पाकिस्तान का झूठ पकड़ा गया, चला रहा था कश्मीर पुलिस के हाथों CRPF जवानों की हत्या का फेक न्यूज़

यह पाकिस्तान और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की साइबर युद्धनीति का हिस्सा है, जिससे हिंदुस्तान में, और खासकर सुरक्षा बलों में, तनाव भड़का कर शांति भंग किया जा सके।

पाकिस्तानी पत्रकार-कम-प्रोपेगंडाबाज़ वजाहत एस खान के ट्विटर हैंडल से झूठा प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा है कि कश्मीर पुलिस के मुसलमान कर्मी ने CRPF जवानों की गोली मारकर हत्या कर दी है।

इस प्रोपेगंडा के खिलाफ न केवल कश्मीर के पूर्व डीजीपी ने मीडिया से बात करते हुए इसे झूठा बताया, बल्कि CRPF के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी इसका खंडन किया गया है।

यहीं नहीं, CRPF ने बयान जारी कर साफ़ किया कि कश्मीर में काम कर रहीं विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच सौहार्द और तालमेल की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा कश्मीर मामलों के जानकार माने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल ने भी इस फ़र्ज़ी न्यूज़ के पीछे ISI और पाकिस्तानी सेना की प्रोपेगंडा-विंग ISPR (इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशन्स) का हाथ होने का दावा किया है।

ISI की साइबर युद्धनीति का हिस्सा

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मीडिया खबरों के अनुसार यह पाकिस्तान और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की साइबर युद्धनीति का हिस्सा है, जिससे हिंदुस्तान में, और खासकर सुरक्षा बलों में, तनाव भड़का कर शांति भंग किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि चूँकि जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद से हिंसा भड़काने के पाकिस्तान के सभी प्रयास नाकाम हो रहे हैं, इसलिए हताशा में यह कदम उठाया गया है। उसे कोई अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल रहा, हिंदुस्तान से व्यापारिक रिश्ते तोड़ लेने का खमियाज़ा भी पाकिस्तान को ही अपने यहाँ बेकाबू हो रही महँगाई के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

कौन हैं वजाहत खान?

अपने फेसबुक बायो के अनुसार यह प्रोपेगंडा फ़ैलाने वाला वजाहत खान पाकिस्तान का इकलौता एम्मी अवॉर्ड के लिए नामित पत्रकार है। इसके अलावा वह न केवल पाकिस्तान के ‘दुनिया न्यूज़’ के लिए काम करता है, बल्कि Times Of London और अमेरिका के NBC News से भी जुड़ा हुआ है। इसके अलावा वह अतीत में CNN और BBC जैसे मीडिया संस्थानों के लिए भी काम कर चुका है।

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