Homeविविध विषयअन्य1200 यहूदियों की हत्या को स्वरा भास्कर ने धोया-पोंछा, हमास आतंकियों पर नहीं फूटा...

1200 यहूदियों की हत्या को स्वरा भास्कर ने धोया-पोंछा, हमास आतंकियों पर नहीं फूटा बोल, गाजा पर रोना-धोना: ये मक्कारी नहीं तो और क्या?

ऐसा पहली बार भी नहीं है जब स्वरा ने इस तरह की हिमाकत की हो, जिस दिन हमास के आतंकियों ने हमला किया उस दिन से ही स्वरा ने हमास के आतंकियों को बचाना शुरू कर दिया था।

हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर वीभत्स आतंकी हमला किया था। महिलाओं और बच्चों समेत हजारों लोगों को मारा गया, रेप किए और सैकड़ों लोग बंधक बनाए गए। इसके जवाब में जब इजरायल ने गाजा में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया तो तथाकथित सेकुलर जमात का रोना शुरू हो गया।

स्वरा भास्कर जैसे लोग हमास के आतंकियों पर सवाल उठाने के बजाय इजरायल को ही इसका सारा दोष दे रहे हैं। मुंबई के आजाद मैदान में बुधवार (20 मार्च 2025) को गाजा के समर्थन में करीब 200 लोग इकट्ठा हुए। इस भारी भीड़ की माँग थी कि इजरायल अपने हमले बंद कर दे। स्वरा भास्कर ने भी इस सभा में तकरीर की और इजरायल पर किए गए हमले को ‘वाइटवॉश’ करने की कोशिश की।

स्वरा ने हमास के आतंकियों के कुकृत्यों को जायज ठहराने की भी पूरी कोशिश की। स्वरा ने कहा, “जो 7 अक्टूबर को हुआ जिसमें 1,200 इजरायल के नागरिक मारे गए। इसमें कोई शक नहीं है कि किसी भी दुनिया में किसी भी जगह पर किसी नागरिक की जान जाए तो यह दुख की बात है। लेकिन ऐसा दिखाना कि इतिहास की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 से हुई थी। ये झूठ है और ये मक्कारी है।”

मतलब सीधा है कि 7 अक्टूबर के आतंकी हमले की बात अगर आप करोगे तो आप मक्कार हैं लेकिन असल में मक्कारी क्या है, ये लोग बेहतर जानते समझते हैं। आतंकियों को खुलेआम मंच से बचाना, रेप, हत्याओं को जायज ठहराने की कोशिश करना और आतंकियों को क्लीन चिट दे देना, ये पता नहीं मक्कारी की श्रेणी में आएँगे की नहीं। अपनी तकरीर में स्वरा ने गाजा पर खूब आँसू बहाए लेकिन हमास के आतंकियों को आलोचना में उनके मुँह से 2 शब्द तक नहीं निकले।

पहले भी आतंकियों का बचाव करती रही है स्वरा

ऐसा पहली बार भी नहीं है जब स्वरा ने इस तरह की हिमाकत की हो, जिस दिन हमास के आतंकियों ने हमला किया उस दिन से ही स्वरा ने हमास के आतंकियों को बचाना शुरू कर दिया था।

इस हमले के तुरंत बाद स्वरा ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, “अगर आपको फिलिस्तीनियों पर इजरायल के हमले से सदमा नहीं लगा तो…इजरायल पर हमास के हमलों से आपका सदमा और डर पाखंडी लगता है।” यानी स्वरा यह बता रही थी कि हमास ने जो हत्याएं की हैं, रेप किए हैं उन सब पर लोग शांत रहे, उन्हें सदमा ना लगे क्योंकि यह सब उसकी नजरों में गलत नहीं था।

इजरायल पर ही लगाए यौन हिंसा के आरोप

कुछ दिनों पहले की ही बात है जब BBC ने एक रिपोर्ट छापी कि किस तरह हमास के आतंकियों ने रेप और यौन हिंसा को नरसंहार की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया था। स्वरा यहाँ भी आतंकियों का बचाव करने से नहीं चूकी। स्वरा ने कह दिया कि स्वरा ने अपने ट्वीट में उल्टा इजरायल पर इल्जाम लगाए। उसने यह बताया कि हमास द्वारा यौन उत्पीड़न की खबरें झूठी हैं।

क्या इजरायल के दर्द पर प्रोपेगैंडा करने वाले ‘मक्कार’ नहीं?

स्वरा जैसे लोग कथित सेकुलर लोग झूठे और मनगढ़ंत इतिहास का लबादा ओढ़कर आतंकियों को कुकृत्यों को जायज ठहराते हैं। स्वरा ने अपनी तकरीर में कहा कि इतिहास 7 अक्टूबर से नहीं बल्कि 1948 से देखा जाएगा। मतलब इतिहास भी जितनी स्वरा की सुविधा हो उनता पीछे ही जाए, अगर स्वरा को इतिहास में ही जाना है तो फिर 2000-2500 साल पीछे क्यों नहीं जाती?

असल में ऐसे लोगों को ना इतिहास से मतलब है, ना किसी के दर्द है इन लोगों को सिर्फ अपने प्रोपेगैंडा से मतलब है। लोग मरते रहे और इनका प्रोपेगैंडा चलता रहे फिर चाहे इसके लिए इन्हें आतंकियों के ही पक्ष में क्यों ना बोलना पड़े। आतंकवाद को जायज ठहराने इनके नैरेटिव को सूट करता है। कभी आपने देखा है कि पाकिस्तान में, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ स्वरा ने हाथों में तख्ती लेकर आवाज उठाई हो?

इस्लामी मुल्कों से घिरे एक यहूदी मुल्क पर जुल्म होता रहे, उनके बच्चे मरते रहें, उनकी बेटियों-महिलाओं का रेप होता रहे उससे इन्हें कोई मतलब नहीं है। हत्याओं को ऐसे लोगों ने अपनी नौटंकी और प्रोपेगैंडा का हिस्सा मान लिया है। इजरायली लोगों का दर्द इनके लिए सजा नहीं है, क्योंकि असल में प्रोपेगैंडा चलाने वाले ये लोग ‘मक्कारी’ करते हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

शिव
शिव
7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कॉकरोचों के प्रदर्शन में घुसी नेहा बोरा कौन है? जानिए AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष का चिट्ठा- उमर खालिद को बताती है बेचारा, ब्राह्मणों से...

आइए जानते हैं CJP के प्रदर्शन में घुसकर वामपंथी एजेंडे को हवा देने वाली नेहा बोरा कौन हैं और कैसे वो ब्राह्मणों के खिलाफ जहर उगलती आईं हैं।

गाजियाबाद के सीवर प्लांट में पोलियो वायरस मिलने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, किसी बच्चे में संक्रमण नहीं: जानिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने कैसे बढ़ाई...

गाजियाबाद के सीवर में पोलियो वायरस मिला। यह वायरस पोलियो वैक्सीन के कमजोर अंश से विकसित होता है जो कमजोर टीकाकरण वाले इलाकों में फैलता है।
- विज्ञापन -