Fact Check: कश्मीरी मुसलमानों के नाम पर रॉयटर्स फैला रही फ़ेक ख़बर

पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले से जहाँ एक तरफ देश में आक्रोश का माहौल है, वहीं कुछ ऐसी ख़बरें भी सामने आ रही हैं जिसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है। अफ़वाह फैलाने जैसी ख़बरों को कई बार सच मान लिया जाता है, जिसके परिणाम भयंकर भी हो जाते हैं।

पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले से जहाँ एक तरफ देश में आक्रोश का माहौल है, वहीं कुछ ऐसी ख़बरें भी सामने आ रही हैं जिसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है। अफ़वाह फैलाने जैसी ख़बरों को कई बार सच मान लिया जाता है, जिसके परिणाम भयंकर भी हो जाते हैं। ऐसी ही एक ख़बर रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी ने अपनी वेबसाइट पर ‘Kashmiri Muslim evicted, threatened after deadly attack on indian forces’ शीर्षक से लिखी है।

रॉयटर्स जैसी बड़ी और अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी कैसे ख़बरों के साथ फ़र्ज़ीवाड़ा करती है, इसे नीचे के दो स्क्रीनशॉट के माध्यम से समझा जा सकता है। भारत की एक न्यूज़ एजेंसी में काम कर रहे हमारे एक साथी (नाम न छापने की शर्त पर) ने रॉयटर्स की इसी गंदगी का पर्दाफाश किया है।

भारतीय न्यूज़ एजेंसी में काम कर रहे हमारे एक साथी द्वारा शेयर किया गया चैट

भारतीय न्यूज़ एजेंसी में काम कर रहे हमारे एक साथी द्वारा शेयर किया गया चैट

रॉयटर्स ने अपनी इस ख़बर में पुलवामा में हुए हमले के बारे में तो बताया ही साथ में हरियाणा और उत्तराखंड के कश्मीरी मुस्लिमों के प्रति अपने इस फ़र्ज़ी दर्द को भी उजागर किया कि वो किस तरह की साम्प्रदायिक स्थिति का सामना कर रहे हैं।

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रॉयटर्स ने इस ख़बर में जिन-जिन जगहों और व्यक्ति-विशेष का उदाहरण दिया है वो या तो झूठ है या फिर उन लोगों ने सही में भारतीय कानून को ताक पर रख कर जुर्म किया था। पुलवामा जैसे आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर देशद्रोही पोस्ट लिखना अमानवीय और गैर-कानूनी भी है।

रॉयटर्स की यह ख़बर पूरी तरह से झूठी है। इस तरह की ख़बरे लोगों को भड़काने और बेवजह परेशान करने के लिए लिखी जाती हैं।


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