निकाह हलाला और बहुविवाह के ख़िलाफ़ दाखिल याचिका पर जल्द सुनवाई करने से SC ने किया इनकार

इससे पहले नफीसा द्वारा दायर याचिका में उन्होंने कहा था कि आईपीसी की सभी धाराएँ नागरिकों पर बराबरी से लागू होनी चाहिए। उनका कहना था कि आईपीसी की धारा 498ए के तहत तीन तलाक क्रूर माना जाता है, और धारा 494 के तहत बहुविवाह एक अपराध है।

भाजपा नेता एवं वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा निकाह हलाला और बहुविवाह के ख़िलाफ़ जल्द सुनवाई के लिए दायर की गई याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। इस याचिका में माँग की गई थी कि इस मसले को जल्द से जल्द सुना जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

आजतक की खबर के अनुसार अदालत की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले पर जल्द सुनवाई नहीं हो सकती है और न ही अभी संविधान पीठ के गठन की गुँजाइश है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय में इससे पहले इस मामले में चार याचिकाएँ दायर हो चुकी हैं। नफीसा खान सहित भाजपा और अन्य हिंदू संगठन भी न्यायालय में इन प्रथाओं पर रोक लगाने व इन्हें असंवैधानिक करार देने की माँग कर चुके हैं

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जानकारी के अनुसार नफीसा द्वारा दायर याचिका में उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि आईपीसी की सभी धाराएँ नागरिकों पर बराबरी से लागू होनी चाहिए। उनका कहना था कि आईपीसी की धारा 498ए के तहत तीन तलाक क्रूर माना जाता है, और धारा 494 के तहत बहुविवाह एक अपराध माना जाता है। ऐसे में इन प्रथाओं पर रोक लगाई जानी चाहिए।

जबकि अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि बहुविवाह और हलाला अनुच्छेद-14 (विधि के समक्ष समानता), 15 (धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक) और 21 (जीवन जीने का अधिकार) तथा लोक व्यवस्था, नैतिकता एवं स्वास्थ्य के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों के लिए नुकसानदेह है। इसलिए इन प्रथाओं पर रोक लगानी चाहिए।

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