Wednesday, December 2, 2020
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‘चमा$# कब तक बचेगी’ – अलाउद्दीन ने की छेड़छाड़, पुलिस ने पीड़िता के ही परिजनों को किया गिरफ्तार, बजरंग दल का प्रदर्शन

लड़की नाबालिग, फिर भी पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं? लड़की दलित समाज से, आवेदन में जातिसूचक गाली का उल्लेख, फिर भी केस SC/ST एक्ट में क्यों नहीं? और तो और माहौल कम्युनल न हो, इसके लिए दूसरे पक्ष के FIR का अगले 24 घंटे तक इंतजार किया थाना प्रभारी ने।

बिहार के बेगूसराय जिले के शाहपुर गाँव में एक दलित नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ और उसके परिवार के साथ मारपीट के बाद पिछले दिनों पुलिस ने उसके ही तीन परिजनों को गिरफ्तार कर लिया था। मगर, ताजा सूचना के अनुसार बजरंग दल के लगातार प्रयासों के बाद उन्हें जेल से आखिरकार शनिवार को बेल मिल गई।

लड़की के साथ छेड़छाड़ मामले में दूसरे पक्ष के ख़िलाफ़ शिकायत करने के बाद उसके तीन परिजनों को जेल में बंद किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद से ही बजरंग दल लगातार परिवार को इंसाफ दिलाने की कोशिशों में जुटा था और साथ ही एसएचओ की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर उनके खिलाफ़ आंदोलन भी कर रहा था।

पिछले दिनों बजरंग दल ने इस मामले के संज्ञान में आने के बाद डीएसपी राजन सिन्हा से मिल कर लाखो थाना प्रभारी के निलंबन की माँग उठाई थी। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए पुलिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल किए थे।

बजरंग दल ने पूछे थे सवाल

बजरंग दल का कहना था कि आखिर पूरे मामले में लड़की के नाबालिग होने पर भी पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? लड़की के वंचित समाज से होने और आवेदन में जाति सूचक गाली का उल्लेख देखने के बाद भी केस को एससी-एसटी एक्ट में नहीं क्यों नहीं लिखा गया? लड़की के घायल परिजनों को जेल में क्यों भेजा गया और फिर उन्हें 72 घंटे जेल में क्यों रखा गया?

10 सितंबर को बजरंग दल का रास्ता जाम प्रदर्शनजलाया गया थाना प्रभारी का पुतला भी
10 सितंबर को बजरंग दल का रास्ता जाम प्रदर्शन

बजरंग दल का सवाल था कि जब पीड़ित पक्ष में एक व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था और उसका इलाज चल रहा था, तब भी उसे बिना मानसिक इलाज के सीधे जेल भेज दिया गया और 72 घंटे बंद करके प्रताड़ना दी गई। इसके अलावा संगठन के यह भी आरोप थे कि केस होने के दौरान एक ‘दलाल’ थाना प्रभारी के केबिन में गया था और फिर निकल कर पीड़ित परिवार से पैसे की माँग करने लगा था। बजरंग दल की मानें तो इस बात को प्रमाणित करने के लिए संगठन के पास वीडियोज आदि भी हैं।

इतना ही नहीं, एक ऑडियो का जिक्र करते हुए बजरंग दल प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज कहते हैं कि उनके संगठन के कार्यकर्ता से इस मामले को दबाने की बात भी थाना प्रभारी ने की थी। इसलिए उनका सवाल है कि वंचित समाज की लड़की के साथ अपराध को दबाने की बात करना कहाँ तक उचित है?

गौरतलब है कि इन्हीं सवालों के मद्देनजर बजरंग दल ने 10 सितंबर को रास्ता जाम करके प्रदर्शन किया था। साथ ही थाना प्रभारी का पुतला भी जलाया था। संगठन का कहना था कि वह इस मामले को दलित आयोग और बाल आयोग तक लेकर जाएँगे। हिंदू दलितों पर अत्याचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या था मामला?

3 सितंबर बेगूसराय के शाहपुर गाँव में एक नाबालिग दलित लड़की के साथ दूसरे समुदाय के युवक मो अलाउद्दीन द्वारा छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। लड़की ने ऑपइंडिया को बताया था कि सब्जी लेने के लिए बाजार जाते समय अलाउद्दीन ने उसे पहले साइकिल से गिराया फिर हाथ लगाने लगा। बड़ी मुश्किल से वह खुद को छुड़ा कर भागी, जिस पर उसने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि चम$%^ कब तक बच पाएगी।

लड़की ने घर आकर अपने परिवार को यह सब बताया, जिसके बाद उसके घर के लोग दूसरे पक्ष के लड़के को समझाने गए, लेकिन दूसरे पक्ष ने बात सुनने की बजाय हमला बोल दिया और ईंट-पत्थर फेंकने लगे। घायल अवस्था में जब लड़की के परिजन अपनी शिकायत लेकर थाने में पहुँचे, तो उन्हें इलाज के लिए भेजा गया और फिर लौटने पर उनमें से तीन लोगों को जेल में बंद कर दिया गया।

बजरंग दल के संज्ञान में यह मामला आते ही इस पर थाना प्रभारी से गिरफ्तारी को लेकर सवाल पूछा गया मगर, थाना प्रभारी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और दूसरे पक्ष की एफआईआर का खुद ही इंतजार करने लगे। बजरंग दल के सक्रिय कार्यकर्ता व विभाग संयोजक पंकज कहते हैं कि जब उनसे यह बात कही गई, तब उन्होंने कहा कि क्या बिना दूसरे पक्ष की एफआईआर के एडवांस कार्रवाई में तीनों को गिरफ्तार किया गया है?

दूसरे पक्ष की FIR

उल्लेखनीय है कि पीड़ित परिवार के बाद दूसरे पक्ष की ओर से भी 4 सितंबर को एफआईआर करवाई गई थी। शिकायत के अनुसार दूसरे पक्ष से मो. पप्पू ने बताया कि 3 सितंबर को उनके घर पर 10 लोग (राजू कुमार, अमित कुमार, गौतम कुमार, सुनील दास, राजेश दास, अमरेश कुमार, उदय दास, दिनेश दास, संतोष दास और मंटून दास) आए और गाली गलौच करने लगे।

इसके बाद लाठी-डंडे से उन पर वार भी किया। इस बीच जब उसकी पत्नी सोनी खातुन घर से निकल कर उन्हें बचाने आई तो उसके साथ भी मारपीट हुई और राजू कुमार, अमित कुमार ने उसकी साड़ी पकड़ कर खींच लिया, जिससे वह अर्धनग्न हो गई। इसके बाद शिकायत के मुताबिक उन लोगों ने मो. पप्पू की पत्नी के गले से 10 ग्राम की चेन खींच ली और धमकी दी कि अगर मुकदमा किया तो जान से मार देंगे।

दूसरे पक्ष की एफआईआर

यहाँ बता दें कि इस छेड़छाड़ के मामले में बजरंग दल ने पुलिस पर जो सवाल उठाए, उन पर प्रतिक्रिया लेने के लिए हमने लाखो थाना प्रभारी का पक्ष जानने का प्रयास किया था। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालाँकि, मामले के मद्देनजर थाना प्रभारी संतोष शर्मा ने घटना वाले दिन ऑपइंडिया को पूरा मामला दोनों पक्षों के बीच हुई मारपीट का बताया था और सूचित किया था कि इस संबंध में 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

बजरंग दल कार्यकर्ता पंकज ने पूछी थी गिरफ्तारी की वजह

स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ता पंकज बताते हैं कि जब थाना प्रभारी ने लड़की के घरवालों को गिरफ्तार किया था, तब उन्होंने ही इस मामले में सवाल उठाए थे। वह पुलिस से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहते हैं कि जब शिकायत करने पीड़ित परिवार गया तो पुलिस ने उन्हें ही जेल में डाल दिया। बाद में संगठन के दबाव में उन्होंने दूसरी ओर से भी दो लोगों की गिरफ्तारी की। ऐसे में उन्होंने (पंकज) कहा कि चलिए मान लेते हैं कि पुलिस ने माहौल को शांत करने के लिए ऐसा किया। लेकिन 24 घंटे बाद तो उन्हें छोड़ा जाना चाहिए।

वे बताते हैं कि थाना प्रभारी ने उनके सवालों को सुन कर रहा, “उधर से देख लेते हैं कि क्या शिकायत आती है। उसके बाद छोड़ देंगे।” जिस पर पंकज ने हैरानी जताते हुए कहा, “ये तो एडवांस बुकिंग हो गई कि कोई एफआईआर हुई भी नहीं और आप अपनी तरफ से खुद ही कार्रवाई करके जेल में डाल दिए।”

इस पर थाना प्रभारी ने कहा, “यहाँ माहौल कम्युनल हो जाता है। इसलिए हमें यह सब करना पड़ेगा।” पंकज का आरोप है कि पुलिस अधिकारी ने उस समय ऐसी बातें करके लड़की के परिजनों को नहीं छोड़ा और शाम को दूसरे पक्ष की एफआईआर मँगवा ली।

प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज की माँग

शुभम भारद्वाज का कहना है कि लाखो ओपी के शाहपुर गाँव में एक वंचित दलित समाज की बहन के साथ 3 सितंबर को मो अलाउद्दीन ने छेड़छाड़ करते हुए दुष्कर्म करने का प्रयास किया। विरोध करने पर पीड़ित लड़की के परिजनों पर जानलेवा हमला कर बुरी तरह से घायल कर दिया।

थाना पहुँच कर शिकायत करने वाले पीड़ित परिजनों के साथ लाखो ओपी प्रभारी के द्वारा जातिसूचक गाली गलौज किया गया तथा करीब 72 घण्टे तक जेल में बंद रखा गया। दलाल के माध्यम से पीड़ित से 10 हजार रुपया माँग की गई। केस में POCSO एक्ट की सुसंगत धारा नहीं लगाई गई है। थाना प्रभारी फोन कर मामले को दबाने का दबाव बजरंगदल कार्यकर्ताओं पर दे रहे हैं। इसलिए भ्रष्ट, धर्म एवं दलित विरोधी लाखो ओपी प्रभारी को शीघ्र निलंबित करना जरूरी है।

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