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ICC का दोहरा रवैया: मैदान पर नमाज पढ़ना सही, धोनी के बैज से है दिक्कत

तारेक फतेह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि आईसीसी को पूरी पाकिस्तान टीम से कोई दिक्कत नहीं होती, जो खेल के मैदान ईसाइयों और यहूदियों की निंदा करते हुए नमाज पढ़ती है, लेकिन उन्हें धोनी के दस्तानों पर बने बलिदान के निशान से आपत्ति है।

आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 में महेंद्र सिंह धोनी के विकेटकीपिंग दस्ताने विवाद का मुद्दा बन गए है। दरअसल, धोनी के इन ग्लव्स पर भारतीय सेना के स्पेशल फ़ोर्स का ‘बलिदान’ बैज लगा है, जिसपर आईसीसी ने आपत्ति जताई है। आईसीसी ने धोनी को अपने दस्ताने से बैज हटाने को कहा है। हालाँकि इस मामले पर बीसीसीआई की बैठक मुंबई में हुई। बीसीसीआई का कहना है कि धोनी का बैज न राजनैतिक है, न ही कमर्शियल है और न ही धार्मिक, इसमें आपत्ति का कोई सवाल ही नहीं है।

बीसीसीआई ने इस बात का भी खुलासा किया कि धोनी के दस्तानों के लिए बीसीसीआई ने आईसीसी पहले ही इजाजत माँग ली थी। ऐसे में सवाल उठता है कि इजाजत देने के बाद आपत्ति क्यों जताई जा रही है। इस मामले पर वीडियो कॉल के जरिए कप्तान विराट कोहली और टीम मैनेजमेंट के बीच चर्चा होगी।

आईसीसी की इस आपत्ति के बाद पाकिस्तान सरकार के मंत्री फवाद हुसैन ने धोनी के ख़िलाफ़ बयान दिया है। फवाद ने कहा है, “धोनी इंग्लैंड में क्रिकेट खेलने के लिए गए हैं न कि महाभारत के लिए। भारतीय मीडिया में यह क्या बहस चल रही है… मीडिया का एक वर्ग युद्ध से इतना प्रभावित है कि उन्हें सीरिया, अफगानिस्तान या रवांडा भेजा जाना चाहिए।”

जबकि आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने इस मुद्दे पर कहा है कि आइसीसी को अपने इस नियम पर दोबारा से पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि ये नियम व्यवसायिक प्रतिबद्धता के लिए लागू होता है। राजीव ने कहा कि महेंद्र सिंह धोनी सिर्फ़ देश की सेना के लिए अपनी भावनाओं को प्रकट कर रहे हैं, उन्होंने किसी तरह का कोई नियम नहीं तोड़ा है।

इसी तरह मशहूर लेखक तारेक फतेह ने भी महेंद्र सिंह धोनी के समर्थन में आवाज़ उठाई है। तारेक फतेह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि आईसीसी को पूरी पाकिस्तान टीम से कोई दिक्कत नहीं होती, जो खेल के मैदान ईसाइयों और यहूदियों की निंदा करते हुए नमाज पढ़ती है, लेकिन उन्हें धोनी के दस्तानों पर बने बलिदान के निशान से आपत्ति है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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