Wednesday, May 12, 2021
Home विविध विषय अन्य अश्वगंधा का अश्वमेध: कोरोना की आयुर्वेदिक दवा बनाने के पतंजलि के दावे में कितना...

अश्वगंधा का अश्वमेध: कोरोना की आयुर्वेदिक दवा बनाने के पतंजलि के दावे में कितना दम?

पतंजलि अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रस्तावित यह दवा रोगी को तो संक्रमण से मुक्त करती ही है, साथ ही स्वस्थ व्यक्ति की कोशिकाओं में भी संक्रमण को प्रवेश करने से रोकती है। यानी अनलॉक के बाद घर से बाहर लोगों के इंतजार में बैठे कोरोना के खिलाफ भी ये औषधि सुरक्षा कवच का काम करेगी।

‘बगल में छोरा शहर में ढिंढोरा’ कहावत तो आपने सुनी ही होगी। लेकिन हम कहावतों पर कब ध्यान देते हैं? उन्हें एक कान से सुनते हैं और दूसरे में exhaust fan लगाकर आराम से सो जाते हैं। इसीलिए बगल के छोरे हो हाशिए पर रखकर विलायती छोरे ढूँढने में विशेष रूचि रखते हैं।

लगता है इस बार यही कहावत सच होने जा रही है कोरोना के इलाज के बारे में। हम यहाँ कोरोना की बूटी के इंतज़ार में ऐल्प्स और रॉकी पर्वत शृंखलाओं की ओर टकटकी बाँधे बैठे हैं और पता चला कि हनुमान जी कब के हिमालय से जड़ी-बूटी ले आए।

देखो जी, छोरा बगल में चुपचाप बैठा हो इसलिए किसी को दिख न रहा हो तो फिर भी बात समझ में आती है। लेकिन अगर छोरा ही ढिंढोरा पीट के ये बता रहा हो कि मैं यहाँ बैठा हूँ तो आप उसकी उपेक्षा नहीं कर सकते। पहले तो शहर के ढिंढोरे में उसकी आवाज विलीन हो गई थी, फिर जब पता चला कि शहर भर में कहीं कुछ नहीं मिलने वाला, तब जाकर शहर का ढिंढोरा थमा और और बगल से एक दूसरे शंखनाद की आवाज आई।

दरअसल Covid-19 की वैक्सीन बनाने की विश्वव्यापी जद्दोजहद के बीच भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के क्षेत्र से बड़ी खबर आ रही है। वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरिद्वार में ‘पतंजलि अनुसंधान संस्थान’ का उद्घाटन किया। विश्व भर में योग और आयुर्वेद का लोहा मनवा चुके स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा स्थापित व संचालित पतंजलि का यह अनुसंधान संस्थान अत्याधुनिक विश्वस्तरीय प्रयोगशालाओं से युक्त है। यहाँ साक्ष्य आधारित चिकित्सा (Evidence Based Medicine) पर बल देते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ उच्च गुणवत्ता वाले नैदानिक अनुसंधान किए जाते हैं।

इसी अनुसंधान संस्थान में Covid-19 के संक्रमण को निष्प्रभावी करने के लिए शोध किए गए और उन प्रयोगों के आधार पर कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवा का निर्माण किया गया। इसके माध्यम से अनेक मरीजों की सफल चिकित्सा करने के बाद पतंजलि ने इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया, जो इस समय अपने अंतिम चरण में है।

पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण के अनुसार उनके द्वारा बनाई गई कोरोना की विशेष दवा का प्रयोग हर आयु वर्ग के और हर एक स्टेज के मरीजों पर किया जा चुका है, जिनमें से लगभग सभी रोगियों में 7-8 दिन में कोरोना नेगेटिव पाया गया और कुछ ही रोगियों को ठीक होने में 12-14 दिन लगे।

इन सब रोगियों का आँकड़ा पतंजलि के पास मौजूद है। किंतु चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे बड़ा साक्ष्य होता है क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल। इसलिए इसे पूरी तरह साक्ष्य आधारित दवाई बनाने के लिए इसका क्लीनिकल ट्रायल जरूरी था, जो चल रहा है और इसके नतीजे एक सप्ताह के अंदर-अंदर आने की संभावना है।

नतीजे उत्साहवर्धक हैं, किंतु नैदानिक परीक्षण की प्रक्रिया अपना समय लेती है। उसमें थोड़ा वक्त लगता है। लेकिन अगर NatWest Tri Series के फ़ाइनल मुकाबले में भारत को जीत के लिए तीन ओवर में सिर्फ तीन रन चाहिए होते और पाँच विकेट हाथ में होते तो लॉर्ड्स की बालकनी में शर्ट उतारकर लहराने के लिए सौरव गाँगुली मैच के ख़त्म होने का इंतजार कभी न करते। कुछ खुशियाँ बड़ी होती हैं। उन्हें आप योजनाबद्ध तरीके से व्यक्त नहीं करते, वो अपने आप हो जाती हैं।

शायद इसीलिए नैदानिक परीक्षण (clinical trial) के अंतिम परिणाम की औपचारिक घोषणा से पूर्व ही उत्साहवर्धक परिणामों को देखते हुए बाबा रामदेव ने कोरोना के इलाज में सौ प्रतिशत सफलता मिलने के प्रसन्नतादायक समाचार का ऐलान कर दिया है। आचार्य बालकृष्ण का भी यही दावा है कि जब वो कोरोना औषधि की बात करते हैं तो सिर्फ प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की बात नहीं करते, बल्कि कोरोना के पूर्ण इलाज की बात कहते हैं।

माना कि मैच ख़त्म होना अभी बाक़ी है लेकिन जीत पक्की है। कड़ी मेहनत और लगन से प्राप्त इस जीत के लिए कप्तान सहित पूरी टीम बधाई की पात्र है।

कोरोना की विश्वव्यापी महामारी में जहाँ लाखों लोग चिकित्सा के आभाव में अपनी जान गँवा चुके हैं और पूरा विश्व एक अभूतपूर्व आपदा से गुजर रहा है। ऐसे में यह अनुसंधान भारत के प्राचीन आयुर्वेद या पतंजलि की उपलब्धि को तो याद रखा ही जाएगा साथ ही मानव सभ्यता की साझा लड़ाई को जीतने में एक महत्तम ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।

आइए इस बड़ी सफलता को थोड़ा करीब से समझें। हाल ही में पतंजलि अनुसंधान संस्थान की ओर से एक शोधपत्र तैयार किया गया- ‘पारंपरिक भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति द्वारा नोवल करोना वायरस (Covid-19) के संक्रमण को रोकने हेतु प्रभावी उपचार’। यह शोधपत्र एक अमेरिकी-जर्मन एकडेमिक पब्लिशिंग कंपनी Spring Nature की प्रसिद्ध शोध पत्रिका Virology Journal में प्रकाशनाधीन है, जिसकी मुद्रण पूर्व प्रति को Virology के सर्वर पर देखा जा सकता है

इस शोधपत्र के अनुसार अश्वगंधा, गिलोय, और तुलसी में उपस्थित प्राकृतिक पादप रसायनों को Covid-19 की संक्रामकता को रोकने में विशेष रूप से प्रभावी पाया गया है। अश्वगंधा में पाया जाने वाला फायटोकेमिकल यानी पादप रसायन ‘विथेनॉन’ Covid-19 वायरस को शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकता है और उसकी संक्रामकता को अवरुद्ध करता है।

गिलोय में उपस्थित टीनोकॉर्डीसाइड भी अश्वगंधा जैसे ही आशाजनक परिणाम दिखाता है। जबकि तुलसी में पाया जाने वाला स्कूटैलारिन नामक प्राकृतिक फ्लैवॉन RDRP नाम के उस एंजाइम को अवरुद्ध करता है, जो शरीर में कोरोना विषाणु के बहुलीकरण और उसकी वृद्धि के लिए ज़िम्मेदार है। इस तरह तुलसी शरीर में कोरोना के प्रसार को रोकने में विशेष रूप से कारगर है।

इसके अतिरिक्त पाँच हजार से भी अधिक वर्ष पूर्व महर्षि चरक द्वारा नस्य के रूप में निर्दिष्ट अणु तैल कफ की अधिकता को रोकने और ऊर्ध्वजत्रुगत (ENT) विकारों के उपचार के लिए प्रयुक्त होता है, जिसकी अनुशंसा इस कोविड उपचार में की गई है। इसकी उपयोगिता को देख कर आप भी समझ सकते हैं कि ये कोरोना के इलाज में कितना आवश्यक है।

इन सब के साथ एक और महत्वपूर्ण औषधि है श्वासारि रस, जो श्वसन तंत्र से सम्बंधित रोगों की चिकित्सा में विशेष रूप से प्रभावशाली है। यह फेफड़ों की स्वस्थ ऑक्सीकृत अवस्था को स्थिर रखने मे सहायक है और साथ ही फेफड़ों के शोथ को कम करने में उपयोगी है। इस तरह यह आयुर्वेदिक औषधि श्वास-प्रश्वास पर सीधा असर डालने वाले कोरोना के इलाज में बड़ी भूमिका निभाती है।

इन सब शोधों के आधार पर पतंजलि ने कोरोना के इलाज के लिए एक चिकित्सा व्यवस्था (Treatment Regime) को तैयार किया है। जिसके आशाजनक परिणामों पर शीघ्र ही नैदानिक परीक्षण की मुहर लगने की उम्मीद है। Covid-19 संक्रमणजन्य रोगों के उपचार के लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ पारंपरिक चीनी चिकित्सा पद्धति में प्रयुक्त होने वाली औषधियों का प्रयोग भी किया जा रहा है। अब कोरोना की चिकित्सा के लिए ICMR द्वारा निर्धारित एलोपैथिक चिकित्सा के अलावा आयुर्वेदिक औषधियों से चिकित्सा का रास्ता साफ़ हो जाएगा।

पतंजलि अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रस्तावित यह दवा रोगी को तो संक्रमण से मुक्त करती ही है, साथ ही स्वस्थ व्यक्ति की कोशिकाओं में भी संक्रमण को प्रवेश करने से रोकती है। यानी अनलॉक के बाद घर से बाहर लोगों के इंतजार में बैठे कोरोना के खिलाफ भी ये औषधि सुरक्षा कवच का काम करेगी। स्वस्थ व्यक्ति में संभावित संक्रमण को प्रवेश करने से रोकना इसका ऐसा पक्ष है जो बड़ी संख्या में लोगों को को आत्मरक्षा हेतु आत्मनिर्भर बनाएगा।

अन्त में नैदानिक परीक्षण (clinical trial) के परिणामों के लिए यही शुभकामना कि अश्वगंधा के कोरोना मुक्ति अश्वमेध का यह अश्व वैश्विक आरोग्य पटल पर आयुर्वेद की दिग्विजय की पताका फहराएगा और ऋषि संस्कृति के निष्काम मानवसेवा भाव के चक्रवर्तित्व को स्थापित करेगा।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Dr. Amita
डॉ. अमिता गुरुकुल महाविद्यालय चोटीपुरा, अमरोहा (उ.प्र.) में संस्कृत की सहायक आचार्या हैं.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

चढ़ता प्रोपेगेंडा, ढलता राजनीतिक आचरण: दिल्ली के असल सवालों को मुँह चिढ़ाती केजरीवाल की पैंतरेबाजी

ऐसे दर्जनों पैंतरे हैं जिन पर केजरीवाल से प्रश्न नहीं किए गए हैं और यही बात उनसे बार-बार ऐसे पैंतरे करवाती है।

25 साल पहले ULFA ने कर दी थी पति की हत्या, अब असम की पहली महिला वित्त मंत्री

असम में पहली बार एक महिला वित्त मंत्री चुनी गई है। नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी सरकार में वित्त विभाग 5 बार गोलाघाट से विधायक रह चुकी अजंता निओग को सौंपा।

UP: न्यूज एंकर समेत 4 पत्रकार ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी में गिरफ्तार, ₹55 हजार में कर रहे थे सौदा

उत्तर प्रदेश के कानपुर में चार पत्रकार ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजरी करते पकड़े गए हैं। इनमें से एक लोकल न्यूज चैनल का एमडी/एंकर है।

‘हमारे साथ खराब काम हुआ’: टिकरी बॉर्डर गैंगरेप में योगेंद्र यादव से पूछताछ, कविता और योगिता भी तलब

पीड़ित पिता के मुताबिक बेटी की मौत के बाद उन पर कुछ भी पुलिस को नहीं बताने का दबाव बनाया गया था।

पति से वीडियो कॉल पर बात कर रही थी केरल की सौम्या, फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास के रॉकेट ने उड़ाया

सौम्या संतोष हमास के रॉकेट हमले में मारी गई। जब हमला हुआ उस वक्त वह केरल में रह रहे अपने पति संतोष से वीडियो कॉल पर बात कर रही थी।

97941 गाँव, 141610 टीम: कोरोना से लड़ाई में योगी सरकार का डोर-टू-डोर कैम्पेन असरदार, WHO ने भी माना लोहा

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए योगी सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा।

प्रचलित ख़बरें

इजरायल पर इस्लामी गुट हमास ने दागे 480 रॉकेट, केरल की सौम्या सहित 36 की मौत: 7 साल बाद ऐसा संघर्ष

फलस्तीनी इस्लामी गुट हमास ने इजरायल के कई शहरों पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागे। गाजा पट्टी पर जवाबी हमले किए गए।

मुस्लिम वैज्ञानिक ‘मेजर जनरल पृथ्वीराज’ और PM वाजपेयी ने रचा था इतिहास, सोनिया ने दी थी संयम की सलाह

...उसके बाद कई देशों ने प्रतिबन्ध लगाए। लेकिन वाजपेयी झुके नहीं और यही कारण है कि देश आज सुपर-पावर बनने की ओर अग्रसर है।

‘#FreePalestine’ कैम्पेन पर ट्रोल हुई स्वरा भास्कर, मोसाद के पैरोडी अकाउंट के साथ लोगों ने लिए मजे

स्वरा के ट्वीट का हवाला देते हुए @TheMossadIL ने ट्वीट किया कि अगर इस ट्वीट को स्वरा भास्कर के ट्वीट से अधिक लाइक मिलते हैं, तो वे भारतीय अभिनेत्री को एक स्पेशल ‘पॉकेट रॉकेट’ भेजेंगे।

‘इस्लाम को रियायतों से आज खतरे में फ्रांस’: सैनिकों ने राष्ट्रपति को गृहयुद्ध के खतरे से किया आगाह

फ्रांसीसी सैनिकों के एक समूह ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को खुला पत्र लिखा है। इस्लाम की वजह से फ्रांस में पैदा हुए खतरों को लेकर चेताया है।

इजरायल का आयरन डोम आसमान में ही नष्ट कर देता है आतंकी संगठन हमास का रॉकेट: देखें Video

इजरायल ने फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास द्वारा अपने शहरों को निशाना बनाकर दागे गए रॉकेट को आयरन डोम द्वारा किया नष्ट

बांग्लादेश: हिंदू एक्टर की माँ के माथे पर सिंदूर देख भड़के कट्टरपंथी, सोशल मीडिया में उगला जहर

बांग्लादेश में एक हिंदू अभिनेता की धार्मिक पहचान उजागर होने के बाद इस्लामिक लोगों ने अभिनेता के खिलाफ सोशल मीडिया में उगला जहर
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,388FansLike
92,652FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe