Friday, January 21, 2022
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बुर्के का विरोध करने वाली नसरीन को 38 साल की जेल, 148 कोड़ों की सजा

इससे पहले 55 वर्षीय नसरीन ने इस्लामिक रिपब्लिक की तरफ से महिलाओं के लिए बुर्का अनिवार्य किए जाने का विरोध करने वाली महिलाओं का केस लड़ा था। इन महिलाओं ने बिना सिर ढके अपना वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया था।

ईरान की मशहूर वकील को मुस्लिम महिलाओं के बुर्के ना पहनने वकालत करने के लिए 7 अलग-अलग मामलों में 33 साल की जेल और 148 कोड़े लगाने की सजा मिली है। अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मानवाधिकार वकील नसरीन सोतेदेह को सोमवार (मार्च 11, 2019) को यह सजा सुनाई गई।

नसरीन पहले ही एक मामले में 5 साल की सजा काट रही हैं। इस तरह जेल की कुल सजा 38 साल हो गई है। नसरीन को यह सजा ईरान में विपक्षी कार्यकर्ताओं का केस लड़ने के आरोप में मिली है। इससे पहले 55 वर्षीय नसरीन ने इस्लामिक रिपब्लिक की तरफ से महिलाओं के लिए बुर्का अनिवार्य किए जाने का विरोध करने वाली महिलाओं का केस लड़ा था।

इन महिलाओं ने बिना सिर ढके अपना वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया था। नसरीन के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को पिछले साल जून में गिरफ्तार किया गया था। मानवाधिकार वकील नसरीन पर जासूसी, दुष्प्रचार करने और ईरान के शीर्ष नेतृत्व का अपमान करने का आरोप लगाया गया। इससे पहले, साल 2010 में नसरीन को दुष्प्रचार करने और देश की सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में जेल भेजा गया था। हालाँकि, नसरीन ने इन आरोपों से इनकार किया था। 6 साल की सजा काटने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था।

मीडिया के अनुसार, तेहरान के रेवोल्यूशनरी कोर्ट के जज मोहम्मद मोकिश ने सोमवार को कहा कि 5 साल की सजा राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ एकजुट होने और 2 साल की सजा ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामैनी का अपमान करने के अपराध में मिली है। नसरीन के पति रेजा खानदन Reza Khandan ने फेसबुक पर लिखा कि जेल की सजा और 148 कोड़ों की सजा बहुत कड़ी है। उन्होंने लिखा है कि नई सजा को मिलाकर 7 अलग-अलग मामलों 38 साल की सजा मिल चुकी है।

इससे पहले नसरीन को साल 2009 में व्यापक प्रदर्शन करने वाले लोगों का केस लड़ने के बाद 3 साल जेल में गुजारने पड़े थे। ईरान में मानवाधिकार पर संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ता जाविद रहमान ने सोमवार को जेनेवा में नसरीन का मामला उठाया । रहमान ने गिरफ्तारी, सजा, अनुचित व्यवहार के गलत तरीकों पर चिंता व्यक्त की थी। नसरीन को कई बड़े-बड़े मामलों की पैरवी करने के कारण यूरोपीय संसद साल 2012 में सखारोव मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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