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बिहार में जहाँ खुद भगवान राम ने की महादेव की पूजा, वहाँ अब सम्राट सरकार बनाएगी श्रीराम की भव्य मूर्ति: जानें- त्रेता युग से जुड़े इस जगह का महात्म्य

नारद पुराण में बक्सर के पुराने नाम 'सिद्धाश्रम' का उल्लेख मिलता है, जिसे भगवान शंकर की तपोभूमि कहा गया है। मान्यता है कि यहाँ महर्षि विश्वामित्र सहित 88 हजार ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी। गंगा के उत्तरायणी प्रवाह के कारण यह क्षेत्र 'मिनी काशी' के रूप में भी प्रसिद्ध है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार (23 मई 2026) को अपने पहले बक्सर दौरे पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर बड़ी घोषणाएँ कीं।

उन्होंने सबसे पहले बक्सर केंद्रीय कारा परिसर स्थित प्राचीन श्री वामनेश्वर नाथ मंदिर में पूजा की और उसके बाद रामरेखा घाट पहुँचकर ऐतिहासिक श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर में माथा टेका। इस दौरान उन्होंने मंदिर और रामरेखा घाट के भव्य विकास का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री ने यहाँ भगवान श्रीराम की विशाल प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा भी की। बक्सर का रामरेखा घाट और श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और पौराणिक परंपराओं का केंद्र है। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने स्वयं यहाँ शिवलिंग की स्थापना की थी।

यही कारण है कि यह मंदिर देश की प्राचीन आध्यात्मिक धरोहरों में गिना जाता है। अब मुख्यमंत्री की घोषणाओं के बाद इस ऐतिहासिक स्थल को नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है।

लाइट एंड साउंड कॉम्प्लेक्स और महर्षि विश्वामित्र मंडपम का उद्घाटन

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का दौरा धार्मिक कार्यक्रमों और विकास योजनाओं दोनों पर केंद्रित रहा। उन्होंने सबसे पहले श्री वामनेश्वर नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर के ले-आउट प्लान का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।

इसके बाद मुख्यमंत्री रामरेखा घाट स्थित श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर पहुँचे, जहाँ मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पुजारियों और स्थानीय श्रद्धालुओं से बातचीत की। इस दौरान पुजारियों ने रामरेखा घाट और मंदिर को अयोध्या की तर्ज पर विकसित करने की माँग रखी।

मुख्यमंत्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार इस धार्मिक धरोहर के समग्र विकास के लिए गंभीरता से काम करेगी। दौरे के दौरान उन्होंने करीब छह करोड़ रुपये की लागत से बने लाइट एंड साउंड कॉम्प्लेक्स और महर्षि विश्वामित्र मंडपम का उद्घाटन भी किया।

इसके अलावा उन्होंने रिमोट के जरिए महाराजा कमल बहादुर सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया और पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर और रामरेखा घाट का इतिहास, भगवान राम ने स्थापित की है शिवलिंग

नारद पुराण में बक्सर के पुराने नाम ‘सिद्धाश्रम’ का उल्लेख मिलता है, जिसे भगवान शंकर की तपोभूमि कहा गया है। मान्यता है कि यहाँ महर्षि विश्वामित्र सहित 88 हजार ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी। गंगा के उत्तरायणी प्रवाह के कारण यह क्षेत्र ‘मिनी काशी’ के रूप में भी प्रसिद्ध है।

रामरेखा घाट स्थित श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब महर्षि विश्वामित्र का यज्ञ राक्षसों द्वारा बार-बार बाधित किया जा रहा था, तब वे अयोध्या पहुँचे और राजा दशरथ से भगवान राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले आए।

इसके बाद भगवान राम ने ताड़का और सुबाहु जैसे राक्षसों का वध कर ऋषियों के यज्ञ की रक्षा की और यज्ञ को सफल बनाया। यज्ञ संपन्न होने के बाद भगवान राम, लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र गंगा तट पर पहुँचे। मान्यता है कि यहीं भगवान राम ने गंगा स्नान किया और गंगा की मिट्टी से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की।

यही शिवलिंग आगे चलकर श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। कहा जाता है कि जनकपुर में सीता स्वयंवर में भाग लेने और शिव धनुष भंग करने से पहले भगवान राम ने यहीं अपने इष्टदेव भगवान शिव की आराधना की थी।

स्थानीय कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने इस स्थान पर एक विशेष रेखा भी खींची थी, ताकि चारों दिशाओं सहित आकाश और पाताल मार्ग से भी कोई राक्षस इस क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। इसी रेखा के कारण इस स्थान का नाम ‘रामरेखा घाट’ पड़ा। धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय परंपराओं में इस स्थल को अत्यंत पवित्र माना गया है।

सावन और महाशिवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

रामेश्वरनाथ मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष भीड़ देखने को मिलती है। बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से भक्त यहाँ जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुँचते हैं। सावन के दौरान मंदिर परिसर और आसपास का इलाका मेले जैसा दिखाई देता है।

बाबा ब्रह्मेश्वर धाम और गुप्ताधाम जाने वाले श्रद्धालु भी यहाँ गंगा जल लेकर पूजा करने के बाद आगे की यात्रा करते हैं। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि यहाँ आने वाला भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता। शिवलिंग के सामने सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर पूरी होती है। यही वजह है कि यह मंदिर लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है।

रामरेखा घाट को कैसे विकसित करेगी सरकार?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने दौरे के दौरान स्पष्ट किया कि रामरेखा घाट को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। योजना के तहत यहाँ कंट्रोल रूम, शुद्ध पेयजल, चेंजिंग रूम, आधुनिक पाथ-वे और गंगा आरती की विशेष व्यवस्था की जाएगी।

इसके अलावा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अत्याधुनिक 5D थिएटर, रेस्टोरेंट, ड्राई डेक फाउंटेन और अन्य सुविधाओं को भी विकसित किया गया है। सरकार का उद्देश्य बक्सर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना है। इसी कड़ी में भगवान श्रीराम की विशाल प्रतिमा स्थापित करने की योजना को भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बक्सर की पहचान को मिलेगा नया विस्तार

स्थानीय लोगों और धार्मिक न्यास परिषद से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि सरकार की योजनाएँ सही तरीके से लागू हुईं, तो बक्सर आने वाले समय में देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल धार्मिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय व्यापार, रोजगार और पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

हर साल लाखों श्रद्धालु यहाँ गंगा स्नान और दर्शन के लिए पहुँचते हैं, लेकिन अब तक सुविधाओं की कमी महसूस की जाती रही है। मुख्यमंत्री के दौरे और घोषणाओं के बाद लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से उपेक्षित यह ऐतिहासिक धरोहर अब नए और भव्य स्वरूप में दुनिया के सामने आएगी।

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सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
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