम को नष्ट कर दिया गया।"
स्थानीय निवासी सैयद नियाज अशरफ अली विवादित जमीन को अलाउद्दीन खिलजी के समय से जोड़ कर बयानबाजी करते थे। बकौल नियाज अशरफ वह भूमि अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में ख्वाजा कड़क शाह के नाम से माफीनामा पर दर्ज है।
पद्मावती ने कहा, "जैसे ही मैं लड्डू बाँटने जा रही थी, मैं यह देखकर दंग रह गई कि उसमें तंबाकू के टुकड़े कागज में लिपटे हुए थे। प्रसाद को पवित्र माना जाता है, और उसमें ऐसी मिलावट होना दिल दहला देने वाला है।"