Thursday, July 18, 2024
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‘वेलकम बैक एयर इंडिया… जेआरडी होते तो बेहद खुश होते’: रतन टाटा का इमोशनल पोस्ट, सरकार को भी कहा शुक्रिया

एयर इंडिया की शुरुआत 1932 में जेआरडी टाटा ने की थी। 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था।

कर्ज में डूबी सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया की घर वापसी की खबरों पर आधिकारिक मुहर लग गई है। स्पाइसजेट को पीछे छोड़ते हुए टाटा संस ने इसकी बोली जीत ली है। टाटा ग्रुप को एयर इंडिया की कमान मिली है। कंपनी ने सबसे बड़ी बोली लगाई। वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाली डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सचिव तुहिन कांत पांडे ने बताया है कि मंत्रियों की समिति ने एयर इंडिया के लिए विजेता बोली को मंजूरी दी है। टाटा संस ने एयर इंडिया के लिए 18,000 करोड़ रुपए की विजेता बोली लगाई। 

DIPAM के सचिव ने बताया कि एयर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप ने 18,000 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। एयर इंडिया का 15300 करोड़ रुपए का कर्ज टाटा चुकाएगी और बकाया 2700 करोड़ सरकार को देगी। एयर इंडिया पर 31 अगस्त तक 61,560 करोड़ रुपए का कर्ज था। इसमें 15300 करोड़ रुपए टाटा संस चुकाएगी, जबकि बाकी के 46,262 करोड़ रुपए AIAHL (Air India asset holding company) भरेगी। 

तुहिन कांत पांडे ने कहा कि लेनदेन दिसंबर 2021 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। डील में एयर इंडिया की जमीन और इमारतों सहित किसी भी नॉन एसेट (जैसे- भूमि और भवन) को नहीं बेचा जाएगा। कुल कीमत 14,718 करोड़ रुपए की ये संपत्ति सरकारी कंपनी AIAHL के हवाले कर दी जाएँगी। सरकार की शर्तों के मुताबिक सफल बोली लगाने वाली कंपनी टाटा को एयर इंडिया के अलावा सब्सिडरी एयर इंडिया एक्सप्रेस का भी शत प्रतिशत नियंत्रण मिलेगा। वहीं, एआईएसएटीएस में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी पर कब्जा होगा।

बता दें कि एआईएसएटीएस प्रमुख भारतीय हवाईअड्डों पर कार्गो और जमीनी स्तर की सेवाओं को उपलब्ध कराती है। विनिवेश नियमों के मुताबिक टाटा को एयर इंडिया के घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लैंडिंग की मंजूरी मिलेगी।

एयर इंडिया की करीब 68 साल बाद घर वापसी पर समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने रतन टाटा ने इमोशनल पोस्ट किया है। ‘वेलकम बैक, एयर इंडिया’ का ट्वीट करते हुए उन्होंने एक नोट भी अटैच किया है। साथ ही 1932 में इस विमानन सेवा की शुरुआत करने वाले विजनरी बिजनेसमैन जेआरडी टाटा का एयर इंडिया के साथ एक फोटो भी शेयर किया है।

रतन टाटा ने अपने पोस्ट में कहा है, “एयर इंडिया का बोली जीतना टाटा ग्रुप के लिए काफी अच्छी खबर है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि एयर इंडिया को फिर से खड़ा करने के लिए मेहनत की जरूरत होगी। उम्मीद है कि यह फैसला एविएशन इंडस्ट्री में टाटा ग्रुप की मौजूदगी के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराएगा।”

उन्होंने लिखा है कि एक समय था जब जेआरडी के नेतृत्व में एयर इंडिया दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइंस थी। टाटा के पास मौका है कि एयर इंडिया को ये पहचान दोबारा दिलाए। यदि आज जेआरडी टाटा होते तो बेहद खुश होते। उन्होंने कहा कि वे सरकार के भी शुक्रगुजार हैं कि उसने हाल में कई इंडस्ट्री को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने की नीति अपनाई है।

उल्लेखनीय है कि एयर इंडिया की शुरुआत 1932 में जेआरडी टाटा ने की थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसकी सेवाएँ बंद की गई थी। दोबारा 1946 में जब इसकी सेवा बहाल हुई तो नाम टाटा एयरलाइंस से बदलकर एयर इंडिया लिमिटेड हो गया। देश स्वतंत्र होने के बाद एयर इंडिया की 49 फीसदी भागीदारी सरकार ने ले ली थी। इसके बाद 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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