BHU छात्रों की रैली, PMO को ज्ञापन सौंप कहा- महामना के मूल्य और विश्वविद्यालय के संविधान का हो पालन

देश भर में तमाम मीडिया समूहों ने इस न्यूज़ को ऐसे चलाया जैसे कि पूरे BHU में मुस्लिम टीचर की नियुक्ति का विरोध हो रहा है। जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है। यह विरोध सिर्फ संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में...

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के संस्कृत धर्म-विज्ञान संकाय में फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। छात्रों ने शुक्रवार (नवंबर 22, 2019) को पीएमओ के दखल के बाद धरना को तो समाप्त कर दिया, लेकिन उनका आंदोलन अभी भी जारी है। इस आंदोलन के तहत सैकड़ों की संख्या में छात्रों ने शनिवार (नवंबर 23, 2019) को संस्कृत धर्म-विज्ञान संकाय से अरविंद पुर स्थित पीएमओ ऑफिस तक मार्च निकाला और पीएम को संबोधित ज्ञापन सौंप कर फिरोज खान की नियुक्ति रद करने की माँग की।

आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि जिस तरह से महामना के मूल्यों को दरकिनार करते हुए विश्वविद्यालय में असंवैधानिक रूप से नियुक्ति हुई है, उसी के विरोध में उनका ये आंदोलन जारी है और इसी क्रम में वो प्रधानमंत्री के कार्यालय पर ज्ञापन सौंपने आए हैं।

वहीं जब उनसे प्रोफेसर फिरोज खान के आयुर्वेद विभाग के संस्कृत प्रोफेसर पद के लिए आवेदन करने को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि फिरोज खान का आवेदन करना उनका निजी विषय है और अगर प्रशासन उनकी नियुक्ति करता है तो ये प्रशासन का विषय है। साथ ही छात्रों कहा कि उनका फिरोज खान से कोई द्वेष नहीं है। उनकी माँग बस इतनी है कि महामना के मूल्य और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संविधान का पालन हो।

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बता दें कि पहली बार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के साहित्य विभाग में एक मुस्लिम सहायक प्रोफेसर डॉ फिरोज खान की नियुक्ति 5 नवम्बर को हुई। संकाय के विद्यार्थियों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, इस नियुक्ति के खिलाफ विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था और तब से लगातार प्रदर्शन जारी है।

उल्लेखनीय है कि जब प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे थे तो देश भर में तमाम मीडिया समूहों ने इस न्यूज़ को ऐसे चलाया जैसे कि पूरे BHU में मुस्लिम टीचर की नियुक्ति का विरोध हो रहा है। जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है। अलीगढ़ के तर्ज पर बेशक BHU के नाम में कुछ समानताएँ हो लेकिन वहाँ किसी का सिर्फ मुस्लिम होने की वजह से विरोध कभी नहीं हुआ। 

दरअसल यह विरोध एक गैर-हिन्दू का ‘धर्म-विज्ञान संकाय’ में नियुक्ति का विरोध था। बता दें कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के अंतर्गत दो विभाग आते हैं। पहला संस्कृत विद्या और दूसरा धर्म विज्ञान। इन दोनों में अलग-अलग तरीके की पढ़ाई होती है। संस्कृत विभाग में संस्कृत को भाषा की तरह पढ़ाया जाता है। वहीं, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान विभाग में सनातन धर्म के रीति-रिवाजों, मंत्रों, श्लोकों, पूजा पाठ के तौर-तरीकों और पूजा पाठ के बारे में बताया जाता है।

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