Saturday, May 15, 2021
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दिसंबर 2019 से 2020 के दिल्ली दंगों तक: पहचान छिपाने के लिए इस्लामी भीड़ ने CCTV कैमरों से कैसे की छेड़छाड़

चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि निलंबित AAP पार्षद ताहिर हुसैन के आवास के पास लगे कैमरों से कोई सीसीटीवी फुटेज बरामद नहीं हुई। कथित तौर पर हिंसा से पहले और हिंसा के दौरान किए गए कारनामों को छिपाने के लिए सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ की गई थी।

इस साल फरवरी में इस्लामिक भीड़ द्वारा सीएए विरोध के नाम पर अंजाम दिए गए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली संपत्ति के नुकसान, दंगे, आगजनी और खून-खराबे की गवाह बनी। तब से लेकर अब तक दिल्ली पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए अथक प्रयास किया है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हुए थे।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कई गिरफ्तारियाँ की। दंगों से संबंधित कई आरोप पत्र भी दायर किए हैं। जाँच के दौरान खुलासा हुआ कि इस्लामिक दंगाइयों ने पकड़ में आने से बचने के लिए सीसीटीवी कैमरों को नष्ट कर दिया था।

4 जून (गुरुवार) को दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों को लेकर एक नई चार्जशीट दायर की है। दिल्ली पुलिस ने 20 वर्षीय दिलबर सिंह नेगी की हत्या के मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसे कथित तौर पर इस्लामवादी दंगाइयों ने जिंदा जला दिया था।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि मुस्लिम भीड़ द्वारा जलाई गई संपत्तियों में से एक अनिल स्वीट्स की भी दुकान थी, जहाँ से पुलिस ने 26 फरवरी को नेगी का शव बरामद किया था। दरअसल भोजन और आराम करने के लिए दिलबर सिंह नेगी दुकान से गोदाम में गया था।

दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में पुष्टि की है कि कट्टरपंथी मुस्लिम दंगाइयों ने अपने इलाके में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया था। इस इलाके से ही पुलिस ने नेगी के शव को बरामद किया था। पुलिस ने कहा कि उन्होंने ये गिरफ्तारियाँ चश्मदीद गवाहों के बयान और तकनीकी सबूतों के आधार पर की हैं। हालाँकि पुलिस कुछ ही सीसीटीवी फुटेजों को बरामद कर सकी है, क्योंकि अधिकांश कैमरों को दंगाइयों ने तोड़ दिया था।

ताहिर हुसैन के घर में लगे सीसीटीवी कैमरे को कर दिया था बंद

इसी तरह दिल्ली पुलिस ने 2 जून (मंगलवार) को कड़कड़डूमा कोर्ट में एक चार्जशीट दायर की, जो कि दिल्ली दंगों में AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के संलिप्तता से जुड़ी थी। चार्जशीट में पुलिस ने कहा है कि निलंबित AAP पार्षद ताहिर हुसैन के आवास के पास लगे कैमरों से कोई सीसीटीवी फुटेज बरामद नहीं हुई है। चार्जशीट में कहा गया है कि कथित तौर पर हिंसा से पहले और हिंसा के दौरान किए गए कारनामों को छिपाने के लिए सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ की गई थी।

1030 पेज की चार्जशीट के मुताबिक ताहिर हुसैन के घर और ऑफिस के आसपास कई सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। उसके घर से कैमरों की चार डीवीआर भी बरामद की गई है। इन सभी को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में जमा किया गया था, लेकिन उसमें कहा गया है कि 23 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक कोई भी रिकॉर्डिंग नहीं मिली है।

इसे देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि या तो सीसीटीवी कैमरे बंद थे या वे उस समय काम नहीं कर रहे थे। चार्जशीट में कहा गया है कि दंगों के दौरान ताहिर हुसैन के घर या कार्यालय में किसी भी व्यक्ति की रिकार्डिंग नहीं है। इससे ऐसा लगता है कि वह वहाँ के क्रियाकलापों को रिकॉर्ड नहीं करना चाहते थे।

मार्च 2020 में कुछ वीडियो सामने आए थे, जिनमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चाँद बाग और जाफराबाद इलाकों में इस्लामवादी दंगाइयों द्वारा इलाके के सभी सीसीटीवी कैमरे को तोड़ते हुए देखा गया, क्योंकि ये लोग अपनी पहचान छिपाना चाहते थे। दंगाइयों ने कथित तौर पर दिल्ली पुलिस पर हमला करने से कुछ मिनट पहले ही इन कैमरों को तोड़ा था।

इस घटना में दंगाइयों द्वारा डीसीपी अमित शर्मा बुरी तरह से घायल कर दिए थे और आईपीएस शर्मा को बचाने की कोशिश करने वाले कांस्टेबल रतन लाल को दंगाइयों ने मौत के घाट उतार दिया था।

दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान राजधानी में सीएए विरोध के नाम पर हिंदू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था। इसमें एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने अपनी जान गवाँ दी थी। इसी बीच दिल्ली के गोकुलपुरी में भड़की हिंसा के दौरान एक और डीसीपी घायल हो गए थे।

इतना ही नहीं सीएए विरोध के नाम पर हुए दंगों ने दिल्ली में सांप्रदायिक रूप ले लिया था, जिसके कारण दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा फैल गई थी। दिल्ली की सड़कों पर हुए हिंदू-विरोधी दंगों में करीब 53 लोगों की मौत हो गई थी। दंगाइयों ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर उनका शव भी नाले में फेंक दिया था।

एक पैटर्न

इससे पहले भी पिछले वर्ष दिसंबर में सीएए विरोध के नाम पर देश में लोग सड़कों पर उतर आए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले किया था। सीएए विरोध के नाम पर भड़की हिंसा के कई वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के सामने आए थे। वीडियो में इस्लामिक दंगाई सीसीटीवी कैमरे तोड़ते नजर आए थे।

इस बीच मंगलुरु से कुछ सीसीटीवी फुटेज के वीडियो सामने आए थे। इसमें दंगाई 19 दिसंबर 2019 को सीसीटीवी कैमरों को अपने मुताबिक मोड़ते नजर आए थे। हालाँकि दंगाई क्षेत्र में लगे एक सीसीटीवी कैमरे को एडजस्ट करने से चूक गए, जिससे उनकी हरकतें कैद हो गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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