Saturday, March 2, 2024
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’14 साल के रोहित को मारकर दुर्गा मंदिर के प्रांगण में बने कुएँ में फेंक दिया’: सराजुद्दीन, इस्ताक और शहन पर केस

“31 जुलाई को सराजुद्दीन, इस्ताक और शहन शाह बबुआ को खेलने के बहाने ले गए। जब वह वापस नहीं आया तो हमने उसकी छानबीन की। रात के 11 बजे तक हम उसे ढूँढते रहे। हमें कुछ पता नहीं चला। उन लोगों ने उसे कुएँ में फेंक दिया था और अगले दिन वही लोग शव लाकर घर पर रख गए। अब हमें बस इंसाफ चाहिए।”

बिहार के छपरा प्रखंड में एक गाँव है- नैनी। इस गाँव में 31 जुलाई को उर्मिला देवी नामक विधवा के 14 वर्षीय बेटे रोहित की कथित तौर पर हत्या कर दी गई। महिला का आरोप है कि उनके घर के पास रहने वाले दूसरे समुदाय के कुछ लड़कों ने ही उनके बेटे की हत्या की और अगले दिन खोजबीन के बहाने उसका शव लाकर घर के बाहर रख दिया।

इस मामले में पुलिस पर भी आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि नामजद आरोपित अभी तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। उनकी गिरफ्तारी को लेकर आवाज उठाने पर भाजपा के कुछ नेताओं पर भी केस दर्ज कर दिया गया।

14 वर्षीय रोहित

ऑपइंडिया ने इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा उपाध्यक्ष शैलेंद्र सेंगर से बात की। उनके ख़िलाफ़ भी शांति भंग करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है। उन्होंने हमें केस की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिला है।

शैलेंद्र के मुताबिक, मृतक की माँ ने आरोपितों के ख़िलाफ़ नामजद एफआईआर लिखवाई। लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। उनका कहना है कि जब उन लोगों ने इसका विरोध किया तो उनके ख़िलाफ़ ही उलटा एफआईआर हो गई। शैलेंद्र ने बताया कि पोस्टमार्टम हो चुका है। लेकिन उसमें क्या कहा गया है, इसका अभी पता नहीं चल रहा है। भाजपा नेता की मानें तो चुनाव नजदीक होने के कारण इस मामले की सच्चाई लोगों को नहीं बताई जा रही है। न ही ये बताया जा रहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आखिर क्या कहा गया है।

रोहित हत्याकांड पर मीडिया रिपोर्ट्स

शैलेंद्र की बातें सुनकर हमने सारे मामले की पुष्टि करने के लिए मुफस्सिल थाना इंचार्ज से संपर्क किया। लेकिन थाना इंचार्ज ने कोई संतोषजनक जवाब देने की जगह यह कहकर फोन काट दिया कि वह बाद में संपर्क करेंगे। आगे अगर इस संबंध में वो हमसे बात करते हैं तो हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

रोहित की मॉं

रोहित की माँ अपने बेटे की मृत्यु के बाद से ही इंसाफ की माँग कर रही हैं। वह बार-बार यही कहती हैं, “31 जुलाई को सराजुद्दीन, इस्ताक और शहन शाह बबुआ को खेलने के बहाने ले गए। जब वह वापस नहीं आया तो हमने उसकी छानबीन की। रात के 11 बजे तक हम उसे ढूँढते रहे। हमें कुछ पता नहीं चला। उन लोगों ने उसे कुएँ में फेंक दिया था और अगले दिन वही लोग शव लाकर घर पर रख गए। अब हमें बस इंसाफ चाहिए।”

उर्मिला देवी ने इस संबंध में तीनों आरोपितों के ख़िलाफ़ एफआईआर करवाई है और अपना लिखित बयान भी दिया है। उनका कहना है कि 1 अगस्त को आरोपित रोहित के चचेरे को भाई को लेकर उसे ढूँढने गए और थोड़ी देर उन लोगों ने उसे इधर-उधर घुमाया। फिर उसे घटनास्थल पर सीधे ले गए। कुएँ में रोहित मृत अवस्था में था। आनन-फानन में आरोपितों ने ही उसका शव निकाला और उनके दरवाजे पे ले जाकर रख दिया। रोहित का शव देखकर जब घर में हल्ला हुआ तो पड़ोसी इकट्ठा हुए और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

रोहित की माँ उर्मिला देवी का बयान

रोहित के मामा ने बताया कि वे चाहते हैं कि दोषी पकड़े जाएँ और उन्हें फॉंसी हो। लेकिन इस मामले में प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। गाँव के ही आकाश का कहना है कि रोहित को संप्रदाय विशेष के लोगों ने बेरहमी से मारा। इसके बाद दुर्गा मंदिर के प्रांगण में जो कुआँ है उसमें फेंक दिया। घटना को कई दिन बीत चुके हैं। अभी तक दोषी इस मामले में गिरफ्तार नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामवासियों ने जब रोहित के लिए इंसाफ माँगा तो प्रशासन ने उलटा उन्हीं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर दिया।

ग्रामीण आकाश ने बताया कि रोहित को मारकर दुर्गा माँ के प्रांगण में बने कुएँ में फेंका गया।
रोहित मर्डर पर पर ग्रामीण आकाश

इस मामले में कार्रवाई में देरी से ग्रामीणों और हिंदुवादी संगठनों में रोष है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए बीजेपी किसान मोर्चा उपाध्यक्ष के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सड़क जाम किया था। इसके बाद शैलेंद्र सेंगर, भाजपा मंडल अध्यक्ष विश्वास गौतम, बालेश्वर सिंह, ज्ञानरंजन, राजू कुमार सिंह, संतोष महतो, हन्नी सिंह, प्रकाश कुमार सिंह, विकास कुमार सिंह सहित कई लोगों पर शांति भंग करने के आरोप में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।

रोहित मर्डर पर चश्मदीद

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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