सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद ईओडब्ल्यू ने जमीन घोटाले की फिर से जाँच शुरू की है। 10 हजार करोड़ रुपए के इस मामले की पहली बार जॉंच शिवराज सरकार के जमाने में हुई थी। सबूत न मिलने पर फाइल बंद कर दी गई थी।
दंगाइयों ने हिंदुओं, उनके शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों, दुकानों, घरों, वाहनों को चुन-चुनकर निशाना बनाया था। पहले से तैयार पेट्रोल बम, गुलेल, ईंट-पत्थर आदि बताते हैं कि यह अचानक नहीं हुआ।
तनवीर और गुलफाम दंगों में शामिल थे। इनके पास से कई मोबाइल फोन मिले हैं जिन्हें जॉंच के लिए फॉरेंसिक विभाग को भेज दिया गया है। इससे पहले अंकित शर्मा की हत्या के मामले में सलमान को गिरफ्तार किया गया था।
“दिल्ली में हुए दंगों की जाँच पड़ताल में सोशल मीडिया में 60 ऐसे अकाउंट मिले हैं जो 22 फरवरी को शुरू हुए और 26 फरवरी को बंद हो गए। अगर ये लोग सोचते हैं कि अकाउंट बंद करके वो बच जाएँगे तो मैं बता दूँ कि वो जहाँ पर भी हैं पुलिस उनको ढूँढ निकालेगी।”
"प्राकृतिक आपदा से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके बाद भी पीड़ित किसानों का दर्द नहीं सुना जा रहा है। मंत्रियों को टाइट करने की जरूरत है। साथ ही उन दो-तीन विधायकों को भी जो खुद को मुख्यमंत्री से भी ऊपर समझ रहे हैं।"
"हत्या करने वाले सभी लोगों को पता था कि अंकित IB में काम करते हैं। साजिश कर उनकी हत्या की गई। पहले घसीटकर ताहिर हुसैन के घर ले गए और फिर 1 दर्जन से भी ज्यादा लोगों ने चाकू से वार किया। तड़पा-तड़पाकर मारा और फिर शव नाले में फेंक दिया।"
मोहम्मद हुसैन की मौत मंगलवार को हुई थी। गुरुवार को उनके कोरोना वायरस से भी संक्रमित होने की पुष्टि हुई। उन्हें हाई ब्लडप्रेशर और अस्थमा जैसी अन्य शिकायतें भी थी। अब यह पता लगाया जा रहा है कि वे कितने लोगों के संपर्क में आए थे।
"कॉन्ग्रेस के समय में दंगे हुए, इन्होंने दंगों को शांत करने का प्रयास किया होगा और हम भी दंगों को शांत करेंगे। परन्तु इसको मेरी पार्टी और विचारधारा पर मढ़ने का प्रयास निंदनीय है, जब हकीकत ये है कि कॉन्ग्रेस के शासन में 76% लोग दंगों में मारे गए हैं।"
युद्ध पर निगरानी रखने वाली एक संस्था ने कहा कि इससे लड़ाई और बढ़ने का खतरा है। पड़ोसी सीरिया में ईरान समर्थित इराकी लड़ाकों को निशाना बनाकर कुछ हवाई हमले किए गए हैं जिनके बारे में संदेह है कि इनके पीछे अमेरिका नीत गठबंधन बलों का हाथ है। बताया जा रहा है कि कम से कम 18 लड़ाके मारे गए हैं।
संस्थान में विषाणु के वास्ते अनुसंधान एवं मेडिकल उपचार विकसित करने में 50 से ज्यादा अनुभवी वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।' नेस जियोना में इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलोजिकल रिसर्च को इजराइल के रक्षा बल विज्ञान कोर के तहत 1952 में स्थापित किया गया था और बाद में वह असैन्य संगठन बन गया। अखबार के मुताबिक तकनीकी तौर पर यह संस्थान प्रधानमंत्री कार्यालय के निगरानी में है,