राहुल गाँधी भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक अस्थिरता के शिकार: विकीलीक्स की बात आज भी प्रासंगिक

वरिष्ठ पत्रकार और राजीव गाँधी के मित्र सईद नक़वी ने 2005 में ही कहा था कि राहुल गाँधी ‘पर्सनालिटी प्रॉब्लम’ से ग्रसित हैं, जिसकी वजह से वह भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक अस्थिरता के शिकार हैं। यह उनके प्रधानमंत्री न बनने के लिए पर्याप्त कारण है। 14 सालों में कुछ भी बदलता नहीं दिखता।

राहुल गाँधी आजकल जिस तरह के ‘ख़ुलासे’ कर रहे हैं, उस हिसाब से उनकी मानसिक अवस्था पर बहुतों को ‘दोबारा’ संदेह होने लगा है। हाल ही कि बात है जब उन्होंने मनोहर पर्रीकर के घर अचानक पहुँच कर उनका हाल-चाल पूछा और मीडिया में आकर उन्हें राफ़ेल की चर्चा में खींच लिया। इस पर गोवा मुख्यमंत्री ने एक बयान जारी करके उन्हें समझाया कि इस तरह की हरकत अशोभनीय और निम्न स्तर की है।

हालाँकि, जो लोग राहुल गाँधी को सुनते-पढ़ते रहते हैं उनके लिए यह कोई नई बात नहीं थी। राहुल गाँधी को मानसिक रूप से बालक मानकर कई लोग ख़ारिज कर चुके हैं क्योंकि उन्होंने आलू से सोना बनाने से लेकर राफ़ेल के कम से कम पाँच दाम तो बताए ही हैं।

इसी सन्दर्भ में 5 साल पहले विकीलीक्स के एक केबल में उनके पिता राजीव गाँधी के मित्र रह चुके वरिष्ठ पत्रकार सईद नक़वी का कथन याद आ जाता है, और हम सोचने लगते हैं कि 14 सालों के बाद भी उनकी मानसिक स्थिति में बहुत ज़्यादा सकारात्मक परिवर्तन नहीं आया है।

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विकीलीक्स के एक केबल के अनुसार,राजनीतिक गलियारों में अच्छी पहुँच रखने वाले, गाँधी परिवार के बेहद क़रीबी, राजीव गाँधी के दोस्त, वरिष्ठ पत्रकार सईद नक़वी ने एक बातचीत में कई चौकाने वाली बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जब सोनिया गाँधी ने राहुल को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया तो उन्हें ख़ुशी हुई लेकिन जल्दी ही सोनिया के कुछ बेहद क़रीबी लोगों से बातचीत के आधार पर नक़वी ने कहा कि राहुल गाँधी कई कारणों से कभी भी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। नक़वी ने सबसे बड़ी वजह बताई कि राहुल गाँधी ‘पर्सनालिटी प्रॉब्लम’ से ग्रसित हैं, जिसकी वजह से वह भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक अस्थिरता के शिकार हैं और यह उनके प्रधानमंत्री न बनने के लिए पर्याप्त कारण है।

विकीलीक्स केबल का स्क्रीनशॉट

नक़वी ने यह भी कहा कि उसके कॉन्ग्रेस सूत्रों के अनुसार राहुल गाँधी के बारे में कहा जाता है कि वो अमेठी सांसद के रूप में पूरी तरह असफल रहे हैं। कॉन्ग्रेस की आशा थी कि राहुल गाँधी के दम पर वो उत्तर प्रदेश में पार्टी में नई जान डालेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और पार्टी ने हाथ खड़े कर लिए। उनका मानना था कि ‘राहुल गाँधी पार्टी को फ़ायदे से ज़्यादा हानि ही पहुँचा रहे हैं।’ साथ ही, राज्यों की कॉन्ग्रेस  ईकाइयों में उनके आने से उद्देश्य के उलट नुकसान हो जाता है।

आगे केबल में दावा किया गया है कि राहुल गाँधी की इस तरह की कैंपेनिंग के कारण कार्यकर्ताओं में निराशा भर गई कि उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और उनकी समाजवादी पार्टी को पछाड़कर  कॉन्ग्रेस कभी भी सत्ता नहीं पा सकेगी।

केबल का स्क्रीनशॉट

उन्होंने दावा किया कि गाँधी वंशवादी राजनीति का कोई भविष्य नहीं था क्योंकि गाँधी परिवार के पास प्रधानमन्त्री पद का कोई ऐसा उम्मीदवार नहीं है, जिसके पास प्रधानमंत्री का उम्मीदवार होने का “जरुरी करिश्मा” हो। उन्होंने कहा था कि इंदिरा गांधी इस वंश की अंतिम ऐसी प्रभावी सदस्य थीं जो पास प्रधानमंत्री पद के लिए सक्षम और योग्य थी। और अगर उनकी हत्या नहीं होती तो राजीव गाँधी कभी चुनाव नहीं जीत पाते। नक़वी ने कहा कि कॉन्ग्रेस सदस्यों का आम मत यही है कि राहुल गाँधी की राजनीतिक क्षमता राजीव गाँधी से भी बहुत काम है।

नक़वी ने कहा कि गाँधी परिवार हमेशा चाहता था कि राहुल गाँधी की बहन प्रियंका गाँधी राजनीति में प्रवेश करे, क्योंकि वह होनहार और समझदार मानी जाती थी। सोनिया गाँधी एक ‘इतालवी माँ’ हैं, और “एक भारतीय माँ” की तरह ही अपने बेटे राहुल गाँधी को लेकर एक सुरक्षात्मक भावना रखती हैं। नक़वी का अनुमान है कि सोनिया गाँधी अपने फ़ैसले के ख़िलाफ़ गई और राहुल गाँधी को उसकी बहन की जगह ‘वारिस’ के रूप में चुना।

विकीलीक्स केबल का स्क्रीनशॉट
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