Monday, August 2, 2021
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रेमडेसिविर की जगह कोरोना मरीजों को नॉर्मल इंजेक्शन लगाती थी नर्स, असली वाला कालाबाजारी के लिए प्रेमी को दे देती

पूछताछ में आरोपित ने कबूल किया है कि उसकी प्रेमिका अस्पताल में मरीजों को लगाने के लिए मिलने वाले इंजेक्शन चोरी कर उसे दे देती थी। कोरोना संक्रमितों को वह नॉर्मल इंजेक्शन लगाती थी। एक इंजेक्शन को वह 20-30 हजार रुपए में बेचता था।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मारामारी मची हुई है। इसका फायदा उठाकर कुछ तत्व कालाबाजारी में लगे हुए हैं। मध्य प्रदेश से इस इंजेक्शन के गोरखधंधे का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। भोपाल के एक अस्पताल की नर्स मरीजों की रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराकर उसे अपने प्रेमी को ब्लैक मार्केट में बेचने के लिए दे देती थी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल के जेके अस्पताल की एक नर्स मरीजों को नॉर्मल इंजेक्शन लगाकर, असली रेमडेसिविर बेचने के लिए अपने प्रेमी को दे देती थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब राजधानी की कोलार पुलिस ने इंजेक्शन की कालाबाजारी को लेकर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसकी पहचान गिरधर कॉम्प्लेक्स, दानिशकुंज निवासी झलकन सिंह के तौर पर हुई। उसने बताया कि उसकी प्रेमिका शालिनी जेके अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ है। वह मरीज को नॉर्मल इंजेक्शन लगाकर असली उसे दे देती थी। मामले का खुलासा होने के बाद से आरोपित नर्स फरार है।

20-30 हजार रुपए में बिकता था एक इंजेक्शन

पुलिस की पूछताछ में आरोपित ने कबूल किया है कि उसकी प्रेमिका अस्पताल में मरीजों को लगाने के लिए मिलने वाले इंजेक्शन चोरी कर उसे दे देती थी। कोरोना संक्रमितों को वह नॉर्मल इंजेक्शन लगाती थी। एक इंजेक्शन को वह 20-30 हजार रुपए में बेचता था। यहीं नहीं आरोपित ने जेके अस्पताल के ही डॉक्टर शुभम पटेरिया को भी 13 हजार रुपए में रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचा था, जिसका उसे वर्चुअल पेमेंट भी किया गया था।

दोनों पर रासुका के तहत होगी कार्रवाई

भोपाल पुलिस के डीआईजी इरशाद वली ने कहा है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए धरपकड़ की जा रही है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 389, 269, 270 समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। डीआईजी ने ऐसे सभी आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने की बात कही है।

मरीज के परिजनों की वजह से हुआ गोरखधंधे का खुलासा

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपित झलकन ने जेके अस्पताल में ही भर्ती एक मरीज के परिजनों के साथ रेमडेसिविर को लेकर सौदा हुआ था। लेकिन इसके रेट पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही थी। इसी बीच कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हो गई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस को इसकी जानकारी दे दी। पुलिस ने इसके बाद घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।

इससे पहले राजस्थान के उदयपुर में एक डॉक्टर और एक एमबीबीएस छात्र को रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा था। कोरोना वायरस से संक्रमित एक मरीज के परिजन की शिकायत पर पुलिस ने डॉक्टर मोहम्मद अबीर और और उसके साथी को गिरफ्तार किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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