Homeविविध विषयअन्यअमित शाह के महकमे में 'स्पेशल 44', हरेक आतंकी और उसकी संपत्ति पर होगी...

अमित शाह के महकमे में ‘स्पेशल 44’, हरेक आतंकी और उसकी संपत्ति पर होगी नजर: जब्ती का भी होगा अधिकार

इन 44 अधिकारियों का विदेश मंत्रालय सहित सभी सम्बद्ध मंत्रालयों से तालमेल होगा। इनके पास उन आतंकियों की सूची व विवरण होंगे, जिन्हें UN ने ब्लैकलिस्ट कर रखा है। साथ ही ये राज्यों के साथ भी कंधे से कंधा मिला कर काम करेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘गैर-क़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA)’ आरोपितों, उनकी संपत्ति और उनके वित्तीय लेनदेन पर नज़र रखने के लिए 44 अधिकारियों की एक टीम गठित की है। यह टीम न सिर्फ UAPA आरोपितों की गतिविधियों पर नज़र रखेगी बल्कि उनके पूरे वित्तीय नेटवर्क को ट्रैक करेगी। इससे हवाला और अवैध लेनदेन के नेटवर्क का भी खुलासा होगा।

गृह मंत्रालय की इस स्पेशल टीम में 44 अधिकारियों को शामिल किया गया है। इंटेलीजेंस ब्यूरो(IB), फाइनेंसियल इंटेलिजेंस (FIU), RBI, गृह मंत्रालय, सेबी, राज्यों की ATS, राज्यों की CID सहित कई विभागों के बड़े अधिकारियों को इस टीम में रखा गया है। जिन भी लोगों पर UAPA के तहत केस दर्ज हैं, ये 44 अधिकारियों की टीम उन पर नज़र रखेगी। उनके पास आतंकियों की संपत्ति जब्त या फ्रीज करने का भी पूरा अधिकार होगा।

इन 44 अधिकारियों का विदेश मंत्रालय सहित सभी सम्बद्ध मंत्रालयों से तालमेल होगा। इनके पास उन आतंकियों की सूची व विवरण होंगे, जिन्हें UN ने ब्लैकलिस्ट कर रखा है। साथ ही ये राज्यों के साथ भी कंधे से कंधा मिला कर काम करेंगे। राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय बना कर काम करने वाले गृह मंत्रालय के ये 44 अधिकारी UAPA आरोपितों की संपत्ति को जब्त कर सकेंगे और उनकी निगरानी करेंगे।

गृह मंत्रालय ने इन्हें टास्क दिया है कि ये UAPA आरोपितों की सूची में से हर एक ही संपत्ति और वित्तीय स्रोत का पता लगाएँ और राज्यों के सहयोग से उन्हें जब्त करने की दिशा में काम शुरू करें। अब तक UAPA कानून के अंतर्गत दाऊद इब्राहिम, मसूद अज़हर, जाकिर-उर-रहमान लखवी और हाफिज सईद को गृह मंत्रालय द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया है। साथ ही 9 खालिस्तानी आतंकियों को भी व्यक्तिगत रूप से आतंकी घोषित किया गया है।

बता दें कि उक्त क़ानून को 1967 में संसद द्वारा पारित किया गया था। इसका उद्देश्य है कि देश की अखंडता और सम्प्रभुता को नुकसान पहुँचाने वालों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही उनकी हातिविधियों पर भी लगाम कसी जाए। इस क़ानून के अंतर्गत आरोपितों को न्यूनतम 7 वर्षों की सज़ा दी जाती है। अब तक इस क़ानून में कई बार संशोधन किए जा चुके हैं। ये एक बहुत ही कड़ा क़ानून है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
- विज्ञापन -