ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि अभिनेता रजनीकांत का नाम किसी विवाद से जुड़ा हो। 2016 के विधानसभा चुनाव के दौरान, वीडियो में उन्हें किसी विशेष पार्टी के उम्मीदवार के लिए समर्थन करते दिखाया गया था।
चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें पता है कि वह अपने विचारों के लिए जवाबदेह होंगी। जब वह कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता थीं, तब उन्होंने भाजपा के साथ-साथ शिवसेना के खिलाफ अपमानजनक बातें की थीं, लेकिन यह शिवसेना में शामिल होने से पहले बहुत पहले की बात है।
विवादित कम्युनिस्ट छात्र नेता कन्हैया कुमार के साथ बेगूसराय में लोगों से वोट की अपील करने वाले जिग्नेश मेवानी ने ट्वीट करते हुए बताया है कि उनके साथ भी इस तरह के हादसे हो चुके हैं और उन्हें राज्य सरकार ने कोई सुरक्षा नहीं दी है।
योगी ने अयोध्या और वाराणसी में मंदिरों के दर्शन को लेकर अपने ट्वीट में कहा, "मेरे आराध्य रामलला, बजरंग बली और महादेवजी के दर्शन को किसी भी प्रकार की राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि आस्था का अधिकार संविधान प्रदत्त है और मुझे इस अधिकार का प्रयोग करने से कोई रोक नहीं सकता।"
अर्नब रॉय दूसरे चरण के मतदान के दिन दोपहर के भोजन के बाद चुनाव ड्यूटी से गायब हो गए। वह EVM और VVPAT के प्रभारी थे। पश्चिम बंगाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जाँच शुरू कर दी है।
राहुल गाँधी ने प्रोपेगेंडा वेबसाइट 'द वायर' की एक वीडियो शेयर की। वीडियो में यह दिखाया गया है कि कुम्भ मेले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन स्वच्छता कार्यकर्ताओं के पैर धोए थे, वो मोदी से असंतुष्ट हैं। उन्हीं लोगों के एक्सक्लुसिव वीडियो सामने आने पर अब हो रही है इनकी 'सोशल धुनाई'!
राहुल गाँधी ने पिछले दिनों एक चुनावी जनसभा में पीएम मोदी को घेरने की कोशिश करते हुए एक बयान में कह दिया कि ‘सारे मोदी चोर हैं’, मगर अफसोस की बात तो ये है कि राहुल घेरने तो निकले थे पीएम मोदी को, मगर इस बयान के बाद वो खुद बुरी तरह से घिर चुके हैं।
इसके अलावा गुरुवार (अप्रैल 18, 2019) को भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव पर जूता फेंकते हुए हमला किया गया। इससे पहले दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी 2014 में रैली के दौरान थप्पड़ पड़ चुका है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा कि उनकी पार्टी मेहनती कार्यकर्ताओं की बजाय गुंडों को तरजीह दिए जाने से वह दुखी हैं। उन्होंने पार्टी के लिए हर तरफ से गालियाँ झेलीं पर यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पार्टी के भीतर ही उन्हें धमकाने वाले मामूली कार्रवाई के भी बिना बच निकलते हैं।