यूपी पुलिस ने लखनऊ के प्रमुख चौराहों पर 57 दंगाइयों के पोस्टर लगाए हैं। दंगाइयों को संपत्ति के नुकसान की वसूली का नोटिस भी दिया गया है। हिंसा फैलाने वाले सभी उपद्रवियों के पोस्टर और बैनर लगाए जाएँगे। जुर्माना नहीं देने पर इनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हिंसा वाले दिन शाह आलम अपने भाई यानी ताहिर हुसैन की छत पर दंगाइयों के साथ मौजूद था। हिंसा भड़काने में उसका बहुत बड़ा हाथ है। वह फरार बताया जा रहा है।
जस्टिस मुरलीधर के तबादले का आदेश 26 फरवरी को जारी किया गया था। इसको दिल्ली दंगों से जोड़ लिबरल गैंग ने प्रोपेगेंडा फैलाया था। अब खुद जस्टिस मुरलीधर ने बताया है कि दिल्ली दंगों से काफी पहले ही उन्होंने तबादले को लेकर सहमति दे दी थी।
"बदकिस्मती से हिंदूफोबिया एक सच है। मैंने कॉन्ग्रेस और राष्ट्रपति उम्मीदवारी के अपने अभियान के दौरान हर बार प्रत्यक्ष तौर पर इसे महसूस किया है। इसके बावजूद हमारे नेता और मीडिया इसे न केवल बर्दाश्त करते हैं, बल्कि इसे और भड़काते हैं।"
दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के पहले ताहिर हुसैन ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में कहा कि वह पूरी तरह निर्दोष है और उसका नार्को टेस्ट करवा लिया जाए, वह नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार है।
इस हिंसा में ना सिर्फ हिन्दुओं को चिह्नित कर मारा गया, बल्कि उनके परिवार के साथ बसलूकी भी की गई, परिवार की महिलाओं और बेटियों के साथ अश्लील हरकत करने से लेकर पवित्र मंदिरों को भी हिंसक मुस्लिम भीड़ ने अपना निशाना बनाया। इन दंगों में एक सबसे बड़ा नाम आम आदमी पार्टी नेता ताहिर हुसैन का भी आया है।
द वायर नामक इस प्रोपोगंडा साइट ने अंकित शर्मा के वीभत्स मर्डर को झुठलाने की न सिर्फ कोशिश की थी बल्कि दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में इस्लामिक भीड़ द्वारा हिन्दुओं पर बरपाए गए कहर को भी नजरअंदाज करने का कुत्सित प्रयास किया था।
जब उसे गिरफ्तार किया गया, उस समय वह संसद के गेट नंबर-8 से प्रवेश कर रहा था। अख्तर खान को बाद में पूछताछ के लिए पुलिस को सौंप दिया गया। उसने कहा कि वह प्रवेश करने से पहले कारतूस बाहर निकलना भूल गया था।
यासिर अराफात ने ABP न्यूज़ चैनल की पत्रकार रुबिका लियाक़त का ट्वीट शेयर किया है। जिसमें भीड़ द्वारा पुलिस पर पत्थर फेंके जा रहे इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है- "लाजवाब, आतंकवादी पिट रहे हैं..."