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कॉन्ग्रेस ने वोट पाने के लिए दिया ‘हिन्दू आतंकवाद’ का नारा, हिन्दू समाज से माँगनी होगी माफ़ी: अरुण जेटली

जेटली ने कहा कि पूरी जाँच 2007-08-09 में हुई और 10 साल तक आरोपितों को जेल में रखा गया। चार्जशीट भी फाईल हुई लेकिन जज ने कहा सबूत नहीं हैं। सवाल उठता है जब सबूत नहीं थे तो फिर केस को उलझाकर क्यों रखा गया।

समझौता ब्लास्ट मामले में चारों आरोपियों– स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी को 20 मार्च को अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद अरुण जेटली ने कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। अरुण जेटली ने कॉन्ग्रेस द्वारा ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द के प्रयोग पर सवाल उठाए हैं। वित्त मंत्री का कहना है कि कॉन्ग्रेस द्वारा इस शब्द का प्रयोग केवल वोटों के लिए किया गया था।

आज (मार्च 29, 2019) सुबह हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘हिन्दू आतंकवाद’ नारे पर वित्त मंत्री ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू समाज को कलंकित किया गया। समाज ये बात जानता है। उन्होंने पूरे हिन्दू समाज से कॉन्ग्रेस को माफी माँगने को कहा। जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए समाज में हिन्दुओं को आतंकी दर्शाने के लिए यूपीए और कॉन्ग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

अरुण जेटली ने कहा कि एनआईए स्वामी असीमानंद और दूसरे आरोपितों के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रही। जेटली की मानें तो इस मामले में जिस तरह से 2007 और उसके बाद जाँच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, उससे साफ़ होता है कि कुछ निश्चित संगठनों को बदनाम करने की कोशिश की गई । उन्होंने कहा कि पूरी जाँच 2007-08-09 में हुई, और 10 साल तक आरोपितों को जेल में रखा गया। चार्जशीट भी फाईल हुई लेकिन जज ने कहा सबूत नहीं हैं। सवाल उठता है जब सबूत नहीं थे तो फिर केस को उलझाकर क्यों रखा गया।

अरुण जेटली ने बताया कि 2007 के बाद से अमेरिका का स्टेट डिपॉर्टमेंट लगातार इस बात की सूचना दे रहा था कि आखिर आतंकी कौन हैं? लेकिन उस पर जाँच करने की बजाए हिन्दू आतंकवाद के नारे को पूरा करने के लिए नकली सबूतों के आधार पर कहानी बनाई गई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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