Thursday, January 28, 2021
Home विविध विषय अन्य जिस युद्धकला पर अंग्रेज़ों ने डाली कुदृष्टि, उसे हिन्दुओं ने नृत्य शैली के रूप...

जिस युद्धकला पर अंग्रेज़ों ने डाली कुदृष्टि, उसे हिन्दुओं ने नृत्य शैली के रूप में बचाया

अंग्रेजों के आक्रमण के बाद से जब हिन्दुओं पर शस्त्र रखने और उनके संचालन की शिक्षा-दीक्षा पर पाबन्दी लगी तो अपनी कला को जीवित रखने के लिए इन्होंने एक अनूठा तरीका चुना। तलवार चलाने की कला, नृत्य के रूप में सिखाई जाने लगी।

मराठी में जिसे ‘दंडपट्ट‘ कहते हैं लगभग वैसी ही तलवार को उड़िया में सिर्फ ‘पट्ट’ कहा जाता है। संभवतः आपने इसे किसी संग्रहालय में देखा भी होगा। इसमें कलाई तक ढकने वाली बंधी मुट्ठी के आगे एक धारदार टुकड़ा लगा हुआ दिखता है। देखने में भले ये ऐसा लगता है जैसे इसका इस्तेमाल घोंपने में होता होगा, लेकिन असल में ये छुरे की तरह नहीं बल्कि काटने में इस्तेमाल होने वाली तलवार है। पैदल सैनिकों का सामना बख्तरबंद घुड़सवारों से हो, तो ये तलवार बहुत काम की होती थी। इसके साथ जो दूसरे किस्म की तलवार इस्तेमाल होती थी, उसे खांडा कहा जाता है। मराठा क्षेत्रों में भी ये अक्सर दिख जाएँगी क्योंकि इन इलाकों में जिन फौजों का सामना करना पड़ता था वो अक्सर बख्तरबंद घुड़सवार हमलावर होते थे।


दंडपट्ट (तस्वीर सौजन्य: विकिपीडिया)

पैदल सैनिकों के लिए इस्तेमाल होने वाले संस्कृत शब्द के मामूली से अपभ्रंश से ‘पाइका’ शब्द बना। ये अखाड़े होते थे जो अभी भी ओडिशा में पाए जाते हैं। कलिंग के काल से ही ओडिशा की सैन्य सुरक्षा का काफी हिस्सा इन्हीं ‘पाइका’ अखाड़ों पर निर्भर था। बंगाल के इस्लामिक शासक भी इन्हीं पाइका अखाड़ों के कारण ओडिशा पर विजय नहीं पा सके थे। ऐसे अखाड़ों का नियंत्रण ‘खंडायत’ के हाथ में होता था। इस शब्द में भी फ़ौरन खांडा यानी दूसरी किस्म की तलवार नजर आ जाएगी। सन 1817 में जगबंधु बिद्याधर मोहपात्रा राय के नेतृत्व में पाइका अखाड़ों ने फिरंगियों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूँक दिया था। दूसरे कई विद्रोहों की तरह ही ये विद्रोह भी कुचला गया था।

खांडा (तस्वीर सौजन्य: विकिपीडिया)

गजपति वंश के शासन काल में पाइका अखाड़े अपने चरम पर थे। अंग्रेजों का समय आने तक इनकी क्षमता लगातार इस्लामिक आक्रमणों के कारण काफी कम पड़ चुकी होगी। अंग्रेजों के आक्रमण के बाद से जब हिन्दुओं पर शस्त्र रखने और उनके संचालन की शिक्षा-दीक्षा पर पाबन्दी लगी तो अपनी कला को जीवित रखने के लिए इन्होंने एक अनूठा तरीका चुना। तलवार चलाने की कला, नृत्य के रूप में सिखाई जाने लगी। आज जो कलाएँ बिहार में परी-खांडा और ओडिशा में छाऊ नृत्य के नाम से जानी जाती हैं, ये वही तलवारबाजी के करतब होते हैं। छाऊ शब्द भी सेना की छावनी शब्द से ही बना हुआ है। अभी भी पाइका अखाड़े अपनी कला का प्रदर्शन दुर्गा-पूजा या नवरात्रि के अवसर पर करते हैं।

कल (22 जुलाई 2019) जब जगन्नाथ पुरी के एक पुजारी की तस्वीरें इन्टरनेट पर नजर आने लगीं तो कुछ तथाकथित हिन्दुओं की मासूम, अहिंसक, गाँधीवादी, सेक्युलर भावना बड़ी बुरी तरह आहत हो गईं। गोरे साहबों के जाने के बाद आए भूरे साहबों ने भी भारतीय युद्धकलाओं की हत्या करने में उससे ज्यादा तत्परता दिखाई थी, जितनी उनके गोरे साहब दिखा पाते। इस वजह से शारीरिक शौष्ठव, शस्त्र इत्यादि देखकर उनका छाती कूट कुहर्रम मचाना कोई आश्चर्यजनक भी नहीं। अब अगर वापस पट्ट नाम के इस हथियार की ओर आएँ तो ये सबसे भयावह हथियारों में से एक माना जाता था। ऐसा इसलिए था क्योंकि अक्सर योद्धा इसका प्रयोग अपने अंतिम समय में करना शुरू करते थे।

कई बार दो-दो के जोड़ों में योद्धा पट्ट चलाना शुरू करते, कलाई इसके दस्ते को पकड़ने पर मुड़े नहीं इसलिए ये दो लोगों के सम्मिलित नृत्य जैसा कुछ दृश्य होता होगा। ये एक तथ्य है कि मराठा सैनिक गिरते समय इसका इस्तेमाल करते थे ताकि अपने साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा मलेच्छ शत्रुओं को भी लिए जाएँ। दो की जोड़ी में अगर पट्ट चलाया जा रहा हो तो अन्दर प्रवेश करके चलाने वालों पर प्रहार करना बहुत मुश्किल होगा। अब पहली किस्म के खड़ग यानी खांडा से तो खंडायत नाम बना था, दूसरे किस्म के लिए पट्टनायक नाम के बारे में सोचिये।

बाकी जब याद आ जाए कि जाने-माने लेखक देवदत्त पट्टनायक के नाम में आपको नायक शब्द का मतलब तो पता है, तब ये सोचिएगा कि भला ये ‘पट्ट’ क्या होता होगा? तब तक पाइका अखाड़ों और पाइका विद्रोह भी पढ़िएगा। हम बताते चलें कि शेखुलरों के लिए ओडिशा का इतिहास हजम करने में दिक्कत होनी तय है!

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Anand Kumarhttp://www.baklol.co
Tread cautiously, here sentiments may get hurt!

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

UP पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से हटाया ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों को, लोग कह रहे – बिजली काट मार-मार कर भगाया

नेशनल हाईवे अथॉरिटी के निवेदन पर बागपत प्रशासन ने किसान प्रदर्शकारियों को विरोध स्थल से हटाते हुए धरनास्थल को शांतिपूर्ण तरीके से खाली करवा दिया है।

दीप सिद्धू और गैंगस्टर लक्खा पर FIR दर्ज, नाम उछलते ही गायब हुए पंजाबी अभिनेता सिद्धू

26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले में हुई हिंसा के संबंध में पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू और गैंगस्टर लक्खा सिधाना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

‘छात्र’ हैं, ‘महिलाएँ’ हैं, ‘अल्पसंख्यक’ हैं और अब ‘किसान’ हैं: लट्ठ नहीं बजे तो कल और भी आएँगे, हिंसा का नंगा नाच यूँ ही...

हिन्दू वोट भी दे, अपना कामधाम भी करे और अब सड़क पर आकर इन दंगाइयों से लड़े भी? अगर कल सख्त कार्रवाई हुई होती तो ये आज निकलने से पहले 100 बार सोचते।

कल तक क्रांति की बातें कर रहे किसान समर्थक दीप सिद्धू के वीडियो डिलीट कर रही है कॉन्ग्रेस, जानिए वजह

एक समय किसान विरोध प्रदर्शनों को 'क्रांति' बताने वाले दीप सिद्धू को लिबरल गिरोह, कॉन्ग्रेस और किसान नेता भी अब अपनाने से इंकार कर रहे हैं।

किसानों नेताओं ने हिंसा भड़काई, धार्मिक झंडे लहराए और विश्वासघात किया: दिल्ली पुलिस

गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान आन्दोलनकारियों के लाल किले पर उपद्रव के बाद दिल्ली पुलिस आज शाम 8 बजे प्रेस वार्ता कर रही है।

घायल पुलिसकर्मियों ने बयान किया हिंसा का आँखों देखा मंजर: लाल किला, ITO, नांगलोई समेत कई जगहों पर थी तैनाती

"कई हिंसक लोग अचानक लाल किला पहुँच गए। नशे में धुत किसान या वे जो भी थे, उन्होंने हम पर अचानक तलवार, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया।"

प्रचलित ख़बरें

लाइव TV में दिख गया सच तो NDTV ने यूट्यूब वीडियो में की एडिटिंग, दंगाइयों के कुकर्म पर रवीश की लीपा-पोती

हर जगह 'किसानों' की थू-थू हो रही, लेकिन NDTV के रवीश कुमार अब भी हिंसक तत्वों के कुकर्मों पर लीपा-पोती करके उसे ढकने की कोशिशों में लगे हैं।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

हिंदुओं को धमकी देने वाले के अब्बा, मोदी को 420 कहने वाले मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता: ‘लोकतंत्र की हत्या’ गैंग के मुँह पर 3...

पद्म पुरस्कारों में 3 नाम ऐसे हैं, जो ध्यान खींच रहे- मौलाना वहीदुद्दीन खान (पद्म विभूषण), तरुण गोगोई (पद्म भूषण) और कल्बे सादिक (पद्म भूषण)।

अब पूरे देश में ‘किसान’ करेंगे विरोध प्रदर्शन, हिंसा के लिए माँगी ‘माफी’… लेकिन अगला निशाना संसद को बताया

दिल्ली में हुई हिंसा पर किसान नेता 'गलती' मान रहे लेकिन बेशर्मी से बचाव भी कर रहे और पूरे देश में विरोध प्रदर्शन की बातें कर रहे।

26 जनवरी 1990: संविधान की रोशनी में डूब गया इस्लामिक आतंकवाद, भारत को जीतना ही था

19 जनवरी 1990 की भयावह घटनाएँ बस शुरुआत थी। अंतिम प्रहार 26 जनवरी को होना था, जो उस साल जुमे के दिन थी। 10 लाख लोग जुटते। आजादी के नारे लगते। गोलियॉं चलती। तिरंगा जलता और इस्लामिक झंडा लहराता। लेकिन...
- विज्ञापन -

 

UP पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से हटाया ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों को, लोग कह रहे – बिजली काट मार-मार कर भगाया

नेशनल हाईवे अथॉरिटी के निवेदन पर बागपत प्रशासन ने किसान प्रदर्शकारियों को विरोध स्थल से हटाते हुए धरनास्थल को शांतिपूर्ण तरीके से खाली करवा दिया है।

दीप सिद्धू और गैंगस्टर लक्खा पर FIR दर्ज, नाम उछलते ही गायब हुए पंजाबी अभिनेता सिद्धू

26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले में हुई हिंसा के संबंध में पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू और गैंगस्टर लक्खा सिधाना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

किसान नहीं बल्कि पुलिस हुई थी हिंसक: दिग्विजय सिंह ने दिल्ली पुलिस को ही ठहराया दंगों का दोषी

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि दिल्ली में किसान उग्र नहीं हुए थे बल्कि दिल्ली पुलिस उग्र हुई थी।

‘छात्र’ हैं, ‘महिलाएँ’ हैं, ‘अल्पसंख्यक’ हैं और अब ‘किसान’ हैं: लट्ठ नहीं बजे तो कल और भी आएँगे, हिंसा का नंगा नाच यूँ ही...

हिन्दू वोट भी दे, अपना कामधाम भी करे और अब सड़क पर आकर इन दंगाइयों से लड़े भी? अगर कल सख्त कार्रवाई हुई होती तो ये आज निकलने से पहले 100 बार सोचते।

कल तक क्रांति की बातें कर रहे किसान समर्थक दीप सिद्धू के वीडियो डिलीट कर रही है कॉन्ग्रेस, जानिए वजह

एक समय किसान विरोध प्रदर्शनों को 'क्रांति' बताने वाले दीप सिद्धू को लिबरल गिरोह, कॉन्ग्रेस और किसान नेता भी अब अपनाने से इंकार कर रहे हैं।

ट्रैक्टर रैली में हिंसा के बाद ट्विटर ने किया 550 अकाउंट्स सस्पेंड, रखी जा रही है सबपर पैनी नजर

ट्विटर की ओर से कहा गया है कि इसने उन ट्वीट्स पर लेबल लगाए हैं जो मीडिया पॉलिसी का उल्लंघन करते हुए पाए गए। इन अकाउंट्स पर पैनी नजर रखी जा रही है।

वीडियो: खालिस्तान जिंदाबाद कहते हुए तिरंगा जलाया, किसानों के ‘आतंक’ से परेशान बीमार बुजुर्ग धरने पर बैठे

वीडियो में बुजुर्ग आदमी सड़क पर बैठे हैं और वहाँ से उठते हुए कहते हैं, "ये बोलते है आगे जाओगे तो मारूँगा। अरे क्या गुनाह किया है? हम यहाँ से निकले नहीं? हमारे रास्ते में आ गए।"

किसानों नेताओं ने हिंसा भड़काई, धार्मिक झंडे लहराए और विश्वासघात किया: दिल्ली पुलिस

गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान आन्दोलनकारियों के लाल किले पर उपद्रव के बाद दिल्ली पुलिस आज शाम 8 बजे प्रेस वार्ता कर रही है।

घायल पुलिसकर्मियों ने बयान किया हिंसा का आँखों देखा मंजर: लाल किला, ITO, नांगलोई समेत कई जगहों पर थी तैनाती

"कई हिंसक लोग अचानक लाल किला पहुँच गए। नशे में धुत किसान या वे जो भी थे, उन्होंने हम पर अचानक तलवार, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया।"

बिहार में टेंपो में सवार 2-3 लोगों ने दिनदहाड़े बीजेपी प्रवक्ता को मारी दो गोली: स्थिति नाजुक

कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ललन प्रसाद सिंह से प्रभार को लेकर डॉ शम्शी का विवाद चल रहा था। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से इलाके में हड़कंप मच गया है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
387,000SubscribersSubscribe