उन्होंने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा बल अब तक के सबसे सफल तरीके से आतंकियों से निपट रहे हैं। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। इसलिए, मोदी सरकार आतंकियों के हमदर्द से भी सख्ती से निपट रही है।
राज्यसभा में विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) मतलब UAPA संशोधन विधेयक को पारित कर दिया गया। बिल के पक्ष में 147 और विपक्ष में 42 वोट पड़े। इस बिल में आतंक से संबंध होने पर संगठन के अलावा किसी शख्स को भी आतंकी घोषित करने का प्रावधान शामिल है।
"तृणमूल कॉन्ग्रेस की गुंडा वाहिनी ने अचानक से बाजार में आकर BJP पार्टी ऑफिस तोड़ दिया। पुलिस को खबर देने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इलाके को अशांत कर रखा है। अगर पुलिस की तरफ से जल्द ही इन पर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो हमें मजबूरन बड़े आंदोलन पर उतरना होगा।"
'पैसे लेकर टिकट दिए जाने की समस्या का समाधान' विषयक एक सेमिनार में बसपा विधायक ने यह बात कही। उनके बयान पर विधानसभा में मौजूद उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा इस पर तो मायावती ही स्पष्ट जवाब दे सकती हैं।
राज्यसभा ने मंगलवार को तीन तलाक को गैर कानूनी करार देने वाले विधेयक को मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार रात इस पर दस्तख्त कर दिए। इसके साथ ही यह कानून देश में लागू हो गया है।
कॉन्ग्रेस नेता रावेश खान उर्फ बंटी ने नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में रावेश हार गए थे और उदयपाल यादव जीते थे। इसके बाद से ही दोनों पक्षों में रंजिश चल रही थी।
इस मुलाकात के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा, "हमने पीएम मोदी से कहा कि रियासत में कोई ऐसे कदम न उठाए जाएँ, जिससे वहाँ की स्थिति खराब हो। हमने 35-A और 370 का भी मामला उठाया। साथ ही जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने की माँग की।"
"कॉन्ग्रेस के नेता मुझे अपनी पार्टी में बुलाने की कह रहे हैं। इसके लिए वह मुझे करोड़ों रुपयों का लालच भी दे रहे हैं। मुझे मंत्री बनाने तक के लिए कहा जा रहा है। लेकिन, मैंने साफ कर दिया है कि मैं उनकी पार्टी में नहीं जाने वाला हूँ।"
उन्नाव रेप मामले में BJP ने कड़ा फैसला लेते हुए विधायक कुलदीप सेंगर को पार्टी से निकाल दिया है। बुधवार (1 अगस्त, 2019) को अचानक से बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को दिल्ली बुलाया गया और...
इस बिल को मोदी सरकार ने लोकसभा में 25 जुलाई को और 30 जुलाई मंगलवार को राज्यसभा ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को अपनी स्वीकृति दी थी। बिल के क़ानून बनने के बाद ये तय हो गया है कि 19 सितंबर 2018 के बाद जितने भी तीन तलाक़ के मामले सामने आए हैं उन सभी का निपटारा इसी क़ानून के तहत किया जाएगा।