Pak ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को लिखा लेटर, जवाब मिला – No Comments

अभी तक पाकिस्तान ने जिन देशों से भी इस मसले पर मदद की गुहार लगाई है, सबसे पाकिस्तान को निशारा ही हाथ लगी है। क्योंकि ज्यादातर देश इसे भारत का आंतरिक मामला ही मानते हैं।

भारत द्वारा कश्मीर पर लिए फैसले के बाद से पाकिस्तान लगातार संयुक्त राष्ट्र (UN) तक मामले को ले जाने की बात कर रहा था। जिसके संबंध में उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को दखल देने के लिहाज से पत्र भी लिखा, लेकिन UNSC की अध्यक्ष ने पाकिस्तान के इस पत्र पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक UNSC की अध्यक्ष ने न्यूयॉर्क में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्‍तान द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संबंध में लिखे गए पत्र पर पूछे गए सवाल को गंभीरता से सुनने के बाद ‘नो कमेंट्स’ में जवाब दिया। साथ ही यूएन ने पाकिस्तान को 1972 शिमला समझौते का रास्ता भी दिखाया।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने भी गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को जम्मू और कश्मीर में मौजूदा स्थिति पर अधिकतम संयम बरतने की अपील की और कश्मीर के समाधान के लिए पाकिस्तान को द्विपक्षीय शिमला समझौते का निर्देश दिया।

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इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी अपने जारी बयान में स्पष्ट किया कि कश्मीर मसले पर अमेरिका की नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा।

मंत्रालय की प्रवक्‍ता मॉर्गन ओर्टागस ने मीडिया से बातचीत में बताया वह कश्मीर मामले पर काफी नजदीक से नजर बनाए हुए हैं। और कई मुद्दों पर वह भारत और पाकिस्तान के साथ काफ़ी नजदीक से काम कर रहे हैं। उनकी मानें तो अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप-सचिव जल्द ही भूटान और भारत का दौरा करेंगे। जहाँ वह दोनों देशों के साथ अमेरिका के संबंधों को और अच्छा बनाने पर गौर करेंगे।

गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा अलग-अलग तरीकों से पाकिस्तान की दरख्वास्त खारिज होने के बाद पाकिस्तान अब चीन की शरण भी ले सकता है। क्योंकि इन दिनों विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन के दौरे पर हैं। जहाँ वे चीन के विदेश मंत्री वांग यी और अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे और मुमकिन है कि इस दौरान वे जम्मू-कश्मीर का मुद्दा प्रमुखता से उठाएँगे।

UNSC की अध्यक्ष द्वारा पाकिस्तान पर ‘नो कमेंट्स’ वाली टिप्पणी करने से पहले अमेरिका के दो नेता भी पाकिस्तान को भारत के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से बचने की बात बोल चुके हैं और उन्हें कह चुके हैं कि वह अपनी सरजमीं पर पल रहे आतंकी गुटों से निबटने पर ध्यान दें।

इन सबके अतिरिक्त बता दें कि अभी तक पाकिस्तान ने जिन देशों ने भी इस मसले पर मदद की गुहार लगाई है, सबसे पाकिस्तान को निशारा ही हाथ लगी है। क्योंकि ज्यादातर देश इसे भारत का आंतरिक मामला ही मानते हैं।

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