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36 बुलडोजर, 70 ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सोमनाथ में चला बड़ा अभियान… मस्जिद-ईदगाह समेत कई अवैध ढाँचे ध्वस्त: बवाल करने पर पुलिस ने 70 को पकड़ा, 1500 सुरक्षाकर्मी तैनात

गिर सोमनाथ, जूनागढ़ और पोरबंदर जिलों से लगभग 1500 पुलिसकर्मियों को इस कार्रवाई के लिए तैनात किया गया। इनमें 3 एसपी, 6 डिप्टी एसपी, 50 इंस्पेक्टर और 2 एसआरपी कंपनियाँ भी शामिल थीं।

गुजरात के सोमनाथ शहर में हाल ही में अब तक की सबसे बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की गई, जिसमें प्रशासन ने अवैध रूप से बने कई मजहबी निर्माणों को भी ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई में 36 बुलडोजर, 70 ट्रैक्टर-ट्रॉली, और 1500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। गिर सोमनाथ में विशेष रूप से समुद्री इलाकों और पूजा स्थलों के आसपास के अवैध निर्माणों को हटाने के उद्देश्य से यह मेगा अभियान चलाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विध्वंस अभियान सुबह 5 बजे शुरू किया गया, जिसमें प्रशासन ने भारी सुरक्षा इंतजाम किए थे। पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में बदल दिया गया, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। मीडिया की एंट्री पर भी बैन लगा दिया गया था। तोड़फोड़ के लिए 36 बुलडोजर और 5 हिताची मशीनों का इस्तेमाल किया गया, जबकि मलबा हटाने के लिए 50 ट्रैक्टर और 10 बड़े डंपरों को लगाया गया।

इस मेगा ड्राइव के दौरान प्रशासन ने ईदगाह और मस्जिद सहित कई अवैध मजहबी स्थलों को हटाया, जिससे कुछ स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग विरोध में एकत्रित हो गए। विरोध के बावजूद, प्रशासन ने सख्ती से स्थिति को नियंत्रण में लिया और कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सोशल मीडिया पर इस विध्वंस के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें धार्मिक स्थलों को हटाते हुए देखा जा सकता है।

इस अभियान की संवेदनशीलता को देखते हुए जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे। गिर सोमनाथ, जूनागढ़ और पोरबंदर जिलों से लगभग 1500 पुलिसकर्मियों को इस कार्रवाई के लिए तैनात किया गया। इनमें 3 एसपी, 6 डिप्टी एसपी, 50 इंस्पेक्टर और 2 एसआरपी कंपनियाँ भी शामिल थीं। जिला कलेक्टर दिग्विजयसिंह जाडेजा, रेंज आईजी नीलेश झांजड़िया, एसपी मनोहरसिंह जाडेजा जैसे अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण ऑपरेशन का हिस्सा थे।

विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने हंगामा किया, लेकिन प्रशासन की तैयारी के आगे वे ज्यादा कुछ नहीं कर सके। 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जो कि कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश कर रहे थे।

यह विध्वंस अभियान पिछले एक महीने से तैयार किया जा रहा था। प्रशासन ने करीब एक महीने तक सर्वेक्षण किया और सभी अवैध निर्माणों की पहचान की। हाजी मंगरोलीशा पीर दरगाह, हजरत माईपुरी, सीपे सालार और मस्तानशा बापू जैसी प्रमुख दरगाहों को भी इस कार्रवाई के दौरान हटाया गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि इस प्रक्रिया के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे और विध्वंस कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो सके।

मूल रूप से ये रिपोर्ट गुजराती में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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