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राजस्थान की हालत भी ठीक नहीं, मंत्री खुद को राजा समझ रहे: कॉन्ग्रेस MLA का अपनी ही सरकार पर निशाना

मीणा पहले भी सरकार का कामकाज को लेकर सवाल उठा चुके हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अपनी ही सरकार में ही कॉन्ग्रेस के विधायकों का काम नहीं हो रहा। इतना ही नहीं विधायक ने लोकसभा में हार का जिम्मेदार उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ही ठहराया था।

जब से मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार पर संकट शुरू हुआ है तब से ही राजस्थान चर्चा के केंद्र में हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी अपनी उपेक्षा से नाराज हो देर-सबेर ज्योतिरादित्य सिंधिया के रास्ते पर बढ़ सकते हैं। कयासों के बीच प्रदेश में राजनीतिक हलचल भी तेजी है। कॉन्ग्रेस विधायक पीआर मीणा ने सरकार पर सवाल उठाकर प्रदेश की गहलोत सरकार में सब कुछ ठीक नहीं होने के दावों को और हवा दे दी है।

मीणा टोडाभीम से विधायक हैं। गुरुवार को विधानसभा पहुॅंचे मीणा ने कहा कि राजस्थान की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है। मंत्री अपने को राजा समझ रहे। विधायकों की कोई सुन नहीं रहा है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर भी कॉन्ग्रेस के विधायक अरसे से अपनी बातें नहीं सुने जाने का आरोप लगा रहे थे।

अब राजस्थान में भी ऐसे ही स्वर फूटने लगे हैं। मीणा ने प्रदेश सरकार की कार्यपद्धति पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके बाद भी पीड़ित किसानों का दर्द नहीं सुना जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों को टाइट करने की जरूरत है। साथ ही उन दो-तीन विधायकों को भी जो खुद को मुख्यमंत्री से भी ऊपर समझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस हालत से ज्यादातर विधायक नाराज हैं।

मीणा पहले भी सरकार का कामकाज को लेकर सवाल उठा चुके हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अपनी ही सरकार में ही कॉन्ग्रेस के विधायकों का काम नहीं हो रहा। इतना ही नहीं विधायक ने लोकसभा में हार का जिम्मेदार उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ही ठहराया था। इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया था।

गौरतलब है कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार बनने के ही अशोक गहलोत और सचिन पायलट के मतभेद सामने आ गए थे। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर दोनों के समर्थक रोड पर आ गए थे। इसके बाद अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री तो बन गए लेकिन सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री के पद से संतोष करना पड़ा। इसके बाद ऐसे कई मौके आए कि जब दोनों के मतभेद खुलकर जनता के सामने आए। चाहे फिर वह लोकसभा में टिकट बँटवारे का मामला हो या फिर राज्यसभा के उम्मीदवार को लेकर दोनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई। इतना ही नहीं एक बार तो सचिन पायलट अपनी ही सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं।

राजस्‍थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 99 सीटों पर जीत हासिल की थी। सहयोगी और निर्दलीय विधायकों की मदद से कॉन्ग्रेस ने आसानी से बहुमत का जादुई आँकड़ा पार कर लिया था। वहीं BJP को महज 73 सीटे ही मिल पाई थीं। इन दोनों दलों के अलावा बसपा के 6 विधायक जीतकर आए थे। माना जा रहा है कि सचिन पायलट के खेमे के ऐसे 20 विधायक हैं जो गहलोत के रवैए से नाराज हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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