Thursday, October 29, 2020
Home देश-समाज जब मस्जिदों से लगे नारे- ज़लज़ला आ गया है कुफ़्र के मैदान में, लो...

जब मस्जिदों से लगे नारे- ज़लज़ला आ गया है कुफ़्र के मैदान में, लो मुजाहिद आ गए हैं मैदान में

19 जनवरी को जनसंहार के विरोध में हर साल जंतर-मंतर पर होलोकास्ट डे मनाया जाता है। दिल्ली-एनसीआर के सैकड़ों कश्मीरी पंडित यहां जुटते हैं और अपना दर्द बयाँ करते हैं। वह दुनिया को बताते हैं कि आखिर उस रात धरती का जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ कैसा अत्याचार हुआ।

कश्मीर घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए 19 जनवरी प्रलय का दिन माना जाता है, क्योंकि वर्ष 1990 में हालात बिगड़ने के कारण इसी तारीख में कश्मीरी पंडित समुदाय ने कश्मीर घाटी से पलायन करना शुरू कर दिया था। मई 1990 तक करीब पाँच लाख कश्मीरी पंडित जान बचाने के लिए अपनी मातृभूमि को छोड़ कश्मीर से पलायन कर चुके थे, जो स्वतंत्रता के बाद भारत का सबसे बड़ा पलायन माना जाता है। इसी के चलते हर वर्ष 19 जनवरी को जहां कहीं भी कश्मीरी पंडित रहते हैं, वहाँ वह इस तारीख को ‘होलोकॉस्ट/एक्सोडस डे’ (प्रलय/बड़ी संख्या में पलायन की तारीख) के तौर पर मनाते हैं।

देश-दुनिया में बसे विस्थापित कश्मीरी पंडितों के संगठन कश्मीर में वापसी के लिए 30 साल से आंदोलनरत हैं। उन्होंने सरकार से इस दिशा में सकारात्मक क़दम उठाने की माँग की। कश्मीर समिति दिल्ली के अध्यक्ष समीर चंगू का कहना है कि हमारा तो सबकुछ लुट गया। परिवार-रिश्तेदार और पड़ोसी सब। पीड़ा तो थी ही ज़बरदस्त गुस्सा भी था। लेकिन, हम उनकी तरह जवाब नहीं दे सकते थे। हमने कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया। हमेशा संविधान के दायरे में रहकर ही बात की।

कश्मीरी समिति दिल्ली का इतिहास कश्मीरी सहायक समिति के तौर पर आज़ादी के कुछ साल बाद का है। एमएन कौल और हृदय नाथ कुंजरू भी इससे जुड़े हुए थे। ऑल इंडिया कश्मीरी समाज इसी संगठन से निकला है। संगठन कोशुर समाचार नाम से मासिक पत्रिका भी निकालता है।

19 जनवरी को जनसंहार के विरोध में हर साल जंतर-मंतर पर होलोकॉस्ट डे मनाया जाता है। दिल्ली-एनसीआर के सैकड़ों कश्मीरी पंडित यहाँ जुटते हैं और अपना दर्द बयाँ करते हैं। वह दुनिया को बताते हैं कि आखिर उस रात धरती का जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ कैसा अत्याचार हुआ।

यह स्मरण रहे कि सन ’65 का युद्ध जम्मू कश्मीर राज्य को पूरी तरह पाकिस्तान में मिलाने के उद्देश्य से लड़ा गया था किंतु पाकिस्तान इस उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया था क्योंकि तब तक कश्मीर में पाकिस्तान परस्ती और अलगाववाद का बीज नहीं बोया जा सका था। इसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अगस्त 1965 में अमानुल्लाह खान और मकबूल बट ने पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर में ‘नेशनल लिबरेशन फ्रंट’ नामक अलगाववादी आतंकी संगठन बनाया था।

इस संगठन ने जून 1966 में मकबूल बट को ट्रेनिंग देकर नियन्त्रण रेखा के इस पार भेजा। छह सप्ताह बाद ही पुलिस से हुई एक मुठभेड़ में मकबूल बट ने सी० आई० डी० सब इंस्पेक्टर अमर चंद की हत्या कर दी। दो वर्ष बाद अगस्त 1968 में मकबूल बट को तत्कालीन सेशन जज नीलकंठ गंजू ने फाँसी की सजा सुनाई। किन्तु उसी वर्ष दिसम्बर में मकबूल बट अपने एक साथी के साथ जेल तोड़कर नियन्त्रण रेखा के उस पार भाग गया। वह 1976 में लौटा और इस बार उसने कुपवाड़ा में बैंक डकैती का असफल प्रयास किया और पकड़ा गया।

डकैती के प्रयास में उसने बैंक मैनेजर की हत्या की जिसके लिए उसे पुनः फाँसी की सजा हुई। मकबूल बट के पकड़े जाने के बाद उसके साथी आतंकवादी इंग्लैंड चले गये जहाँ उन्होंने 1977 में ‘जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’ (JKLF) नामक संगठन बनाया। इसी संगठन से संबद्ध ‘नेशनल लिबरेशन आर्मी’ ने मकबूल बट को जेल से छुड़ाने के लिए फरवरी 1984 में भारतीय उच्चायुक्त रवीन्द्र म्हात्रे का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी। इस घटना के पश्चात प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने तत्काल मकबूल बट को तिहाड़ जेल में फाँसी दे दी थी।

मकबूल बट को फाँसी दिए जाने के बाद के घटनाक्रम

सन 1984 में जिस दिन मकबूल बट को फाँसी दी गई थी उस दिन कश्मीर घाटी के लोगों पर इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा था। जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट की स्थापना को अभी एक दशक भी पूरा नहीं हुआ था। इस संगठन को अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते घाटी के लोगों में अपनी पैठ बनाने की आवश्यकता महसूस हुई। मकबूल बट को फाँसी दिए जाने के दो वर्ष पश्चात् सन 1986 में फारुख अब्दुल्लाह को हटाकर गुलाम मोहम्मद शाह जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री बनाये गए।

शाह ने अलगाववादियों के सुर में सुर मिलाते हुए जम्मू स्थित न्यू सिविल सेक्रेटेरिएट एरिया में एक प्राचीन मन्दिर परिसर के भीतर मस्जिद बनाने की अनुमति दे दी ताकि मुस्लिम कर्मचारी नमाज पढ़ सकें। इस विचित्र निर्णय के विरुद्ध जम्मू के लोग सड़क पर उतर आये जिसके फलस्वरूप दंगे भड़क गये। अनंतनाग में पंडितों पर भीषण अत्याचार किया गया, उन्हें बेरहमी से मारा गया, महिलाओं से बलात्कार किया गया और उनकी संपत्ति व मकान तोड़ डाले गये। सन 1987 से जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट की गतिविधियों में तेजी आई।

बाद के सालों में अलगाववादियों की दुष्प्रचार मशीनरी ने एक सुनियोजित षड्यंत्र रचकर पंडितों के विरुद्ध वैमनस्य फैलाना प्रारंभ कर दिया। यही कारण था कि जिस मकबूल बट को 1984 में कोई जानता नहीं था फरवरी 1989 में उसका ‘शहादत दिवस’ मनाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आये थे। विश्वभर में सलमान रुश्दी की पुस्तक ‘सैटेनिक वर्सेज़’ का विरोध चरम पर था जिसकी आग कश्मीर तक भी पहुँची। परिणामस्वरूप 13 फरवरी को श्रीनगर में दंगे हुए जिसमें कश्मीरी पंडितों को बेरहमी से मारा गया।

पंडित टिकालाल टपलू और जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या का उद्देश्य

पं० टिकालाल टपलू पेशे से वकील और जम्मू कश्मीर बीजेपी के अध्यक्ष थे। पं० टपलू आरंभ से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे तथा उदारमना व्यक्ति थे। पं० टपलू ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई की थी परंतु पैसे कमाने के लिए उन्होंने इस पेशे का कभी दुरुपयोग नहीं किया। वकालत से वे जो कुछ भी कमाते उसे विधवाओं और उनके बच्चों के कल्याण हेतु दान दे देते थे। उन्होंने कई मुस्लिम लड़कियों की शादियाँ भी करवाई थीं। पूरे हब्बाकदल निर्वाचन क्षेत्र में हिन्दू मुसलमान सभी पं टपलू का सम्मान करते थे तथा उन्हें ‘लाला’ अर्थात बड़ा भाई कह कर सम्बोधित करते थे।

उनकी यह छवि अलगाववादी गुटों की आँखों का काँटा थी क्योंकि पं० टिकालाल टपलू उस समय कश्मीरी पंडितों के सर्वमान्य और सबसे बड़े नेता थे। वास्तव में अलगाववादियों को घाटी में अपनी राजनैतिक पैठ बनाने के लिए कश्मीरी पंडितों के समुदाय को हटाना जरुरी था जो किसी भी कीमत पर पाकिस्तान का समर्थन नहीं करते। इसीलिए जम्मू कश्मीर लिबेरशन फ्रंट ने पंडितों के विरुद्ध दुष्प्रचार के विविध हथकंडे अपनाये। कश्मीर घाटी के कुछ लोकल अखबारों ने पंडित टिकालाल टपलू और जस्टिस नीलकंठ गंजू समेत कई प्रतिष्ठित पंडितों के विरुद्ध दुष्प्रचार सामग्री प्रकाशित करना आरंभ कर दिया था।

आतंकियों ने पं० टपलू और जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या की रणनीति बनाई। पं० टपलू को आभास हो चुका था कि उनकी हत्या का प्रयास हो सकता है इसीलिए उन्होंने अपने परिवार को सुरक्षित दिल्ली पहुँचा दिया और 8 सितम्बर 1989 को कश्मीर लौट आये। चार दिन बाद चिंक्राल मोहल्ले में स्थित उनके आवास पर हमला किया गया। यह हमला उन्हें सचेत करने के लिए था किंतु वे भागे नहीं और डटे रहे। महज दो दिन बाद 14 सितम्बर को सुबह पं० टिकालाल टपलू अपने आवास से बाहर निकले तो उन्होंने पड़ोसी की बच्ची को रोते हुए देखा। पूछने पर उसकी माँ ने बताया कि स्कूल में कोई फंक्शन है और बच्ची के पास पैसे नहीं हैं।

पं० टपलू ने बच्ची को गोद में उठाया, उसे पाँच रुपये दिए और पुचकार कर चुप करा दिया। इसके बाद उन्होंने सड़क पर कुछ कदम ही आगे बढ़ाये होंगे कि आतंकवादियों ने उनकी छाती कलाशनिकोव की गोलियों से छलनी कर दी। सन 1989-90 के दौरान कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन करने पर मजबूर करने के लिए की गयी यह पहली हत्या थी। पंडितों के सर्वमान्य नेता को मार कर अलगाववादियों ने स्पष्ट संकेत दे दिया था कि अब कश्मीर घाटी में ‘निज़ाम-ए-मुस्तफ़ा’ ही चलेगा।

टिकालाल टपलू की हत्या के बाद काशीनाथ पंडिता ने कश्मीर टाइम्स में एक लेख लिखा और अलगाववादियों से पूछा कि वे आखिर चाहते क्या हैं। अगले दिन इसका जवाब जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने यह लिख कर दिया कि या तो कश्मीरी पंडित भारत राज्य को समर्थन देना बंद करें और अलगाववादी आन्दोलन का साथ दें अथवा कश्मीर छोड़ दें।

पं टपलू की हत्या के मात्र सात सप्ताह बाद जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गयी। सन 1989 तक पं० नीलकंठ गंजू- जिन्होंने मकबूल बट को फांसी की सजा सुनाई थी- हाई कोर्ट के जज बन चुके थे। वे 4 नवंबर 1989 को दिल्ली से लौटे थे और उसी दिन श्रीनगर के हरि सिंह हाई स्ट्रीट मार्केट के समीप स्थित उच्च न्यायालय के पास ही आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी थी। इस वारदात से डर कर आसपास के दूकानदार और पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए और खून से लथपथ जस्टिस गंजू के पास दो घंटे तक कोई नहीं आया।

कुछ दिनों बाद अमिराकदल के पास स्थानीय लड़के जस्टिस गंजू की हत्या का जश्न मनाते दिखाई दिए। आतंकियों ने जस्टिस गंजू से मकबूल बट की फाँसी का प्रतिशोध लिया था। साथ ही मस्जिदों से लगते नारों ने कश्मीर के लोगों को यह भी बता दिया था कि ‘ज़लज़ला आ गया है कुफ़्र के मैदान में, लो मुजाहिद आ गये हैं मैदान में।’ अर्थात अब अलगाववादियों के अंदर भारतीय न्याय, शासन और दंड प्रणाली का भय नहीं रह गया था।

पं० टिकालाल टपलू और जस्टिस गंजू की हत्या के बाद भी कई कश्मीरी पंडितों को मारा गया परन्तु तत्कालीन मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्लाह कोरा दिलासा मात्र देते रहे और मार्तण्ड सूर्य मन्दिर के भग्नावशेष पर सांस्कृतिक कार्यक्रम कराते रहे।   

दिसंबर 8, 1989 को मुफ़्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण के बाद पंद्रह दिनों तक ड्रामा चला था जिसके बाद वी पी सिंह सरकार द्वारा अब्दुल हमीद शेख़, शेर खान, नूर मोहम्मद कलवल, अल्ताफ अहमद और जावेद अहमद जरगर नामक आतंकियों को जेल से छोड़ा गया था। चौदह साल बाद जेकेएलएफ के जावेद मीर ने रुबैया सईद के अपहरण की बात कबूल की थी। अगले साल जनवरी 25 जनवरी 1990 को जेकेएलएफ ने भारतीय वायु सेना के पाँच अधिकारियों की हत्या कर दी थी। खुद यासीन मलिक ने भी बीबीसी को दिए इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि उसने ड्यूटी पर जा रहे 40 वायुसैनिकों पर गोलियाँ चलाई थीं। यासीन मलिक और जेकेएलएफ को आज भी उनके किए की सज़ा नहीं मिल पाई है। हाँ, आज यह खबर आई कि सीबीआई ने वो केस फिर से खोला है।

जम्मू-कश्मीर में इस ‘साहसिक’ कदम के लिए अमेरिकी कॉन्ग्रेस के सांसद ने की मोदी की सराहना

जम्मू-कश्मीर हमारा मामला, हम चीन के मामले में नहीं बोलते, वह भी चुप रहे: भारत का करारा जवाब

‘गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग हिंदुस्तानी नागरिक, पाकिस्तान का खिलौना था अनुच्छेद-370’


  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अर्नब पर कानूनी, आर्थिक, मानसिक रूप से अटैक के लिए दाउद कर रहा प्रबंध, हो सकता है शारीरिक हमला: पूर्व ब्यूरोक्रेट RVS मणि

मुंबई अंडरवर्ल्ड द्वारा संगठित क्रिमिनल सिंडिकेट की गलत नब्ज को छुआ है जिसे वैश्विक स्तर पर ड्रग सरगना और आतंकी दाऊद इब्राहिम, कई राजनेताओं, ड्रग व बॉलीवुड नेक्सस द्वारा संचालित किया जाता है।

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुझे पोर्न दिखाया, गंदे सवाल किए, अंगों को ले कर अश्लील गालियाँ दी: साध्वी प्रज्ञा

भगवा आतंक के नाम पर पुलिस बर्बरता झेल चुकी साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि जब जब उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ।

पिता MP, पति DM, खुद SP: मुंगेर की ‘जनरल डायर’, जिस पर लगा था पुलिस के काम के लिए नेता की गाड़ी के इस्तेमाल...

अगस्त 2019 में लिपि सिंह पर आरोप लगा था कि वो दिल्ली के साकेत कोर्ट में अनंत सिंह के लिए जब ट्रांजिट रिमांड लेने गई थीं, तो उन्होंने जदयू नेता की गाड़ी का इस्तेमाल किया था।

सरकारी बूटों तले रौंदी गई हिन्दुओं की परम्परा, गोलियाँ चलीं, कहारों के कंधों के बजाय ट्रैक्टर, जेसीबी से हुआ विसर्जन

इस बार परम्पराओं और मान्यताओं को सरकारी बूटों तले रौंदने के बाद बिना आरती इत्यादि के ही दूसरी देवियों के बाद बड़ी दुर्गा को विसर्जित किया गया।

अलवर: मेम चंद को बनाया मोहम्मद अनस, फिर दी जान से मारने की धमकी- दलित परिवार पहुँचा कोर्ट

मेम चंद ने आरोप लगाया कि 15 अन्य लोग उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराने के लिए उन्हें हरियाणा ले गए। वहाँ उनका खतना भी कराया गया। उसके बाद रहने के लिए जमीन दी।

छत्तीसगढ़: माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन में कलीम खान के नेतृत्व में पुलिस ने श्रद्धालुओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

भक्तों के लाख गुहार लगाने के बावजूद पुलिस ने डीजे गाड़ी नहीं छोड़ी। इससे श्रद्धालु आक्रोशित हो गए और उनकी पुलिस के साथ कहासुनी शुरू हो गई।

प्रचलित ख़बरें

मुंगेर: वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी ने SP लिपि सिंह को याद दिलाए नियम, कहा- चेतावनी व आँसू गैस का था विकल्प

वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी ने नियम समझाते हुए कहा कि पुलिस को गोली चलाने से पहले चेतावनी देनी चाहिए, या फिर आँसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना चाहिए।

पिता MP, पति DM, खुद SP: मुंगेर की ‘जनरल डायर’, जिस पर लगा था पुलिस के काम के लिए नेता की गाड़ी के इस्तेमाल...

अगस्त 2019 में लिपि सिंह पर आरोप लगा था कि वो दिल्ली के साकेत कोर्ट में अनंत सिंह के लिए जब ट्रांजिट रिमांड लेने गई थीं, तो उन्होंने जदयू नेता की गाड़ी का इस्तेमाल किया था।

‘हमारा मजहब कबूल कर के मेरे बेटे की हो जाओ’: तौसीफ की अम्मी ने भी बनाया था निकिता पर धर्म परिवर्तन का दबाव

"तुम हमारा मजहब कबूल कर लो और मेरे बेटे की हो जाओ। अब तुमसे कौन शादी करेगा। तुम्हारा अपहरण भी हो गया है और अब तुम्हारा क्या होगा।"

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुझे पोर्न दिखाया, गंदे सवाल किए, अंगों को ले कर अश्लील गालियाँ दी: साध्वी प्रज्ञा

भगवा आतंक के नाम पर पुलिस बर्बरता झेल चुकी साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि जब जब उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ।

मुंगेर हत्याकांड: एसपी लिपि सिंह के निलंबन की खबरों के बीच मुंगेर पुलिस की ‘ट्विटर आईडी’ रातों-रात डीएक्टिवेट

अलग-अलग स्रोतों से आ रही खबरों के अनुसार चार लोगों के मरने की खबरें भी आ रही हैं, जबकि आधिकारिक तौर पर एक की ही मृत्यु बताई गई है।

दोहा एयरपोर्ट पर महिला यात्रियों की उतरवाई गई पैंट, प्राइवेट पार्ट्स छूकर जाँच करने के आदेश से विवाद

दोहा एयरपोर्ट पर महिला यात्रियों से पैंट उतारकर उनके प्राइवेट पार्ट्स की जाँच का आदेश दिया गया। उनसे कहा गया कि उनकी योनि छूकर जाँच की जाएगी।
- विज्ञापन -

अर्नब पर कानूनी, आर्थिक, मानसिक रूप से अटैक के लिए दाउद कर रहा प्रबंध, हो सकता है शारीरिक हमला: पूर्व ब्यूरोक्रेट RVS मणि

मुंबई अंडरवर्ल्ड द्वारा संगठित क्रिमिनल सिंडिकेट की गलत नब्ज को छुआ है जिसे वैश्विक स्तर पर ड्रग सरगना और आतंकी दाऊद इब्राहिम, कई राजनेताओं, ड्रग व बॉलीवुड नेक्सस द्वारा संचालित किया जाता है।

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुझे पोर्न दिखाया, गंदे सवाल किए, अंगों को ले कर अश्लील गालियाँ दी: साध्वी प्रज्ञा

भगवा आतंक के नाम पर पुलिस बर्बरता झेल चुकी साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि जब जब उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ।

तू कौन? मैं ख़ामख़ा: इमरान खान ने पूरे मुस्लिम समुदाय को लिखी चिट्ठी, कहाँ पहुँची, पता नहीं

इमरान खान ने मुस्लिम देशों के सामने अपनी अपील रखते हुए यूरोपीय लीडरशिप पर सवाल उठाया और लिखा कि यूरोप की लीडरशिप ये समझने में असमर्थ है।

‘अपना नाम विद्ड्रॉ करो जाकर’: दिग्विजय सिंह ने पार्षदी का लालच देकर सपा प्रत्याशी रौशन मिर्जा को किया फोन, ऑडियो लीक

"तुम जानते हो चुनाव कैसा होता है, क्यों होता है? तुम क्यों बेमतलब चुनाव लड़ रहे हो। नाम वापस लो। जो भी होगा, तुम्हारा ख्याल हम रखेंगे।"

पकड़ी गई ‘लुटेरी दुल्हन’ नजमा शेख उर्फ नेहा पाटिल: 4 युवकों से शादी कर हड़पी थी मोटी रकम, तलाश रही थी 5वाँ शिकार

साजिश के तहत ससुराल जाते ही नजमा शेख वहाँ रखे रुपए और गहनों को बटोर कर फरार हो जाती थी। फरार होने के बाद वो मुंबई पहुँच जाती थी।

गौहत्या करने वालों को हर हाल में भेजा जाएगा जेल, हम गौ माता की रक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे: CM योगी

"अगर कोई गौकशी करेगा तो सरकार कानून के दायरे में उसे जेल में ठूसने का काम भी करेगी। हम गौ माता की रक्षा के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने देंगे।"

‘हम मूलनिवासी-आदिवासी, राम का पुतला जला रहे हैं क्योंकि रावण ज्यादा तपस्वी था’: 4 युवक गिरफ्तार

भगवान राम का पुतला जलाते हुए खुदको मूलनिवासी बता रहे युवकों का कहना था कि रावण बहुत तपस्वी था और राम जो भी था वह रावण से कम तपस्वी था।

पिता MP, पति DM, खुद SP: मुंगेर की ‘जनरल डायर’, जिस पर लगा था पुलिस के काम के लिए नेता की गाड़ी के इस्तेमाल...

अगस्त 2019 में लिपि सिंह पर आरोप लगा था कि वो दिल्ली के साकेत कोर्ट में अनंत सिंह के लिए जब ट्रांजिट रिमांड लेने गई थीं, तो उन्होंने जदयू नेता की गाड़ी का इस्तेमाल किया था।

निकिता मर्डर केस में 2018 से होगी जाँच, आरोपित तौसीफ कॉन्ग्रेस नेताओं का रिश्तेदार, किसी हालत में बख्शेंगे नहीं: अनिल विज

“मैं एक बात साफ बता देना चाहता हूँ कि ये दबंगई नहीं चलने दूँगा। मैं सिसक-सिसक कर लड़कियों को मरने नहीं दूँगा। जो भी कड़ी से कड़ी सजा हो सकती होगी, वो दी जाएगी।"

10 जगहों पर NIA की रेड: हुर्रियत नेता युसूफ सोफी, एक्टिविस्ट खुर्रम परवेज, ग्रेटर कश्मीर के कार्यालय सहित 2 NGO भी जद में

एनआईए की टीम एनजीओ में हो रहे रूपयों के हेरफेर का पता लगाने के लिए नया मामला दर्ज किया है। इसके तहत एनआईए रूपयों के सोर्स, खर्च का पता लगाएगी।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
79,380FollowersFollow
340,000SubscribersSubscribe