212 स्तम्भ, 5 द्वार: कुछ ऐसा होगा अयोध्या का भव्य राम मंदिर, 1990 से ही चल रहा है काम

मंदिर के पूर्ण निर्माण के लिए कम से कम 1.75 लाख क्यूबिक फीट बलुआ पत्थर की आवश्यकता होगी, जैसी कि इसकी कल्पना भी की गई थी। मंदिर निर्माण कार्य की शुरूआत 1990 की शुरुआत से ही हो गई थी लेकिन अभी भी काई कार्य बाकी हैं।

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से अब भगवान राम के मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ हो गया है। ऐसे में लोगों के ज़ेहन में एक बात ज़रूर आती होगी कि आख़िर कैसा होगा भव्य राम मंदिर? दरअसल, वर्षों से अयोध्या में दरवाज़ों और स्तम्भों को तराशने का काम जारी है। जहाँ रामलला को स्थापित किया जाएगा और उनकी पूजा की जाएगी, वो गर्भगृह आकार में काफ़ी बड़ा होगा। ऐसा कहा जा रहा है कि इसकी दीवारें तैयार हो चुकी हैं, लेकिन अभी ‘गर्भगृह’ का निर्माण होना बाक़ी है।

ख़बर के अनुसार, मंदिर में कुल 212 स्तम्भ होंगे। इनमें से लगभग आधे स्तम्भ तैयार हो गए हैं, जबकि आधे स्तम्भों पर नक्काशी होनी बाक़ी है। अनुमोदित डिज़ाइन के अनुसार, छत पर एक “शिखर” होगा, जो विशाल राम मंदिर की भव्यता को प्रदर्शित करेगा।

प्रस्तावित मंदिर की ऊँचाई 128 फीट, चौड़ाई 140 फीट और लंबाई 270 फीट होगी। बता दें कि इस विशाल मंदिर को विशिष्ट बनाने के लिए स्टील का कोई उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, राम मंदिर में 5 प्रवेश द्वार होंगे: सिंह द्वार, नृत्य मंडप, रंड मंडप, पूजा कक्ष और परिक्रमा के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘गर्भगृह’। रामलला की मूर्ति को भूतल पर ही रखा जाएगा।

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मंदिर के पूर्ण निर्माण के लिए कम से कम 1.75 लाख क्यूबिक फीट बलुआ पत्थर की आवश्यकता होगी, जैसी कि इसकी कल्पना भी की गई थी। मंदिर निर्माण कार्य की शुरूआत 1990 की शुरुआत से ही हो गई थी लेकिन अभी भी काई कार्य बाकी हैं। यह एक आसान काम नहीं होगा, लेकिन काम पूरी तरह से ख़त्म करने के लिए कम से कम 4 साल का समय लग जाएगा।

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया, “काम ख़त्म होने से संबंधित मैं आपको कोई समय सीमा नहीं दे सकता। लेकिन हम चाहते हैं कि निर्माण जल्द से जल्द शुरू हो।”

समय अधिक लगने के मुख्य कारणों में से एक कारण ‘कार्यशाला’ तक सामान पहुँचाना है। सड़कें समतल नहीं हैं, इसलिए पत्थरों की आपूर्ति भी धीमी है। इसके अलावा, हाथ की नक्काशी प्रक्रिया काम को धीमा कर देती है। हालाँकि, भूतल का काम ख़त्म हो गया है।

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बरखा दत्त
मीडिया गिरोह ऐसे आंदोलनों की तलाश में रहता है, जहाँ अपना कुछ दाँव पर न लगे और मलाई काटने को खूब मिले। बरखा दत्त का ट्वीट इसकी प्रतिध्वनि है। यूॅं ही नहीं कहते- तू चल मैं आता हूँ, चुपड़ी रोटी खाता हूँ, ठण्डा पानी पीता हूँ, हरी डाल पर बैठा हूँ।

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