Tuesday, May 18, 2021
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बेंगलुरु दंगा मामला: NIA ने SDPI के चार ठिकानों सहित 43 जगहों पर की छापेमारी, कई अहम दस्तावेज बरामद

पीएफआई का नाम लगातार देश के विभिन्न भागों में हो रहे दंगों को भड़काने और दंगों के लिए पैसा पहुँचाने के आरोपों में आता रहा है। चाहे दिल्ली के दंगे हों, उत्तर प्रदेश हो, केरल में प्रोफेसर का हाथ काटने का मामला हो या फिर बेंगलुरु के दंगे हों, हर जगह पीएफआई का नाम सामने आता रहा है।

देश के कई हिस्सों में दंगों के लिए आरोपित माने जाने वाली पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर एक बार फिर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) का शिकंजा कसने लगा है। एनआईए ने बुधवार (नवंबर 18, 2020) को बेंगलुरु दंगा मामले में 43 जगहों पर छापेमारी की और यह छापेमारी पीएफआई के पॉलिटिकल फ्रंट सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के चार ठिकानों पर भी मारी गई। एनआईए का दावा है कि इस छापेमारी के दौरान अनेक अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं।

एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला इसी साल बेंगलुरु में दो पुलिस थानों में दंगाइयों ने भारी उत्पात मचाया था। घातक हथियारों से लैस इन दंगाइयों ने पुलिस थानों की इमारतों सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नष्ट किया। साथ ही सरकारी कर्मचारियों पर भी हमला बोला। दंगे से आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई और इस दंगे का मकसद समाज में आतंक फैलाना था। एनआईए के आला अधिकारी के मुताबिक, बाद में यह मामला जाँच के लिए एनआईए को सौंप दिया गया। इस मामले में पीएफआई की पॉलिटिकल फ्रंट के एक पदाधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया था।

मामले की आरंभिक जाँच के दौरान यह पाया गया कि दंगा पूरी तरह से सुनियोजित था और इसमें सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के लोगों का भी हाथ था। दोनों थाना क्षेत्रों में हुए दंगे के इस मामले में क्रमशः 124 और 169 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। आज की छापेमारी के दौरान एनआईए को तलवार, चाकू और लोहे की छड़ आदि हमले में प्रयोग की गई सामग्रियाँ बरामद हुईं। साथ ही एसडीपीआई, पीएफआई से संबंधित अहम दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। मामले की जाँच जारी है।

गौरतलब है कि पीएफआई का नाम लगातार देश के विभिन्न भागों में हो रहे दंगों को भड़काने और दंगों के लिए पैसा पहुँचाने के आरोपों में आता रहा है। चाहे दिल्ली के दंगे हों, उत्तर प्रदेश हो, केरल में प्रोफेसर का हाथ काटने का मामला हो या फिर बेंगलुरु के दंगे हों, हर जगह पीएफआई का नाम सामने आता रहा है।

उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु में हुई हिंसा मामले में फरार चल रहे कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मेयर संपत राज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर संदीप पाटील ने बताया, “कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व बेंगलुरु मेयर संपत राज को डीजे हल्ली और केजी हल्ली में हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है।”

उन पर हिंसक भीड़ को उकसा कर दंगे भड़काने का आरोप है। पिछले दिनों कोरोना के इलाज के दौरान संपत एक निजी अस्पताल में भर्ती होने के बाद फरार हो गए थे। इसके बाद से पुलिस लगातार इनकी तलाश कर रही थी।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता संपत राज के नज़दीकी सहयोगी रियाजुद्दीन को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। रियाजुद्दीन पर आरोप था कि उसने संपत राज को छुपने और फरार होने में मदद की। वह कॉन्ग्रेसी नेता को पहले नगरहोले स्थित एक फार्म हाउस लेकर गया था और उसने कुछ दिनों तक संपत राज को वहीं छुपाया था।

बता दें कि पूरे मामले की शुरुआत एक कथित भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट को माना जाता है, जिसे कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन ने पोस्ट किया था। हालाँकि, स्थिति बिगड़ने पर इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया था लेकिन तब तक दंगाइयों ने हिंसा फैलाना शुरू कर दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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