फैक्ट चेक: नकली है मस्जिद हमले के बाद 350 कीवियों का इस्लाम अपनाने का दावा

थोड़ी सी पड़ताल के बाद ही पता चल गया कि न्यूज़ीलैंड में ऐसे किसी सामूहिक मज़हब-परिवर्तन की खबर नहीं है। यही नहीं, जिस वीडियो का सहारा लिया जा रहा है, वह भी कहीं और का और बहुत पुराना है।

362
350 कीवियों के कलमा पढ़ने की खबर झूठी
वीडियो का उद्गम जिस यूट्यूब चैनल ‘DedicatedMoslem’ को गया था उसके प्लेलिस्ट से भी फिलहाल वह वीडियो गायब है।

सोशल मीडिया पर एक खबर आग की तरह फैली कि न्यूज़ीलैंड में गत सप्ताह हुए नरसंहार के बाद 350 न्यूज़ीलैंड निवासियों ने कलमा पढ़ इस्लाम कबूल लिया है। सबूत के तौर पर ढाई मिनट का एक वीडियो भी प्रसारित हो रहा था। इसे कई व्हाट्सप्प ग्रुप और सोशल मीडिया में यह कहकर प्रचारित किया गया कि इस्लाम को लोग पसंद कर रहे हैं और हमले के बाद लोगों की रुचि इसमें बढ़ी है।

पर मीडिया में जल्दी ही इसका खण्डन भी प्रसारित होने लगा। थोड़ी सी पड़ताल के बाद ही पता चल गया कि न्यूज़ीलैंड में ऐसे किसी सामूहिक मज़हब-परिवर्तन की खबर नहीं है। यही नहीं, जिस वीडियो का सहारा लिया जा रहा है, वह भी कहीं और का और बहुत पुराना है।

संख्या, तारीख, देश: सब कुछ फ़ेक

उस वीडियो के उद्गम का पीछा करते-करते मीडिया जब यूट्यूब खँगालने लगा तो पता चला कि वह वीडियो न्यूज़ीलैंड नहीं जर्मनी का है और वह भी 12 साल पुराना (वीडियो की अपलोड की तारीख यूट्यूब पर 25 अगस्त, 2007 पड़ी हुई थी)।

यही नहीं, प्रोपेगैंडा वीडियो में जहाँ 350 लोगों के कलमा पढ़ने की बात थी, वहीं असली वीडियो में केवल 5 जर्मन नागरिकों के इस्लाम कबूल करने का दावा किया गया था।

मूल वीडियो का स्क्रीनशॉट जहाँ इसकी पुरानी तारीख बताई गई है। अब इस पेज से ओरिजिनल वीडियो को हटा दिया गया है।

शाहिद सिद्दीकी ने किया रीट्वीट, फिर डिलीट

उस फ़ेक न्यूज पर आधारित एक ट्वीट को वरिष्ठ पत्रकार, उर्दू साप्ताहिक ‘नई दुनिया’ के संपादक, व पूर्व राज्यसभा सदस्य शाहिद सिद्दीकी ने भी रीट्वीट कर खबर पर खुशी जाहिर की। बाद में हमने उनका वह ट्वीट ढूँढ़ने का प्रयास किया तो वह कहीं मिला नहीं, यानी उन्होंने उसे बाद में डिलीट कर दिया था।

उनका यह ट्वीट अब उपलब्ध नहीं है

उनके अलावा नकीब न्यूज़ नामक एक वेबसाइट ने भी इस खबर को चलाया है

मूल चैनल से भी गायब  

उस वीडियो का उद्गम मीडिया रिपोर्ट्स में जिस यूट्यूब चैनल ‘DedicatedMoslem’ को बताया जा रहा था (चैनल की पहचान गाजा-समर्थक प्रोफ़ाइल पिक्चर से हुई), उसके यूट्यूब प्लेलिस्ट से भी फिलहाल वह वीडियो गायब है। सरसरी निगाह डालने पर ये चैनल इस्लाम के प्रचार से जुड़ा प्रतीत होता है।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here