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छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का कमाल: 100 सवाल, 41 गलतियाँ, हाई कोर्ट ने रद्द की परीक्षा

जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल जज बेंच ने परीक्षा परिणाम के खिलाफ 10 याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर ‌रिट पेटिशन्स की सुनवाई में कहा कि जिस प्रकार पूरी परीक्षा ली गई है, उसे जारी नहीं रखा जा सकता।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सिविल जज भर्ती परीक्षा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रद्द कर दी है। इस परीक्षा में कई प्रश्नों पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी। प्रश्न पत्र में गलतियों की भरमरार थी। इसे देखते हुए हाई कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर अब इन पदों के लिए दोबारा परीक्षा ली जाएगी। साथ ही अदालत ने परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों से दोबारा होने वाली परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई शुल्क नहीं लेने का निर्देश भी आयोग को दिया।

बता दें कि राज्य के विभिन्न न्यायालयों में रिक्त सिविल जजों के पदों पर भर्ती के लिए मई 2019 को राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से परीक्षा आयोजित की गई थी। लोक सेवा आयोग ने जुलाई में इस परीक्षा का रिजल्ट भी जारी कर दिया था। मामले में जस्टिस गौतम भादुड़ी की बेंच ने सुनवाई करते हुए परीक्षा और परिणाम को रद्द करने का फैसला सुनाया।

कोर्ट ने ये फैसला परीक्षा के लिए प्रकाशित उत्तर कुंजी में शामिल 100 प्रश्नों में 41 गलतियाँ पाए जाने के बाद दिया। जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल जज बेंच ने परीक्षा परिणाम के खिलाफ 10 याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर ‌रिट पेटिशन्स की सुनवाई में कहा कि जिस प्रकार पूरी परीक्षा ली गई है, उसे जारी नहीं रखा जा सकता। 

उन्होंने कहा कि कोर्ट का मानना है कि 100 में 41 सवाल और जवाब गलत पाए गए हैं, इसका प्रतिशत निश्चित रूप से चयन प्रक्रिया के मॉड्यूल को कमजोर करेगा और न्यायालय इस पर मौन धारण नहीं कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से पूरी परीक्षा आयोजित की गई थी उसे बरकरार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार परीक्षा में पूछे गए 100 प्रश्नों में से 30 से अधिक प्रश्न स्पष्ट रूप से गलत पाए गए। इसके अलावा कुछ प्रश्नों में वाक्यांश और वर्तनी की गलतियाँ थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रश्नपत्र के अंग्रेजी और हिंदी संस्करण में प्रश्नों और उत्तर के अनुवाद में भी अंतर था।

सुनवाई के दौरान पीएससी के तरफ से इस बात पर आपत्ति की गई कि मॉडल उत्तर कुंजी एक्सपर्ट द्वारा जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक्सपर्ट द्वारा जारी उत्तर पर न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकती।‌ न्यायालय ने पीएससी के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह परीक्षा विधि से संबंधित है, इसलिए इस पर हस्तक्षेप करना जरूरी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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