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CRPF जवान ने बचाई पीठासीन अधिकारी की जान, किसी कश्मीरी नेता ने नहीं की प्रशंसा

अगर सेना राष्ट्र-विरोधी तत्वों से छुटकारा पाने की कोशिश करती है तो उन पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया जाता है, लेकिन जब एक जवान ने मानव जीवन बचाया है तो पूरा कश्मीर चुप है।

श्रीनगर में गुरूवार (अप्रैल 18, 2019) को सीआरपीएफ के एक जवान ने मतदान करने आए कश्मीरी चुनाव अधिकारी की जान बचाई। चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनाव अधिकारी अहसान-उल-हक की तबियत बिगड़ गई, उन्हें हार्ट अटैक आ गया। बटालियन 28 के कॉन्सटेबल सुरिंदर कुमार उस समय बुचपोरा के गर्ल्स स्कूल में तैनात थे, उन्होंने चुनाव अधिकारी की ये हालत देखी, जिसके बाद उन्हें प्राथमिक इलाज दिया गया मगर उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया, वो बेहोश हो गए।

चुनाव अधिकारी की ये हालत देखकर सुरिंदर कुमार ने तुरंत अपनी मेडिकल टीम से संपर्क किया। सीआरपीएफ के सीनियर डॉक्टर सुनीम खान ने उन्हें फोन पर निर्देश दिया, उनके निर्देशानुसार सुरिंदर ने 50 मिनट तक चेस्ट कंप्रेशन और मुँह से श्वास दिया। इस बीच सीआरपीएफ ने मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए तुरंत एम्बुलेंस भी भेज दी। जिसके बाद हसन-उल-हक को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि सीआरपीएफ जवान सुरिंदर कुमार और डॉक्टर सुनीम खान के समय पर उपचार करने की वजह से मरीज की जान बच गई।

इस तरह सीआरपीएफ के जवान ने पोल ड्यूटी पर तैनात एक चुनाव अधिकारी की जान बचाई, लेकिन किसी कश्मीरी नेता ने सेना का शुक्रिया अदा करने की जहमत नहीं उठाई। इस बारे में एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अगर सेना राष्ट्र-विरोधी तत्वों से छुटकारा पाने की कोशिश करती है तो उन पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया जाता है, लेकिन जब एक जवान ने किसी का जीवन बचाया है तो पूरा कश्मीर चुप है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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