Wednesday, April 1, 2020
होम देश-समाज 26 जनवरी स्पेशल: अशोक स्तम्भ का इतिहास, जो बना हमारा राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न

26 जनवरी स्पेशल: अशोक स्तम्भ का इतिहास, जो बना हमारा राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न

सम्राट अशोक ने धर्म प्रचार और नैतिक उपदेशों को प्रजा तक पहुँचाने के लिए धर्म लेखों का सहारा लिया था। इन धर्म लेखों को पर्वत शिखरों, पत्थर के खंभों और गुफ़ाओं में अंकित किया जाता था।

ये भी पढ़ें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

भारत आज अपना 70वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा है। गणतंत्र दिवस के इस ख़ास मौक़े पर आज हम इतिहास के पन्नों से कुछ जानकारी आपसे साझा करेंगे जिसका सीधा संबंध हमसे और हमारे देश से है।

उत्तर प्रदेश के सारनाथ स्थित अशोक स्तम्भ के सिंहों को 26 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में मान्यता मिली थी। ये दहाड़ते हुए सिंह धर्म चक्र प्रवर्तन के रूप में दृष्टिमान हैं। बुद्ध ने वर्षावास समाप्ति पर भिक्षुओं को चारों दिशाओं में जाकर लोक कल्याण हेतु ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ का आदेश दिया था, जो आज सारनाथ के नाम से विश्विविख्यात है। इसलिए यहाँ पर मौर्य साम्राज्य के तीसरे सम्राट व सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पौत्र महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने चारों दिशाओं में गर्जना करते हुए शेरों को बनवाया था।

सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए स्तम्भों में सारनाथ के स्तम्भ को सबसे बेहतर माना जाता है। इसमें सबसे ऊपर चारों दिशाओं में चार सिंह बने हुए हैं। यह चुनार के बलुआ पत्थर के लगभग 45 फुट लंबे प्रस्तरखंड का बना हुआ है। सिंहों की आकृति बेहद सौम्य प्रतीत नज़र आती है, इसमें उनकी माँसपेशियों, उनके बालों और शारीरिक बारीकियों को बेहद कुशलता के साथ पत्थर पर उकेरा गया है। इन सिंहों के नीचे एक पट्टी पर चारों दिशाओं में चक्र बने हुए हैं, इन चक्रों में 32 तीलियाँ हैं। इन्हीं तीलियों को धर्म चक्र प्रवर्तन का प्रतीक माना जाता है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

बता दें कि हमारे राष्ट्रीय झंडे के बीच में जो अशोक चक्र का चिह्न विद्यमान है वो अशोक के स्तम्भ से ही लिया गया है। नीचे वाली पट्टी में चार पशु जिनमें हाथी, घोड़ा, बैल और सिंह बने हुए हैं वो देखने में संजीवता का आभास कराते हैं। अशोक द्वारा बनाए गए स्तम्भ सम्राट अशोक की शक्ति का प्रतीक भी माने जाते हैं। इन सभी स्तम्भों की ख़ासियत यह है कि इन्हें एक ही पत्थर को तराशकर बनाया गया है। इसलिए इन्हें एकाश्म (Monolithic) स्तम्भ भी कहा जाता है।

सारनाथ के सिंह स्तम्भ का ऊपरी हिस्सा या शीर्ष सारनाथ में पुरात्तव विभाग के संग्राहलय में रखा हुआ है और उसका बाक़ी हिस्सा या स्तम्भ संग्रहालय के पास ही में सारनाथ स्तूप के पास रखा गया है। सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए सभी स्तम्भ भारतीय कला का अद्भुत नमूना हैं। प्राचीन भारतीय विज्ञान और कला का बेजोड़ उदाहरण हैं।

इन स्तम्भों की ख़ासियतों में एक और ख़ास बात यह है कि इनकी चमकदार पॉलिश आज भी वर्षों बाद जस की तस बरक़रार है। सारनाथ के क़रीब 70 किलोमीटर दूर चुनार की खदानों में मिलने वाले बलुआ पत्थर से बनाए गए इस स्तम्भ में पत्थर की काली चित्तियाँ स्पष्ट दिखाई देती हैं बावजूद इसके इस स्तम्भ पर लाई गई चमक का आख़िर क्या राज़ है वो आज भी किसी को नहीं मालूम।

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इस बलुआ पत्थर को चमकाने की कला ईरान से भारत आई है जबकि कुछ का मानना है कि यह कला भारत में पहले से ही विद्यमान थी। इतिहासकारों के अनुसार मौर्यकाल में चुनार पत्थर की कला को काफी प्रोत्साहन मिला था और मौर्य दरबार द्वारा इसे पूर्णत: संरक्षण भी प्राप्त था। अशोक सम्राट ने प्रमुख राजपथों व मार्गों पर भी धर्म लेख आदि स्थापित करवाए थे। ऐसा करने के पीछे देश की प्रजा को धार्मिक आचरण से अवगत कराने का उद्देश्य था। बता दें कि अशोक संसार के उन सम्राटों में से एक थे जिन्होंने धर्म-विजय के द्वारा संपूर्ण देश और पड़ोसी देशों में अहिंसा, शांति, मानव कल्याण और आपसी प्रेम का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया।

सम्राट अशोक के समय में धार्मिक प्रचार से कला को काफ़ी बढ़ावा मिला था। अशोक ने धर्म प्रचार के लिए, नैतिक उपदेशों को प्रजा तक पहुँचाने के लिए धर्म लेखों का सहारा लिया था। इन धर्म लेखों को पर्वत शिखाओं, पत्थर के खंभों और गुफ़ाओं में अंकित किया जाता था। अशोक ने अपने धर्म लेखों के अंकन के लिए ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों का उपयोग किया और पूरे देश में बड़े स्तर पर लेखनकला का प्रचार-प्रसार हुआ।

धार्मिक स्थापत्य और मूर्तिकला का अभूतपूर्व विकास भी अशोक के राज में ही हुआ। परंपरा के अनुसार सम्राट अशोक ने अपने तीन वर्ष के अंतर्गत लगभग 84,000 स्तूपों का निर्माण करवाया। सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में लगभग 30 स्तम्भों का निर्माण करवाया जो भारत के अलग-अलग हिस्सों में आज भी मौजूद हैं। इनमें वैशाली, प्रयागराज, दिल्ली, चेन्नई, सारनाथ और लुम्बिनी जैसे स्थान शामिल हैं।

- ऑपइंडिया की मदद करें -
Support OpIndia by making a monetary contribution

ख़ास ख़बरें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

ताज़ा ख़बरें

Covid-19: दुनिया भर में संक्रमितों की कुल संख्या 853981, भारत में अब तक संक्रमितों की संख्या 1397, 35 मौतें

दुनिया भर में अब तक 853,981 लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 42,006 की मौत हो हुई है। 176,906 को सफलतापूर्वक रिकवर भी कर लिया गया है। भारत में 35 लोग अब तक इस संक्रमण से जान गॅंवा चुके हैं।

सिसली में शवों से भरे 12 जहाजों से लेकर वुहान के कोरोना तक: हमेशा गतिशील धनाढ्य वर्ग के कारण फैले ऐसे विषाणु

पैनडेमिक के पीछे कभी भी गरीब, पिछड़े और आम जीवन व्यतीत करने वालों का हाथ नहीं रहा। इसके पीछे प्राय: धनी, सुदृढ़, प्रवासी, धनाकांक्षी, गतिशील लोग होते थे और आज भी स्थिति वही है। फिर चाहे देश में पहला कोरोना केस बना वुहान से लौटा केरल का छात्र हो या लंदन से लौटी कनिका कपूर। सब एक समृद्ध समाज का हिस्सा हैं। जिनके लिए आज यहाँ कल वहाँ एक आम बात है।

तमिलनाडु में सामने आए कोरोना के 50 नए मामले, प्रदेश से निजामुद्दीन मरकज में शामिल हुए 1500, 501 की हुई पहचान

तमिलनाडु से 50 कोरोना के नए मरीज सामने आए हैं। आश्चर्य की बात यह कि इन 50 नए मरीजों में से 45 मरीज वह हैं, जिन्होंने दिल्ली के निजामुद्दीन में हुए मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लिया था। सम्मेलन में तमिलनाडु से शामिल होने वाले 501 जमातियों की पहचान हो गई है।

45 किचेन, रोज बाँटे जा रहे 75000 पैकेट: लगे हैं ‘सेवा भारती’ के 5000 कार्यकर्ता, गोमाता का भी रखा जा रहा ध्यान

पूरी दिल्ली में क्राउड मैनेजमेंट के लिए भी काम किया जा रहा है। जैसे, आनंद विहार में जब केजरीवाल सरकार ने हजारों-लाखों मजदूरों को यूपी सीमा पर ढाह दिया, तब वहाँ अफरातफरी मचने पर 250 संघ कार्यकर्ताओं ने जाकर लोगों को सँभालने में पुलिस की मदद की।

मक्का से लौटे, क्वारंटाइन का नियम तोड़ा, मुहर मिटाई: माँ-बेटे पॉजिटिव, पीलीभीत के 35 लोगों पर मुकदमा

अमरिया क्षेत्र के रहने वाले 35 लोग 25 फरवरी को उमरा करने के लिए सऊदी अरब गए थे, जो कि 20 मार्च को सऊदी अरब से मुंबई के एयरपोर्ट पहुँचे थे, जहाँ सभी की स्क्रीनिंग की गई। जाँच में संदिग्ध पाए जाने पर सभी लोगों को कोरोना वायरस संदिग्ध की मुहर लगाई गई थी।

जम्मू कश्मीर पर भारत को बदनाम करने में लगा है ध्रुव राठी, बलूचिस्तान पर साध लेता है चुप्पी

इसी बीच उसका एक और प्रोपेगंडा सामने आया है। वो कई देशों के स्वतंत्रता संग्राम पर भी वीडियो बनाता रहा है। इस दौरान वो जम्मू कश्मीर का नाम तो लेता है लेकिन कभी भी बलूचिस्तान के बारे में कुछ नहीं कहता।

प्रचलित ख़बरें

रवीश है खोदी पत्रकार, BHU प्रोफेसर ने भोजपुरी में विडियो बनाके रगड़ दी मिर्ची (लाल वाली)

प्रोफेसर कौशल किशोर ने रवीश कुमार को सलाह देते हुए कहा कि वो थोड़ी सकारात्मक बातें भी करें। जब प्रधानमंत्री देश की जनता की परेशानी के लिए क्षमा माँग रहे हैं, ऐसे में रवीश क्या कहते हैं कि देश की सारी जनता मर जाए?

केजरीवाल की खुली पोल: बिजली-पानी काट बॉर्डर पर छोड़ा, UP सरकार की बसें बनी सहारा

लॉकडाउन के बाद दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर गॉंव लौटने के लिए लोगों की भारी भीड़ दिख रही है। अब पता चला है कि इन्हें किस तरह गुमराह किया गया। दिल्ली सरकार के अधिकारी बक़ायदा एनाउंसममेंट कर अफ़वाह फैलाते रहे कि यूपी बॉर्डर पर बसें खड़ी हैं, जो उन्हें घर ले जाएँगी।

800 विदेशी इस्लामिक प्रचारक होंगे ब्लैकलिस्ट: गृह मंत्रालय का फैसला, नियम के खिलाफ घूम-घूम कर रहे थे प्रचार

“वे पर्यटक वीजा पर यहाँ आए थे लेकिन मजहबी सम्मेलनों में भाग ले रहे थे, यह वीजा नियमों के शर्तों का उल्लंघन है। हम लगभग 800 इंडोनेशियाई प्रचारकों को ब्लैकलिस्ट करने जा रहे हैं ताकि भविष्य में वे देश में प्रवेश न कर सकें।”

मेरठ लॉकडाउन: मवाना और सरधना के मस्जिदों में छिपे थे 19 विदेशी मौलवी, प्रशासन को धोखा देने के लिए बाहर से बंद था ताला

मवाना में दारोगा नरेंद्र सिंह ने शहर काजी मौलाना नफीस, एडवोकेट असलम, नईम सौफी समेत अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 188, 269, 270 व 14 विदेशी अधिनियम, महामारी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।

लाल सलाम की फट गई डफली, जिस अंबानी-अडानी को देते थे गाली… वही उद्योगपति आज कर रहे देश की मदद

डफली बजाने से अगर कोरोना से लड़ाई लड़ ली जाती तो शायद आज JNU के वामपंथी ब्रिगेड से ही सबसे ज्यादा डॉक्टर और वैज्ञानिक निकलते। अगर प्रोपेगेंडा पोर्टलों में लेख लिखने से कोरोना भाग जाता तो राणा अयूब, सदानंद धुमे और बरखा दत्त जैसे लोगों ने अब तक वैक्सीन का अविष्कार कर लिया होता।

ऑपइंडिया के सारे लेख, आपके ई-मेल पे पाएं

दिन भर के सारे आर्टिकल्स की लिस्ट अब ई-मेल पे! सब्सक्राइब करने के बाद रोज़ सुबह आपको एक ई-मेल भेजा जाएगा

हमसे जुड़ें

169,325FansLike
52,714FollowersFollow
209,000SubscribersSubscribe
Advertisements