Monday, April 15, 2024
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एकंबरेश्वर मंदिर: जहाँ माता पार्वती की परीक्षा लेने पहुँचे थे स्वयं भगवान शिव

शिव जी ने माता पार्वती से वरदान माँगने को कहा तो माता पार्वती ने विवाह की इच्छा व्यक्त की। महादेव ने माता पार्वती से विवाह कर लिया। कहा जाता है कि इस पेड़ की हर शाखा पर अलग-अलग रंग के आम लगते है और इनका स्वाद भी अलग-अलग है।

एकंबरेश्वर मंदिर, तमिलनाडु के मंदिरों के नगर कांचीपुरम का सबसे विशाल एवं भव्य शिव मंदिर है। इसमें पीठासीन देवता के रूप में भगवान शिव हैं। भगवान शिव को यहाँ पृथ्वी के रूप में पूजा जाता है।

पिछली बार आपने पढ़ा था कि पञ्चभूत स्थल दक्षिण भारत में पाँच शानदार प्राचीन मंदिर हैं। इनका निर्माण मानव चेतना को विकसित करने के एक माध्यम के रूप में किया गया था।

इन मंदिरों में श्रीकलाहस्ति में वायु तत्व हेतु, कांचीपुरम में पृथ्वी तत्व, तिरुवन्नामलाई में अग्नि तत्व हेतु, चिदंबरम में आकाश तत्व एवं तिरुवनाईकवल में जल तत्च के लिए इन मंदिरों का निर्माण किया गया था।

इस यात्रा की शुरुआत के लिए डेरा जमाया गया था चेन्नई में, जहाँ मेरे मित्र तृषार इस यात्रा में साथ देने गुजरात से आने वाले थे। रास्ता बना लिया गया था, नाम लिख लिए गए थे।

पहला दिन कांचीपुरम और महाबलीपुरम में गुज़ारा गया था और रात को मदुरै के लिए प्रस्थान किया गया था।

आइए चलते है पंचभूत की यात्रा पर –

एकंबरेश्वर मंदिर

यहाँ शिव को एकंबरेश्वर के रूप में पूजा जाता है, और लिंगम द्वारा दर्शाया जाता है, उनकी मूर्ति को पृथ्वी लिंगम कहा जाता है। यह विशाल मंदिर अपने विशाल ‘गोपुरम’ के लिए प्रसिद्ध है, जो कांचीपुरम के मंदिर शहर के क्षितिज पर हावी है।

माना जाता है कि मंदिर हजारों साल पुराना है, लेकिन पल्लव वंश के राजाओं, पांड्या वंश, चोल वंश और विजयनगर के बाद के राजाओं द्वारा फिर से पुनर्निर्माण किया गया, विशेषकर राजा कृष्ण सेवा राय ने इस मंदिर में कई संरचनात्मक योगदान दिए।

गर्भगृह के सामने एक हजार-स्तंभों वाला अनूठा डिजाइन किया गया हॉल (ऐयाराम काल मंडपम) है, इसमें 1008 शिव लिंगम की मूर्तियाँ हैं और माना जाता है कि इसे राजा कृष्णदेव राय ने भी बनवाया था।

आम के इस पेड़ के नीचे माँ पार्वती ने भगवान महादेव शिव की पूजा की थी और माता पार्वती शिव जी को प्राप्त करने के लिए उसी आम के पेड़ के नीचे मिट्टी या बालू से ही एक शिवलिंग बना कर घोर तपस्या करनी शरू कर दी थी।

जब शिव ने पार्वती जी को तपस्या करते हए देखा तो परीक्षा लेने के उद्देश्य से अपनी जटा से गंगा जल से सब जगह पानी-पानी कर दिया। जल की तेज गति से पूजा मे बाधा पड़ने लगी तो माता पार्वती ने उस शिवलिंग जिसकी वह पूजा कर रही थी, उसे गले लगा लिया जिसे से शिव लिंग को कोई नुकसान न हो। शिव जी यह सब देख कर बहुत खुश हए और माता पार्वती को दर्शन दिए।

शिव जी ने माता पार्वती से वरदान माँगने को कहा तो माता पार्वती ने विवाह की इच्छा व्यक्त की। महादेव ने माता पार्वती से विवाह कर लिया। कहा जाता है कि इस पेड़ की हर शाखा पर अलग-अलग रंग के आम लगते है और इनका स्वाद भी अलग-अलग है।

मंदिर परिसर में मंडप युक्त एक सुंदर तालाब भी है, जिसे शिव गंगा तीर्थम कहते हैं। इस सरोवर के मध्य में शिव पुत्र भगवान गणेश जी की एक मूर्ति भी स्थापित है।

कामाक्षी अम्मा के मन्दिर में विष्णु जी को भी स्थापित किया गया है पर वो मुख्य मंदिर से ज़रा हट कर एक तालाब में विराजमान हैं।

चलते-चलते आपको गरुड़ स्तंभ दिखाता चलता हूँ जिसकी कहानी आपको @wh0mi_ यहाँ बता चुके हैं। अगली बार आपको मदुरै के मंदिर ले जाने से पहले महाबलीपुरम ले कर चलेंगे तब तक के लिए विदा लेता हूँ।

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