Tuesday, May 21, 2024
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‘बॉलीवुड वाले KFC मँगाते हैं, दक्षिण में रोटी-चावल मिलता है’: बोनी कपूर ने बताया क्यों है साउथ फिल्मों का क्रेज, ‘थाला’ अजीत की तारीफ़ की

बोनी कपूर ने कहा कि अधिकतर दक्षिण भारतीय फ़िल्में 'भारतीय मिजाज' के हिसाब से बनती हैं, यही कारण है कि दक्षिण की डब की हुई फ़िल्में भी हिंदी बेल्ट में खासी लोकप्रिय होती हैं।

फिल्म निर्माता बोनी कपूर इन दिनों अपनी तमिल फिल्म ‘वलिमै’ की सफलता को लेकर उत्साहित हैं, जिसमें ‘थाला’ नाम से पुकारे जाने वाले अजीत कुमार मुख्य भूमिका में हैं। ‘वलिमै’ ने अब तक दुनिया भर में 11 दिनों में 215 करोड़ से भी अधिक रुपए कमा लिए हैं, जिसमें से अकेले तमिलनाडु बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने 150 करोड़ की कमाई की है। हिंदी बेल्ट में ठीक प्रदर्शन न करने के बावजूद बाइक स्टंट्स से लबालब इस फिल्म ने कई रिकॉर्ड्स ध्वस्त किए।

बता दें कि बोनी कपूर की फिल्म ‘इंग्लिश इंग्लिश (2012)’ के तमिल वर्जन में अजीत कुमार ने कैमियो अपीयरेंस दिया था, जिसके बाद दोनों ने ‘पिंक’ के रीमेक ‘Nerkonda Parvaai (2019)’ में भी साथ काम किया। ‘इंग्लिश इंग्लिश’ में बोनी कपूर की दिवंगत पत्नी श्रीदेवी मुख्य भूमिका में थीं। उन्होंने ‘थाला’ अजीत कुमार को काम के प्रति समर्पित, गंभीर और प्रोफेशन अभिनेता बताया। बोनी की अगली फिल्म में भी अजीत ही अभिनेता होंगे।

‘फर्स्टपोस्ट’ को दिए गए इंटरव्यू में बोनी कपूर ने कहा कि उनकी पत्नी श्रीदेवी की अजीत काफी इज्जत करते थे, इसीलिए उन्होंने साथ काम करने के लिए हामी भरी और दूसरा कारण ये भी है कि अजीत की पत्नी शालिनी ने श्रीदेवी के साथ पहले काफी काम किया था। श्रीदेवी ने तमिल फिल्मों से ही अपना डेब्यू किया था और बाद में भी वो कई तमिल फिल्मों में दिखीं। बोनी कपूर ने कहा कि अधिकतर दक्षिण भारतीय फ़िल्में ‘भारतीय मिजाज’ के हिसाब से बनती हैं।

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि दक्षिण की डब की हुई फ़िल्में भी हिंदी बेल्ट में खासी लोकप्रिय होती हैं। उन्होंने कहा कि इन फिल्मों में उस हर कुछ का मिश्रण होता है, जो भारतीय दर्शकों को पसंद है। उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर ये फैमिली ड्रामा हो तो लोग तुरंत इससे जुड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि कहानी कुछ भी हो, हीरो हमेशा हीरो ही रहता है और म्यूजिक का बड़ा किरदार होता है। फिर इसमें एक्शन और कॉमेडी का तड़का लगाया जाता है।

बोनी कपूर ने बॉलीवुड से दक्षिण की तुलना पर कहा, “आजकल मुंबई के फिल्म निर्माता McDonalds-KFC की चीजें और पिज्जा खाने में देते हैं जहाँ आपको वही मिलेगा जो आपने ऑर्डर किया, जबकि दक्षिण में रोटी, दाल-चावल, सब्जी और चिकन मिलता है। दक्षिण भारतीय फिल्मकारों द्वारा बनाई गई दुनिया हमें स्वीकार्य होती है। उनमें सभी चीजों का मिश्रण होता है। जब अल्लू अर्जुन और महेश बाबू की हिंदी डब फ़िल्में 15-25 करोड़ रुपए में बिकने लगी थीं, तभी मुझे लगा था कि ये समय आएगा। आज RRR, पुष्पा और रोबोट जैसी फिल्मों की चर्चा होती है और टीवी पर बड़ी संख्या में लोग डब फ़िल्में देखते हैं।”

बोनी कपूर ने कहा कि अधिकतर हिन्दू फिल्म निर्देशक ऑस्कर जीतने के लिए और हॉलीवुड से प्रतिस्पर्धा के लिए फ़िल्में बना रहे हैं, लेकिन ऑस्कर में क्या जाएगा ये आप तय नहीं करते। उन्होंने याद दिलाया कि महबूब खान ने ‘मदर इंडिया (1957)’ या आमिर खान ने ‘लगान (2001)’ ऑस्कर का सोच कर नहीं बनाई थी। उन्होंने याद दिलाया कि राज कपूर और मनोज कुमार भारतीय समस्याओं को दिखा कर हिट हुए। उन्होंने याद दिया कि ‘बाहुबली’ भारतीय लोककथा और संस्कृति पर है, इसीलिए हिट हुई। उन्होंने दक्षिण की पत्रिका ‘चन्दामामा’ की याद दिलाते हुए कहा कि भारत की दुनिया ये है, जिसे हम भूल गए।

बोनी कपूर ने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत में नायकों पर लोगों का भरोसा होता है और कंटेंट के मामले में भी वो बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई में दो-तीन सफल फिल्म निर्माता हैं, लेकिन दक्षिण की फ़िल्में जितना कमा रही हैं उसका एक छोटा हिस्सा ही उनकी कमाई होती है। उन्होंने बॉलीवुड में अच्छे लेखकों की कमी को भी एक कारण बताया। बोनी कपूर फ़िलहाल अजय देवगन की ‘मैदान’ को लेकर भी उत्साहित हैं। एक फिल्म में वो रणवीर कपूर के पिता के किरदार में अपना एक्टिंग डेब्यू भी करेंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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