Friday, July 1, 2022
Homeदेश-समाजअयोध्या मामला: 'जब जन्मस्थान ही देवता तो फिर किसी का दावा नहीं बन सकता'

अयोध्या मामला: ‘जब जन्मस्थान ही देवता तो फिर किसी का दावा नहीं बन सकता’

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा, "पूरे जन्मस्थान को पूजा की जगह बताकर मुस्लिम पक्ष के दावे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। दुर्भाग्य से हाई कोर्ट जन्मस्थान वाली दलील में कूद पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट भी जन्मस्थान वाली दलील में पड़ गया है।"

उच्चतम न्यायालय में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की सोमवार को 24वें दिन की सुनवाई हुई। इस दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि पूरे जन्मस्थान को पूजा की जगह बताकर मुस्लिम पक्ष के दावे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर की पीठ के समक्ष अपनी जिरह आगे बढ़ाते हुए कहा, “पूजा के अधिकार पर जो दलीलें रखी गई हैं, उससे लगता है कि वेटिकन पर केवल ईसाइयों का और मक्का पर केवल मुस्लिमों का हक है। पूरे जन्मस्थान को पूजा की जगह बताकर मुस्लिम पक्ष के दावे को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है।”

धवन ने अपनी दलील रखते हुए कहा, “हिंदू पक्षकारों ने पूरे इलाके पर दावा कर दिया है। मेरी दलील है कि जन्मस्थान कानूनी व्यक्ति नहीं हैं। दुर्भाग्य से हाई कोर्ट जन्मस्थान वाली दलील में कूद पड़ा था। यहाँ भी जन्मस्थान वाली दलील में सुप्रीम कोर्ट पड़ गया है।”

इस मामले में हिंदू पक्षकार (रामलला विराजमान) की तरफ से आस्था व विश्वास के साथ-साथ जन्मस्थान और जन्मभूमि को लेकर दलील दी गई है। अगर हम इसे मूर्ति मानते हैं तो केस को आसानी से निपटाया जा सकता है। लेकिन अगर इसे जन्मभूमि माना जाता है तो फिर कोई कानूनी उपचार ही नहीं बच पाएगा।

मुस्लिम पक्षकार ने ‘जन्मस्थान’ की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जन्मस्थान ‘ज्यूरिस्ट पर्सन’ यानी न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकता। राजीव धवन ने कहा कि जब जमीन यानी जन्मस्थान ही देवता हो गई, तो फिर किसी और का दावा ही नहीं बन सकता, इसलिए जन्मस्थान को इस उद्देश्य से पार्टी बनाया गया है।

उन्होंने दलील में यह भी कहा कि ‘जन्मस्थान’ को सदियों से विवादित स्थान पर होने की दलील देकर यह कोशिश की गई है कि उस पर न तो कानून के सिद्धांत ‘लॉ ऑफ लिमिटेशन’ लागू हो और न ही ‘एडवर्स पोजेशन।’ लॉ ऑफ लिमिटेशन के तहत किसी दीवानी मुकदमे में वाद दायर करने की समय सीमा तय होती है, जबकि ‘एडवर्स पोजेशन’ का मतलब होता है प्रतिकूल कब्जा।

मुस्लिम पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से राजीव धवन ने संवैधानिक बेंच के सामने दलील पेश की। अगली सुनवाई कल यानी मंगलवार को होगी। वहीं अयोध्या मामले की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस अब्दुल नजीर की बेंच के सामने अयोध्या मामले की लाइव स्ट्रीमिंग का मुद्दा उठाया गया।

इस बीच फिर से मध्यस्थता की पहल शुरू करने की कोशिश भी शुरू हो गई है। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों की तरफ से पत्र लिखकर अपील की गई है कि वे कोर्ट के बाहर बातचीत के जरिए मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पहल भी की थी पर 155 दिनों की कोशिश असफल रही और अब मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

पिछले महीने 6 अगस्त से इस केस की रोजाना सुनवाई जारी है। 23 दिन की सुनवाई में हिन्दू पक्ष की दलील पूरी हो गई है। इस समय मुस्लिम पक्ष अपना दलील रख रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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