इसमें कहा गया है कि सभी मंत्रालयों व विभागों से आग्रह है कि वे सार्वजिनिक उपक्रमों/बैंकों और स्वायत्त संस्थानों समेत अपने प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले विभागों के कर्मचारियों के कामकाज की ‘कायदे कानून और सही भावना’ के अनुसार समीक्षा करें।
केजरीवाल इससे पहले भी कई हवाई योजनाओं की चर्चा कर चुके हैं। जिन पर अभी तक ग्राउंड वर्क की प्रोग्रेस शून्य है। बाद में किसी न किसी वजह से वह योजना फाइलों में फँस जाती है। ऐसे समय में कई विशेषज्ञों का कहना है कि केजरीवाल सरकार जानबूझकर ऐसे काम करती है कि फाइल नियम विरुद्ध हो या इसके लिए आवश्यक तैयारी के अभाव के कारण फाइल उप राज्यपाल के यहाँ फँस जाए, जिससे AAP की पूरी मशीनरी को एक बार फिर से 'कि हम तो दिल्ली की महिलाओं को मुफ्त योजना देना चाहते थे लेकिन मोदी फाइल ही आगे नहीं बढ़ने दे रहें' पर आकर रुक जाती है।
उत्तर बिहार के सभी सांसद इस पहल के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। केंद्रीय गृहराज्य मंत्री और बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नित्यानन्द राय ने इसकी शुरुआत भी कर दी है।
राज्य में राजनीतिक हिंसा बेरोकटोक जारी है और भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की हत्याएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। यहाँ तक कि महिलाओं को भी नहीं बख़्शा जा रहा है। हर दिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
विपक्ष को आम जनता की आवाज़ बनने की ज़रूरत थी, मगर उनकी आवाज़ को बुलंद कर सरकार तक पहुँचाने की बजाए ऐसे संवेदनशील मामले पर चुप्पी साध लेना, नेता प्रतिपक्ष का इस तरह अज्ञातवास पर चले जाना, विपक्ष की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
राम माधव ने कहा, “ कई बार कक्षा में शिक्षक जो पढ़ा रहे होते हैं, उस पर फोकस करना कठिन होता है। परीक्षा के दौरान किताबों पर फोकस करना भी कठिन होता है। हमें नींद आने लगती है और हम सो जाते हैं। पर चिंता करने की कोई बात नहीं! स्कूली बच्चों की तरह संसद में भी कुछ बच्चे हैं। वो हमारे राष्ट्रपति के भाषण पर भी ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।
ऐसा पहली बार नहीं है कि जब गठबंधन सरकार में खींचतान की ख़बरें सामने आई हों, इससे पहले भी मुख्यमंत्री कुमारस्वामी कई बार गठबंधन सरकार चलाने का दर्द बयाँ कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने बयान दिया था कि वो रोज जिस ‘दर्द’ से गुज़रते हैं, वो उसे जनता से बयाँ नहीं कर सकते।
प्रवेश का कहना है कि उन्होंने 17 जून को वेस्ट दिल्ली में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्ज़ा कर वहाँ मस्जिदें और कब्रिस्तान बनाने का मुद्दा उठाते हुए दिल्ली के उप राज्यपाल को चिट्ठी लिखी थी। इसमें उन्होंने माँग की थी कि इस पूरे मामले की जाँच कराई जाए और अवैध निर्माणों को हटाया जाए।
डीईए, सीबीआई और डीओपीटी ने सीवीसी से राय मांगी थी जिसके आधार पर सीवीसी ने इन चारों पूर्व अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है। जिसमें हिमाचल प्रदेश सरकार में वर्तमान प्रमुख सचिव प्रबोध सक्सेना और डीईए के पूर्व अवर सचिव रबिन्द्र प्रसाद का भी नाम है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने महान हस्तियों के नाम पर सभी सभागारों का नाम बदलने का भी निर्देश दिया। उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों से कहा कि वे नगर निगम के साथ सहयोग करें और उन होर्डिंग्स को हटा दें जो विधान भवन और लोक भवन के सामने हैं।