दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के बीच अमेरिकी AI कंपनी एंथ्रोपिक ने बेंगलुरु में अपना नया ऑफिस खोलने की घोषणा की। यह एशिया में टोक्यो के बाद उसका दूसरा बड़ा सेंटर है। भारत में कंपनी की कमान एंथ्रोपिक इंडिया की मैनेजिंग डायरेक्टर इरीना घोष सँभालेंगी। कंपनी ने एंटरप्राइज, स्टार्टअप, शिक्षा, कृषि और सार्वजनिक क्षेत्र में कई साझेदारियों का भी ऐलान किया है।
एंथ्रोपिक के लोकप्रिय AI असिस्टेंट क्लॉड डॉट एआई (Claude.ai) के लिए भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। कंपनी के अनुसार, भारत में क्लॉड का लगभग आधा उपयोग कोडिंग, गणना और सॉफ्टवेयर विकास जैसे तकनीकी कामों में हो रहा है।
#TechToday | Anthropic opens new office in Bengaluru, announces partnerships across India https://t.co/289pblQqhj
— Business Today (@business_today) February 16, 2026
भारत में असंभव चीजें भी संभव हैं: राहुल पाटिल
बेंगलुरु कार्यालय के उद्घाटन पर आयोजित डेवलपर समिट में एंथ्रोपिक के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (Chief Technology Officer) राहुल पाटिल ने बेंगलुरु में बिताए बचपन को याद किया। उन्होंने कहा, “भारत में असंभव चीजें भी संभव हैं।”
Rahul Patil, CTO, Anthropic draws on his Indian and Bengaluru roots while kicking off the developer summit
— Chandra R. Srikanth (@chandrarsrikant) February 16, 2026
Impossible things are possible in India
I was born and brought up in Bengaluru
My mom was a computer science teacher
Studied in Baldwin, Joseph and PES University
PES… pic.twitter.com/5W1tiJEv9U
राहुल पाटिल ने बताया कि उनकी माता कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षिका थीं। उन्होंने अपनी पढ़ाई बाल्डविन इंस्टीट्यूशंस (Baldwin Institutions), सेंट जोसेफ्स कॉलेज (St. Joseph’s College) और बाद में पीईएस विश्वविद्यालय (PES University) से की। पाटिल ने यह भी साझा किया कि इंजीनियरिंग के पहले वर्ष में ही उनकी मुलाकात पत्नी से हुई थी। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भारत आज न केवल AI के क्षेत्र में बड़ा बाजार बन चुका है बल्कि वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व गढ़ने वाली महत्वपूर्ण भूमि भी है।
भारतीय भाषाओं में AI को मजबूत करने पर फोकस
एंथ्रोपिक भारत में AI को भारतीय भाषाओं में मजबूत बनाने पर खास ध्यान दे रही है। कंपनी का कहना है कि देश में एक अरब से अधिक लोग दर्जनभर से ज्यादा आधिकारिक भाषाएँ बोलते हैं लेकिन AI सिस्टम अब तक अंग्रेजी में ज्यादा बेहतर काम करते रहे हैं।
इस कमी को दूर करने के लिए एंथ्रोपिक ने छह महीने पहले दस प्रमुख भारतीय भाषाओं हिंदी, बांग्ला, मराठी, तेलुगु, तमिल, पंजाबी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम और उर्दू में सुधार का अभियान शुरू किया। बेहतर और संतुलित प्रशिक्षण डेटा तैयार किया गया, जिससे भाषा की प्रवाह और समझ में साफ सुधार हुआ है।
कंपनी कर्या और कलेक्टिव इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट के साथ मिलकर ऐसे सिस्टम भी बना रही है जो खासकर कृषि और कानून जैसे भारतीय क्षेत्रों में AI की क्षमता जाँचें। डिजिटल ग्रीन और अदालत AI के विशेषज्ञ भी इस पहल में जुड़े हैं। लक्ष्य है इन परीक्षण उपकरणों को सार्वजनिक करना ताकि भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर AI सिस्टम तैयार किए जा सकें।
क्लॉड को अपना रहे बड़े स्टार्टअप
एंथ्रोपिक का कहना है कि अक्टूबर 2025 में विस्तार योजना की घोषणा के बाद भारत में उसका राजस्व दोगुना हो गया है। यह बढ़ोतरी बड़े उद्योग समूहों, डिजिटल कंपनियों और शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स से आ रही है।
एअर इंडिया अपने डेवलपर्स को कम लागत और तेजी से कस्टम सॉफ्टवेयर तैयार करने में मदद के लिए क्लॉड कोड का उपयोग कर रही है। फिनटेक मंच CRED ने फीचर डिलीवरी में दोगुनी तेजी और टेस्ट कवरेज में 10% सुधार की जानकारी दी है। वहीं, वैश्विक आईटी सेवा कंपनी Cognizant अपने 3.5 लाख कर्मचारियों के बीच क्लॉड को लागू कर रही है ताकि सिस्टम और AI अपनाने की रफ्तार बढ़ाई जा सके।
स्टार्टअप दुनिया में Razorpay ने अपने रिस्क सिस्टम, रोजमर्रा के कामकाज और अंदरूनी फैसलों में AI को जोड़ दिया है। एंटरप्रेट (Enterpret) अपने AI अस्टिस्टेंट को चलाने के लिए क्लॉड का इस्तेमाल कर रही है और इससे ग्राहकों की राय और जानकारी सीधे क्लॉड तक पहुँच जाती है।
एक और स्टार्टअप Emergent लोगों को साधारण भाषा में बताकर सॉफ्टवेयर बनवाने की सुविधा देता है। इसने पाँच महीने से भी कम समय में करीब 2.5 डॉलर की सालाना कमाई और बीस लाख उपयोगकर्ता बना लिए। यह पूरा मंच क्लॉड पर ही तैयार हुआ है।
इस तेजी से बढ़ते माहौल को सहारा देने के लिए एंथ्रोपिक की भारत टीम कंपनियों और नए कारोबारों को जमीन से जुड़ी AI सलाह देगी ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से क्लॉड आधारित समाधान बना सकें और आगे बढ़ा सकें।
शिक्षा के लिए AI का इस्तेमाल
भारत में क्लॉड का करीब 12 प्रतिशत उपयोग पढ़ाई से जुड़ा है। एंथ्रोपिक ने प्रथम (Pratham) के साथ मिलकर सुरक्षा और बेहतर शिक्षा पर काम शुरू किया है। प्रथम ने एंथ्रोपिक को अपना पहला रणनीतिक AI लैब सहयोगी चुना है। क्लॉड से चलने वाली ‘एनीटाइम टेस्टिंग मशीन’ 20 स्कूलों के 1,500 छात्रों पर आजमाई जा रही है और 2026 तक 100 स्कूलों तक पहुँचेगी। इसे पढ़ाई छोड़ चुकी 5,000 से ज्यादा महिलाओं के लिए भी जोड़ा गया है ताकि वे तैयारी जारी रख सकें।
कंपनी सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन (Central Square Foundation) के साथ मिलकर निजी ट्यूटर, टीचर कोचिंग और परीक्षा आधारित पढ़ाई जैसे AI साधनों को बढ़ावा दे रही है। इसका लक्ष्य है कि तकनीकी मदद देकर इन्हें वंचित इलाकों के बच्चों तक पहुँचा दिया जाए।
खेती, स्वास्थ्य और न्याय तंत्र में AI
भारत की डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था को बड़े और आपस में जुड़े तंत्र के रूप में दुनिया में मिसाल माना जाता है। एंथ्रोपिक, एकस्टेप फाउंडेशन (EkStep Foundation) के साथ मिलकर देख रही है कि AI को इस मजबूत आधार से कैसे जोड़ा जाए।
खेती, जो देश की अर्थव्यवस्था का लगभग छठा हिस्सा है और आधी आबादी को रोजगार देती है, बड़ा फोकस क्षेत्र है। ओपन एग्रीनेट (OpenAgriNet) पहल के तहत किसानों और कृषि कामगारों तक विशेषज्ञ जानकारी पहुँचाने के लिए क्लॉड को जोड़ा जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नूरा हेल्थ (Noora Health) और इंटेलेहेल्थ (Intelehealth) जैसे संगठन क्लॉड कोड और कोवर्क (Cowork) के जरिए अपने सिस्टम बेहतर करने और दूरदराज के मरीजों को बेहतर इलाज से जोड़ने पर काम कर रहे हैं।
करीब 5 करोड़ लंबित मामलों वाले भारत के न्याय तंत्र में भी AI से मदद की कोशिश है। अदालत एआई (Adalat AI) के साथ मिलकर राष्ट्रीय वॉट्सऐप हेल्पलाइन शुरू की जा रही है जो मामलों की ताजा जानकारी, दस्तावेजों का सार, अनुवाद और कानूनी सवालों के जवाब भारतीय भाषाओं में देगी। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने भारत डिजिटल (Bharat Digital) के सहयोग से पहला सरकारी MCP सर्वर शुरू किया है, ताकि AI प्रणालियाँ राष्ट्रीय आँकड़ों तक पहुँच पा सकें। निजी क्षेत्र में स्विगी (Swiggy) क्लॉड के जरिए किराना मँगाने और भोजन आरक्षण की सुविधा दे रहा है।
वैश्विक AI कंपनियाँ भारत को क्यों चुन रही हैं?
एंथ्रोपिक का विस्तार एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। पिछले 2 वर्षों में कई वैश्विक AI कंपनियों ने शोध, साझेदारी और बाजार विस्तार के लिए भारत में निवेश बढ़ाया है। OpenAI और Microsoft ने शोध सहयोग, क्लाउड भागीदारी और डेवलपर कार्यक्रमों के जरिए भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। Google ने भी भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए एआई शोध और उत्पादों का विस्तार किया है।
भारत के पास तीन बड़ी ताकतें हैं दुनिया के सबसे बड़े डेवलपर समूहों में से एक, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा जैसे पहचान और भुगतान प्रणाली, और कई भाषाओं व विविध जरूरतों वाला विशाल बाजार। यही कारण है कि भारत AI परीक्षण और विस्तार के लिए उपयुक्त बन गया है। आने वाले वर्षों में भारत का AI बाजार तेजी से बढ़ने और डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देने की उम्मीद है।
(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में दिव्या भारती ने लिखी है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)


