वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ कार्यकर्ता तो केक के लिए मंच पर ही अपने साथियों को धक्का देकर गिरा देते हैं। कुछ अपने एक या दोनों हाथों में केक लेकर भागते हुए भी नज़र आते हैं।
"पाकिस्तान और बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आने के बाद मटुआ समुदाय के लोग भारत में शरणार्थी की तरह रह रहे हैं। हम उन्हें किसी भी सूरत में नागरिकता देकर रहेंगे और ऐसा करने से हमें कोई नहीं रोक सकता है।"
जब ग्रामीणों और परिजनों ने बच्ची को देखा तो वो खून से लथपथ थी और एकदम बदहवास अवस्था में थी। बच्ची ने किसी तरह परिजनों को अपने साथ हुई दरिंदगी के बारे में बताया।
किसानों ने कहा, "हमलोग उन प्रदर्शनकारियों के साथ नहीं हैं।" केंद्रीय मंत्री तोमर के साथ उन्होंने अपने अनुभव साझा कर के बताया कि उन्हें कैसे नए कानूनों से लाभ हो रहा है।
कई खालिस्तानी झंडों के साथ पहुँची भीड़ ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने ही राष्ट्रपति महात्मा गाँधी की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ कर के अपमान किया और फिर तोड़फोड़ भी मचाई।