Wednesday, September 29, 2021
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गोविंदा ने सिखाया अंडे का फंडा, इमरान खान बूझ गए मामूली नहीं ये फंडा; पर पाकिस्तानी नहीं पाड़ रहे अंडे पर अंडा

मुर्गी पाल प्रोग्राम के सर्वे से यह बात सामने आई है कि प्रोग्राम सफल हुआ हो या असफल, इसे चलते रहना चाहिए ताकि कम से कम पाकिस्तान में तो इस पहेली का एक परमानेंट हल निकल आए कि पहले मुर्गी आई थी या पहले अंडा?

दुनिया की सबसे पुरानी पहेलियों में एक है मुर्गी-अंडे वाली पहेली। पहेली यह कि पहले मुर्गी आई या पहले अंडा? यह शायद दुनिया की सर्वप्रथम पहेली होगी जिसने पूरी दुनिया को व्यावहारिक दर्शन का मार्ग दिखाया। व्यावहारिक दर्शन अर्थात ऐसा दर्शन जिसकी प्रैक्टिस कर मनुष्य बिजनेसमैन, बिजनेसमैन नेता, नेता देवता और जनता मुर्गा बनती रही है।

इतिहास गवाह है कि इस पहेली को सबने अपनी-अपनी सोच के अनुसार हल किया है। साधारण प्रतिभा वाले जिन लोगों का विश्वास अंडे में था, उनके अनुसार पहले अंडा आया। इसी साधारण प्रतिभा वाले जिन लोगों का विश्वास मुर्गी में था, उनके अनुसार पहले मुर्गी आई। इन साधारण प्रतिभा वालों के बीच कुछ असाधारण प्रतिभा वाले भी थे जिनका विश्वास न तो मुर्गी में था और न ही अंडों में। उनका विश्वास मुर्गे में था। ऐसे लोगों का मानना रहा है कि पहले न तो अंडा आया और न ही मुर्गी, पहले मुर्गा आया।

ऐसे असाधारण प्रतिभाशाली मनुष्यों को यह दुनिया युगों-युगों से नेता के रूप में पहचानती रही है। 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की गिनती ऐसे ही प्रतिभावान लोगों में होती है। जाहिर है उनका विश्वास इस बात में है कि पहले मुर्गा ही आया था। पर चूँकि नेता जो सोचता है, जरूरी नहीं कि वही कहे इसलिए उन्होंने दुनिया की प्राचीनतम पहेली को हल करते हुए कहा; पहले मुर्गी आई। इससे पहले कि कोई उनसे उनकी बात साबित करने के लिए कहता, उन्होंने खुद ही अनाउंसमेंट कर दिया। बोले; मैं मुल्क़ की मईशत (अर्थव्यवस्था) में नए एक्सपेरिमेंट करते हुए यह साबित करूँगा कि पहले मुर्गी आई। 

लोगों ने पूछा; वो कैसे?

वे बोले; हमारी गवर्नमेंट अवाम में मुर्गियाँ बाँटेंगी। बँटी हुई ये मुर्गियाँ अंडे देंगी। उन अंडों से नई मुर्गियाँ निकलेंगी। फिर ये नई मुर्गियाँ अंडे देंगी। लोग अंडे बेंचेगे। इन बिके हुए अंडों से और मुर्गियाँ निकलेंगी। फिर इन मुर्गियों से अंडे निकलेंगे। मुर्गी और अंडे का यह रोलिंग प्लान ऐसा समय ले आएगा जब पाकिस्तान मुर्गी और अंडों का मुल्क… एक मिनट, नहीं-नहीं, मुर्गी और अंडों का नहीं बल्कि अंडे और मुर्गियों का मुल्क होगा। इन्हीं अंडे और मुर्गियों पर बैठकर एक दिन इस मुल्क की मईशत स्ट्रॉन्ग हो जाएगी। मैं यूरोप में रहा हुआ हूँ और यकीं जानें कि इन मुल्कों को अंडे और मुर्गियों का सही इस्तेमाल करने नहीं आया। वे इन्हें केवल खाना जानते हैं। वैसे तो हम भी अभी तक इन्हें खाते ही थे, लेकिन अब हम इन्हें बेचा भी करेंगे ताकि मुल्क की मईशत स्ट्रॉन्ग हो और हमें आईएमएफ न जाना पड़े।

पास बैठे एक मौलाना कोरस लगाते हुए बोले; इंशाअल्लाह! 

मुर्गी पाल प्रोग्राम शुरू हो गया। ये मुर्गी पाल कुछ कुछ जनलोकपाल जैसा सुनाई देता है। खैर, मुद्दे पर आते हैं। एक रपट आई है जिसमें बताया गया है कि इमरान खान का मुर्गीपाल प्लान विफल रहा है। रपट के अनुसार जिन नागरिकों में मुर्गियाँ बाँटी गई थी उन्होंने अंडे का इंतज़ार नहीं किया और मुर्गियों को ही खा गए। मुर्गी बँटेंगी तो पहले कटेगी!

करीब दस प्रतिशत मुर्गियों ने अंडे देने से साफ़ इनकार कर दिया। तीन प्रतिशत मुर्गियाँ उन्हें अवाम में बाँटे जाने का गम बर्दाश्त नहीं कर सकीं और खुदा को प्यारी हो गई। जिन लोगों को सरकार ने मुर्गियाँ दी थी उसमें से नब्बे प्रतिशत लोगों ने अंडे बाज़ारों में बेंचे ही नहीं और खुद खा गए। हो सकता इसे लेकर नई रपट आए कि ये अंडे अपने मालिकों को छोड़कर बाजार जाने के लिए तैयार ही नहीं हुए, इसलिए इन मालिकों के पास उन्हें खुद खाने के अलावा और कोई रास्ता बचा ही नहीं था।

ऐसा देखा गया है कि अक्सर कुछ प्लान करके किया जाता है और वह नहीं होता पर कुछ प्लान न करके किया जाए वह हो जाता है। जैसे इमरान खान की सरकार ने गधों को लेकर ऐसी कोई योजना अनाउंस नहीं की थी पर मुल्क के इकनोमिक सर्वे के अनुसार इकोनॉमी में गधों का कंट्रीब्यूशन मुर्गों से… सॉरी, मुर्गियों से अधिक रहा। कई लाख पाकिस्तानी गधे चीन ने खरीद लिए। हो सकता है कि जो बिक गए उनकी क़्वालिटी अच्छी होगी पर जो अभी तक नहीं बिक सके, उनके भविष्य में बिक जाने की उम्मीद बरक़रार है। भविष्य में बिकने के लिए और गधे उपलब्ध होंगे। चीन इन गधों को खरीदेगा। मुल्क और गधे पैदा करेगा और चीन और गधे खरीदेगा। पाकिस्तान की इकोनॉमी स्ट्रॉन्ग होगी और चीन की स्ट्रॉन्गर। हो सकता है भविष्य में चीन द्वारा दिए गए लोन का री-पेमेंट गधों की शक्ल में हो क्योंकि दो देश यदि चाह लें तो गधों को करेंसी के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

वापस मुर्गी पाल पर आते हैं। इस प्रोग्राम की बड़ी चर्चा थी। इमरान खान ने पकिस्तान के लोगों को विश्वास दिलाया था कि इसी प्रोग्राम से पाकिस्तान की इकोनॉमी पर मँडरा रहा आईएमएफ का साया जाता रहेगा। पर कुछ मुर्गियों और कुछ उनके मालिकों ने धोखा दे दिया। अब प्लान के मुताबिक नई मुर्गियाँ बाँटकर पुराने प्रोग्राम को सफल बनाने का प्रयास किया जाएगा। फिर से बाँटी गई मुर्गियों ने इस बार अंडे देने से इनकार नहीं किया तो भी प्रोग्राम के सफल होने की गारंटी नहीं है, क्योंकि प्रोग्राम सफल तभी होगा जब नई मुर्गियों से निकले अंडे बाजार तक पहुँचेंगे और किसी और के घर पहुँच कर नई मुर्गी देंगे। नई मुर्गियों से निकले अंडों ने और नई मुर्गियों को जन्म दे दिया तो फिर मुल्क़ की इकोनॉमी ऑमलेट होने से बच जाएगी। 

हाँ, नई मुर्गियों ने यदि फिर अंडे देने से मना कर दिया तो फिर चीजें बिगड़ सकती हैं। देखेंगे कि बाँटी गई मुर्गियों ने नए अंडे देने से साफ़ इनकार कर दिया और मुर्गी पाल ने मुल्क़ की इकोनॉमी को बचाने की चिंता किए बगैर मुर्गी को ही खा लिया। इमरान खान को फिर से नई मुर्गियाँ बाँटनी पड़ेंगी और यह प्लान लगातार चलता ही रहेगा, भले ही इसके सफल होने की गारंटी न हो। हाँ, इस प्रोग्राम के चलाए जाने का असर यह होगा कि इसके सफल या असफल होने पर हज़ारों टीवी पैनल डिस्कशन होंगे। उन डिस्कशन के दौरान विज्ञापन चलेंगे। उससे सरकार को टैक्स रेवेन्यू आएगा और सरकार समझेगी कि इकोनॉमी सही चल रही है। तो जिस मुर्गी पाल का उद्देश्य सीधे तौर पर इकोनॉमी को दुरुस्त करने का है, वह इकोनॉमी को टेढ़े तौर पर दुरुस्त कर देगा। मुर्गी और अंडों से बने प्रोग्राम मुर्गी पाल को सफलता मिली तो टिड्डों और उनके अंडों से बने प्रोग्राम टिड्डी पाल को भी लॉन्च किया जा सकता है। 

विशेषज्ञ तमाम सलाह देंगे ताकि जनता जान सके कि किन सलाहों को नहीं मानना है। हो सकता है कुछ विशेषज्ञ यह भी कहें कि इमरान खान को मुर्गी के साथ-साथ मुर्गे भी बाँटने चाहिए थी पर है तो विशेषज्ञों की ही बात, ऐसे में इसे अधिक गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। गंभीरता से जिसे लिया चाहिए वे हैं इमरान खान और पाकिस्तान उन्हें गंभीरता से ही ले रहा है। मुर्गी पाल प्रोग्राम के सर्वे से यह बात सामने आई है कि प्रोग्राम सफल हुआ हो या असफल, इसे चलते रहना चाहिए ताकि कम से कम पाकिस्तान में तो इस पहेली का एक परमानेंट हल निकल आए कि पहले मुर्गी आई थी या पहले अंडा?

 

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