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‘मेरे पास शब्द नहीं, ये बहुत सुंदर है’ : नए संसद भवन को देख मोहित हुईं पद्मश्री सुधा मूर्ति, कहा- मैं पूरा दिन यहाँ बिताना चाहती हूँ

सुधा मूर्ति ने संसद को देखने के बाद कहा, "यह सच में बहुत सुंदर है…मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं इनका वर्णन करूँ। मैं इसे बहुत लंबे समय तक देखना चाहती हूँ। जैसे कोई सपना पूरा हुआ हो। बहुत सुंदर है। कला, संस्कृति और भारतीय साहित्य- सब कुछ सुंदर है।"

इंफोसिस के नारायणमूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति ने पहली बार संसद का दौरा किया। सुधा मूर्ति संसद के नए और पुराने भवन को देखने के बाद मीडिया से बात करते हुए अपनी खुशी जाहिर की।

समाचार एजेंसी एएऩआई से बता करते हुए उन्होंने कहा, “यह सच में बहुत सुंदर है…मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं इनका वर्णन करूँ। मैं इसे बहुत लंबे समय तक देखना चाहती हूँ। जैसे कोई सपना पूरा हुआ हो। बहुत सुंदर है। कला, संस्कृति और भारतीय साहित्य- सब कुछ सुंदर है।”

उन्होंने कहा, “मुझे नई बिल्डिंग अच्छी लगी, मैंने दोनों बिल्डिंग को पहली बार देखा, आर्ट-कल्चर इंडियन हिस्ट्री सब कुछ है। सब कुछ बहुत बढ़िया है। सब कुछ अच्छे तरीके से रखा गया है व्यवस्थित ढंग से। मैं पूरा दिन बिताना चाहती थी यह सब देखने के लिए जो देखा उसे मैंने एंजॉय किया।” जब उनसे पूछा गया कि क्या आप वो राजनीति में आना चाहती हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा- “मैं जो हूँ उसमें खुश हूँ।”

बता दें कि सुधा मूर्ति की पहचान सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका के तौर पर होती है। वह पद्मभूषण और पद्मश्री से सम्मानित की जा चुकी हैं। उन्होंने 8 उपन्यास लिखे हैं। वह ऑटो निर्माता इंजीनियर और लोकोमोटिव कंपनी टेल्को में काम करने वाली पहली महिला इंजीनियर भी हैं। उनके पति जहाँ इंफोसिस कंपनी के संस्थापक हैं तो बेटी अक्षता नारायण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी हैं। शिक्षा क्षेत्र में उपलब्धि की बात करें तो उन्होंने बीवीबी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलजी, हुबली से इलेक्टिकल इंजिनियरिंग में ग्रेजुएशन किया था। उस समय भी वह इंजीनियरिंग कॉलेज में 150 स्टूडेंट के बीच दाखिला पाने वाली पहली महिला थीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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