Monday, August 2, 2021
Homeविविध विषयधर्म और संस्कृतिजब कंगना ने खोज निकाला 'रनौत' की कुलदेवी का 1200 वर्ष प्राचीन मंदिर, पैतृक...

जब कंगना ने खोज निकाला ‘रनौत’ की कुलदेवी का 1200 वर्ष प्राचीन मंदिर, पैतृक गाँव में की स्थापना

कंगना रनौत ने ढबोई में ही कुलदेवी का मंदिर बनवाया। उन्होंने जो मंदिर बनवाया, उसे मंडी की जनता और अपना पूर्वजों को समर्पित किया। अपनी फिल्म 'मणिकर्णिका' की रिलीज से पहले भी वो मंदिर में दर्शन करने गई थीं।

कंगना रनौत न सिर्फ सोशल मीडिया पर हिंदुत्व के लिए आवाज़ उठाती हैं, बल्कि वो जमीन पर भी धर्म के लिए काम करने में विश्वास रखती हैं। हिमाचल प्रदेश के मंडी में स्थित ढबोई उनका पैतृक गाँव है, जहाँ माँ महिषासुरमर्दिनि उनकी कुलदेवी हैं। कंगना रनौत घर में कोई भी समारोह होने पर या अपनी फिल्मों की रिलीज से पहले अपनी कुलदेवी के मंदिर जाकर उनका आशीर्वाद लेती हैं। अक्सर वो सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें भी शेयर करती हैं।

कंगना रनौत कहती हैं, “मैं एक हिन्दू हूँ और इस पर मुझे बहुत गर्व है। मेरे व्यक्तित्व की आधारशिला स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ, सनातन धर्म और भगवद्गीता हैं।” क्या आपको पता है कि उनके गाँव में कुलदेवी का जो मंदिर है, उसका निर्माण कंगना रनौत ने ही कराया है? उन्होंने एक बार इससे जुड़ा वाकया सुनाते हुए कहा था कि उनकी माँ को बचपन में बहुत सारे ऐसे सपने आते थे, जिनमें छोटी बच्चियाँ दिखती थीं।

साथ ही सपने में उन्हें माँ दुर्गा का रूप भी दिखता था। बकौल कंगना रनौत, उनकी माँ ने जब इस बारे में पंडितों से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि अगर सपने में बच्ची या माँ दुर्गा दिखती है तो कुलदेवी का दर्शन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी माँ ने अपनी कुलदेवी का मंदिर ढूँढने की भी कोशिश की, लेकिन लाख जतन करने के बावजूद वो सफल नहीं हुए। यहाँ-वहाँ खोज करने पर भी नहीं मिली, लेकिन सपने आते रहे।

कंगना रनौत ने आगे बताया कि जब वो फिल्मों में आईं और देश-विदेश में यात्राएँ करने लगीं, तब उनकी माँ ने उनसे कहा कि तुम हमारी कुलदेवी को ढूँढो। कंगना रनौत के अनुसार, उन्होंने इसके बाद उदयपुर के जगत गाँव में अम्बिका माता के 1200 वर्ष पुराने मंदिर को खोजा और वहाँ दर्शन किया। इसके बाद उन्होंने अपने गाँव के लोगों (‘रनौत’ समुदाय की) की व्यथा देखी, जो इतनी दूर जाकर कुलदेवी का दर्शन नहीं कर पाते थे। इसलिए, उन्होंने यहीं मंदिर बनवाने का निर्णय लिया।

फिर कंगना रनौत ने ढबोई में ही कुलदेवी का मंदिर बनवाया। उन्होंने जो मंदिर बनवाया, उसे मंडी की जनता और अपना पूर्वजों को समर्पित किया। अपनी फिल्म ‘मणिकर्णिका’ की रिलीज से पहले भी वो मंदिर में दर्शन करने गई थीं। वो अन्य मंदिरों में भी दर्शन के लिए जाती रहती हैं और हिंदुत्व को लेकर काफी मुखर रहती हैं। कंगना रनौत पुरानी भारतीय संस्कृति और इतिहास की रक्षा के लिए भी सजग नजर आती हैं।

फ़िलहाल कंगना रनौत दिवंगत संगीतकार वाजिद खान की पत्नी कमलरुख के समर्थन में लगी हुई हैं, जिन्होंने ‘लव जिहाद’ की चर्चाओं और इसके खिलाफ कई राज्यों में क़ानून बनाने की तैयारियों के बीच अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा किया कि किस तरह से उन पर इस्लामी धर्मान्तरण के लिए परिवार ने दबाव बनाया। इस पर कंगना ने पूछा है कि जो लोग दंगे और धर्म-परिवर्तन नहीं करते, उन्हें हम कैसे सुरक्षित रखें?

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘किताब खरीद घोटाला, 1 दिन में 36 संदिग्ध नियुक्तियाँ’: MGCUB कुलपति की रेस में नया नाम, शिक्षा मंत्रालय तक पहुँची शिकायत

MGCUB कुलपति की रेस में शामिल प्रोफेसर शील सिंधु पांडे विक्रम विश्वविद्यालय में कुलपति थे। वहाँ पर वो किताब खरीद घोटाले के आरोपित रहे हैं।

‘दविंदर सिंह के विरुद्ध जाँच की जरूरत नहीं…मोदी सरकार क्या छिपा रही’: सोशल मीडिया में किए जा रहे दावों में कितनी सच्चाई

केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ कई कॉन्ग्रेसियों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों ने सोशल मीडिया पर दावा किया। लेकिन इनमें से किसी ने एक बार भी नहीं सोचा कि अनुच्छेद 311 क्या है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
112,620FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe