Tuesday, September 21, 2021
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कैलाशनाथ मंदिर जिसे कहा गया ‘कांची का महान रत्न’: जिसकी प्रेरणा से हुआ बृहदेश्वर और विरुपाक्ष जैसे मंदिरों का निर्माण

कैलाशनाथ संभवतः दक्षिण भारत का ऐसा मंदिर है जिसमें पत्थरों के टुकड़ों को आपस में जोड़कर बनाया गया है। कांचीपुरम के इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ मुख्य मंदिर परिसर में 58 छोटे-छोटे मंदिरों का निर्माण किया गया है।

हिन्दुओं के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है कांचीपुरम। मंदिरों की नगरी कहे जाने वाले इस शहर में कई ऐसे मंदिर स्थित हैं जो प्राचीनकाल से ही हिन्दुओं के लिए बहुत महत्व के हैं और अपनी भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। कांचीपुरम के इन्हीं मंदिरों में एक कैलाशनाथ मंदिर है जिसे कांचीपुरम का रत्न कहा जाता है। लगभग 1,300 साल पुराना यह मंदिर आज भी अपनी संरचना से यहाँ आने वाले लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

मंदिर का इतिहास

तमिलनाडु के कांचीपुरम का कैलाशनाथ या कैलाशनाथर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव, भगवान विष्णु, देवी, सूर्य, गणेश जी और कार्तिकेय की उपासना करने के लिए बनाया गया था। कांचीपुरम, पल्लव वंश के शासकों की राजधानी हुआ करती थी। कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण भी पल्लव वंश के राजाओं द्वारा किया गया था। अभी तक प्राप्त प्रमाणों से यह जानकारी मिलती है कि मंदिर का निर्माण 7वीं-8वीं शताब्दी के दौरान पल्लव राजा महेंद्रवर्मन द्वितीय ने कराया था। इसके अलावा महेंद्रवर्मन तृतीय के द्वारा भी मंदिर के सम्मुख भाग और गोपुरम के निर्माण की जानकारी मिलती है।

मंदिर की संरचना

कांचीपुरम के कैलाशनाथ मंदिर की संरचना ही उसे बाकि मंदिरों से अलग बनाती है। कहा जाता है कि बृहदेश्वर और विरुपाक्ष जैसे जिन मंदिरों को स्थापत्यकला का बेजोड़ नमूना माना जाता है, वो मंदिर भी कैलाशनाथ मंदिर की प्रेरणा से बनाए गए। संभवतः यही कारण है कि इसे ‘कांचीपुरम का महान रत्न’ कहा गया है। प्रख्यात पुरातत्वविद डॉ. आर नागस्वामी का मानना है कि कैलाशनाथ संभवतः दक्षिण भारत का ऐसा मंदिर है जिसमें पत्थरों के टुकड़ों को आपस में जोड़कर बनाया गया है। कांचीपुरम के इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ मुख्य मंदिर परिसर में 58 छोटे-छोटे मंदिरों का निर्माण किया गया है।

मंदिर के आधार का निर्माण ग्रेनाइट से हुआ है और मंदिर का निर्माण सैंडस्टोन से। मंदिर के प्रवेश द्वार पर बनी दीवार पर 8 तीर्थ क्षेत्र हैं। इनमें से दो प्रवेश द्वार के बाईं ओर हैं जबकि 6 दाईं ओर। गर्भगृह के ऊपर द्रविड़ वास्तुकला में विमान का निर्माण किया गया है। गर्भगृह में ग्रेनाइट से बना एक अद्भुत और विशालकाय शिवलिंग स्थापित है। गर्भगृह के चारों ओर स्थित दीवारों पर भगवान शिव के लिंगोद्भव, उर्ध्व तांडवमूर्ति, त्रिपुरान्तक और हरिहर जैसे रूपों को उत्कीर्णित किया गया है। मंदिर के स्तंभों पर विभिन्न देवी-देवताओं के अलावा सिंह (शेर) की कलाकृतियों को प्रमुख रूप से दर्शाया गया है।

वैसे तो भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में सोमवार, श्रावण मास और महाशिवरात्रि को हिन्दुओं की अच्छी-खासी भीड़ देखी जाती है। साथ ही कई अन्य त्यौहारों में भी यहाँ भक्तों का मेला लगा रहता है लेकिन आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य के अलावा इस मंदिर में कला एवं पुरातात्विक रुचि वाले लोगों का आना-जाना भी बना रहता है।

कैसे पहुँचे?

कांचीपुरम पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो कैलाशनाथ मंदिर से मात्र 65 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा कांचीपुरम ट्रेन की सहायता से आसानी से पहुँचा जा सकता है। चेन्नई से ट्रेन के माध्यम से भी कांचीपुरम पहुँचा जा सकता है। चूँकि चेन्नई में कई रेलवे स्टेशन हैं, ऐसे में चेन्नई से कांचीपुरम पहुँचने के लिए कई अलग-अलग ट्रेनें विभिन्न समय पर कांचीपुरम पहुँचती हैं।

सड़क मार्ग से भी कांचीपुरम पहुँचना आसान है क्योंकि यहाँ सड़कों का एक बेहतर नेटवर्क है। चेन्नई से कांचीपुरम की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 75 किमी है। इसके अलावा कांचीपुरम तमिलनाडु के कई शहरों और बेंगलुरू जैसे महानगरों से भी सड़क के माध्यम से जुड़ा हुआ है।

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ओम द्विवेदी
Writer. Part time poet and photographer.

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